MAH BBA CAP 2026 के लिए आवेदन का आखिरी मौका, आज 5 बजे बंद होगी रजिस्ट्रेशन विंडो
महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) सेल ने MAH BBA CAP 2026 (Centralised Admission Process) के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को अंतिम अवसर दिया है। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आज, 26 जुलाई को शाम 5:00 बजे समाप्त हो जाएगी। पात्र उम्मीदवारों को तय समय के भीतर आवेदन जमा करना अनिवार्य है, क्योंकि इसके बाद समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना नहीं है।
यह रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू हुई थी। पहले इसकी अंतिम तिथि 16 जुलाई तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 20 जुलाई और फिर 26 जुलाई कर दिया गया।
MAH BBA CAP 2026: महत्वपूर्ण तारीखें
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 26 जुलाई 2026 (शाम 5:00 बजे तक)
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की अंतिम तिथि: 27 जुलाई 2026 (शाम 5:00 बजे तक)
प्रोविजनल मेरिट लिस्ट: 29 जुलाई 2026
मेरिट लिस्ट पर आपत्ति दर्ज कराने की अवधि: 30 जुलाई से 1 अगस्त 2026 (शाम 5:00 बजे तक)
फाइनल मेरिट लिस्ट: 3 अगस्त 2026
फाइनल मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद CET सेल राउंड-वाइज सीट अलॉटमेंट का पूरा शेड्यूल जारी करेगा।
MAH BBA CAP 2026 के लिए आवेदन कैसे करें?
उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो कर आवेदन पूरा कर सकते हैं—
महाराष्ट्र CET सेल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
CAP AY 2026-27 लिंक पर क्लिक करें।
MAH BBA CAP 2026 सेक्शन खोलें।
New Registration पर क्लिक करके जरूरी जानकारी दर्ज करें।
मांगे गए स्कैन किए गए दस्तावेज अपलोड करें।
अपनी पसंद के कॉलेजों का चयन करें (अधिकतम 300 विकल्प)।
आवेदन फॉर्म की जांच करने के बाद शाम 5 बजे से पहले सबमिट कर दें।
27 जुलाई तक पूरा करें डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
रजिस्ट्रेशन के बाद उम्मीदवारों को 27 जुलाई, शाम 5 बजे तक डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी पूरा करना होगा। यह प्रक्रिया दो तरीकों से की जा सकती है—
E-Scrutiny (ऑनलाइन वेरिफिकेशन)
निर्धारित वेरिफिकेशन सेंटर पर फिजिकल स्क्रूटनी
जो उम्मीदवार तय समय के भीतर रजिस्ट्रेशन और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन दोनों प्रक्रियाएं पूरी करेंगे, केवल वही MAH BBA CAP 2026 की आगे की काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्याख्यान: 'जो शिक्षा और शिक्षा नीति संस्कारों को विस्तार ना दे सके, वो व्यर्थ है'; बोले डॉ. हिमांशु द्विवेदी
वाराणसी, 25 जुलाई। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य को संवेदनशील बनाने और उसके संस्कारों को विस्तार देने की प्रक्रिया भी है। भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर हुए विमर्श में वक्ताओं ने शिक्षा में संस्कार, समान अवसर और स्वायत्तता जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया।
हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने शिक्षा में किए जा रहे नए नीतिगत बदलावों के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि इनका लक्ष्य मनुष्य को संवेदनशील बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो शिक्षा और शिक्षा नीति संस्कारों को विस्तार ना दे सके वो व्यर्थ है।” डॉ. द्विवेदी ने पौराणिक और धार्मिक कथाओं के उदाहरणों के जरिए अपने तर्कों को विस्तार देते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया।
बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने शिक्षा की प्रशासनिक और आर्थिक स्वायत्तता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कैंपस में सभी को समान रूप से शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने आजादी के बाद से वर्तमान समय तक की शिक्षा नीतियों की समीक्षा करते हुए उनके विभिन्न पहलुओं की विवेचना भी की।
प्रो. गुरुप्रसाद सिंह ने स्वागत वक्तव्य और विषय प्रवेश के दौरान शिक्षा में सहकार के अर्थ पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि “जिस शिक्षा की अवधारणा को हम आत्मसात करना चाहते हैं वो संस्कारों के बगैर अधूरी है।”
अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र ने शब्दन फाउंडेशन के सहयोग से ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ विषय पर यह व्याख्यान आयोजित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने की। संचालन डॉ. शिवेंद्र राणा ने किया, जबकि अश्विनी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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