मंत्रियों को Sting Operation का डर क्यों? JD(S) नेता Nikhil Kumaraswamy ने कर्नाटक सरकार को घेरा
यूथ विंग के राज्य अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने विधान सौधा के अंदर कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि मंत्री ऐसे ऑपरेशन के बारे में चेतावनी क्यों दे रहे हैं और कहा कि अगर ऐसी चेतावनियां दी जा रही हैं, तो इसका मतलब है कि "अंदर कुछ तो चल रहा है"। हासन जिले के चन्नारायपटना में बोलते हुए निखिल ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों ने खुद विधानसभा के अंदर स्टिंग ऑपरेशन को लेकर चिंता जताई है और कहा कि इस मामले का फैसला जनता पर छोड़ देना चाहिए। निखिल ने कहा, "दुनिया जानती है कि स्टिंग ऑपरेशन के बारे में सबसे ज़्यादा जानकारी किसे है। आपने उसी पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों - ऐसे अनुभवी नेताओं को, जो अक्सर विधान सौधा के गलियारों में घूमते रहे हैं - सदन के अंदर स्टिंग ऑपरेशन को लेकर चिंता जताते देखा है। सदन में इसका रिकॉर्ड मौजूद है। आइए, इस मामले का फैसला जनता पर छोड़ दें।
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मंत्रियों को कथित तौर पर दी जा रही चेतावनियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से राज्य विधानसभा के अंदर क्या हो रहा है, इस पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मंत्री चेतावनी देते हैं कि सावधान रहें, वे स्टिंग ऑपरेशन कर सकते हैं', तो इसका मतलब है कि अंदर कुछ चल रहा है। क्या मंत्रियों को यह एहसास नहीं होना चाहिए कि वे जनता के भले के लिए काम करने के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं? निखिल ने आगे कहा कि इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट मुख्यमंत्री के अधीन आता है और जो लोग इस विभाग के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें इन आरोपों पर सफाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट मुख्यमंत्री के अधीन आता है। यह उनकी सरकार है। उन्हें ही बोलना चाहिए क्या हम बोल सकते हैं? जिसके पास इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट का प्रभार है, उसे बोलना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के उस आरोप के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य में भ्रष्टाचार का एक सिस्टम चल रहा है और मंत्रियों से अपने मोबाइल फोन बंद करने, दरवाजे बंद करने और रिश्वत लेने के लिए कहा जा रहा है।
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विजयेंद्र ने मांग की थी कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार उन लोगों की पहचान करें जो कथित तौर पर ऐसा सिस्टम चला रहे हैं और यह साफ़ करें कि कौन सी एजेंसियां स्टिंग ऑपरेशन कर रही हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया था कि हाल ही में एक बहुत प्रभावशाली नेता ने रियल एस्टेट कारोबारियों को बुलाकर उनके मोबाइल फ़ोन बंद करवाए और कथित तौर पर पेमेंट बढ़ाने की मांग की। विजयेंद्र ने आगे आरोप लगाया कि कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन करने और ब्लैकमेल करने का इतिहास कांग्रेस का रहा है और उन्होंने राज्य सरकार को चुनौती दी कि वह इन आरोपों पर जनता के सामने स्थिति साफ़ करे।
स्थानीय भाषाओं में ई-गवर्नेंस के लिए Bhashini AI जोड़ेगा Karnataka, बोले Priyank Kharge
कर्नाटक सरकार, AI-बेस्ड भाषा टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म 'भाषिणी' का इस्तेमाल करके लोकल भाषाओं और बोलियों में डिजिटल गवर्नेंस और नागरिकों के लिए सेवाओं को ज़्यादा आसान और सुलभ बनाएगी। राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस मंत्री प्रियांक खड़गे ने गुरुवार को यह बात कही। बेंगलुरु के विधान सौधा में ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारियों के लिए आयोजित 'भाषिणी' वर्कशॉप का उद्घाटन करने के बाद प्रियांक खड़गे ने कहा, "कर्नाटक एक राज्य है, लेकिन इसमें कई दुनियाएँ बसी हैं। अलग-अलग इलाकों में हमारी भाषा, बोलियाँ और सांस्कृतिक संदर्भ काफी अलग-अलग हैं। अगर टेक्नोलॉजी को सच में गवर्नेंस को ज़्यादा सुलभ बनाना है, तो उसे नागरिकों से उसी भाषा में बात करनी होगी जिसे वे समझते हैं। 'भाषिणी' हमें इस अंतर को पाटने के लिए AI, आवाज़ और अनुवाद टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का मौका देती है। हमें 'प्रजा सेवा' और ई-गवर्नेंस के तहत अपनी 700 से ज़्यादा नागरिक सेवाओं को आसान, समझने में सरल और सुलभ बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहिए। सवाल यह नहीं है कि नागरिक टेक्नोलॉजी के हिसाब से खुद को ढाल सकते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या टेक्नोलॉजी नागरिकों के हिसाब से खुद को ढाल सकती है।" एक प्रेस रिलीज़ के मुताबिक, इस वर्कशॉप में सरकारी सेवाओं को आसान, ज़्यादा समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए AI-बेस्ड भाषा और आवाज़ टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर चर्चा की गई।
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कर्नाटक में भाषाओं, बोलियों और सांस्कृतिक परिवेश में काफी क्षेत्रीय विविधता है। यहाँ कन्नड़ मुख्य भाषा है, लेकिन राज्य के अलग-अलग हिस्सों में तमिल, तेलुगु, मराठी, उर्दू, तुलु, बेरी और दूसरी भाषाएँ भी बड़े पैमाने पर बोली जाती हैं। मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा यह कर्नाटक के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए सरकारी क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों के समाधान तैयार करने का भी एक मौका है। हमारी 'गवर्नमेंट फर्स्ट पॉलिसी' के ज़रिए सरकार नए और अनोखे स्टार्टअप्स की पहली ग्राहक बन सकती है, जबकि डीप-टेक और AI इनोवेशन के लिए 1 करोड़ रुपये तक की ग्रांट मिल सकती है। मैं 'भाषिणी' टीम को बेंगलुरु टेक समिट में आमंत्रित करता हूँ ताकि वे इस टेक्नोलॉजी को दुनिया के सामने पेश कर सकें और यह पता लगा सकें कि हम सरकारी सेवाओं (G2C) में इसका इस्तेमाल कैसे बढ़ा सकते हैं। आखिरकार, AI की सफलता को इस बात से मापा जाना चाहिए कि वह लोगों की ज़िंदगी में क्या बदलाव लाता है।
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केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया डिवीज़न के CEO अमिताभ नाग ने 'भाषिणी' और उसकी क्षमताओं के बारे में बात की। प्रजा सेवा विभाग के प्रधान सचिव हर्ष गुप्ता ने शुरुआती भाषण दिया। ई-गवर्नेंस विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार पांडे, सूचना और जनसंपर्क विभाग के सचिव जे. मंजूनाथ, निदेशक भोयर हर्षल नारायणराव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
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