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क्या है 'चप्पल आंदोलन', जिसमें शामिल हुए ध्रुव राठी और प्रकाश राज, क्यों CJP फिर सड़क पर उतरी

चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध-प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है. बिहार की राजधानी पटना से लेकर दिल्ली तक चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(SIR) को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसी कड़ी में अब बेंगलूरु में भी विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है.

यहां फ्रीडम पार्क में आयोजित कार्यक्रम में मशहूर अभिनेता प्रकाश राज, यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभिजीत दीपके समेत कई लोग शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों ने SIR को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए.

इस आंदोलन की एक खास बात इसका अनोखा तरीका है. आयोजकों ने मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के विरोध में चप्पल प्रदर्शन का ऐलान किया है. वहीं आगामी 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध-प्रदर्शन को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म है. 

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में जुटे प्रदर्शनकारी

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित विरोध-प्रदर्शन के दौरान 'SIR रद्द करो' और 'ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो' जैसे नारे लगाए गए. कार्यक्रम में शामिल लोगों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे लेकर पारदर्शिता की मांग की. 

इस आंदोलन में अभिनेता प्रकाश राज और यूट्यूबर ध्रुव राठी की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा. अभिजीत दीपके समेत अन्य आयोजकों और समर्थकों ने भी मंच से अपनी बात रखी. 

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान कुछ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से सूची से हटाए गए हैं. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और मामलों के आधार पर की 
जानी बाकी है.

क्या है चप्पल आंदोलन और क्यों हो रहा है विरोध?

आयोजकों ने विरोध दर्ज कराने के लिए 'चप्पल प्रदर्शन' का तरीका चुना है. इस आंदोलन को मतदाता सूची से नाम कथित तौर पर हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध के 
तौर पर पेश किया जा रहा है.

आशुतोष रांका ने छह अक्टूबर को कहा था कि SIR पर आयोजित 'जनता की अदालत' में शामिल होने के बाद वह उन कन्नड़ भाषी लोगों से बातचीत करेंगे, जिनके नाम कथित रूप से गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.

उन्होंने यह भी कहा था कि इसके बाद महिलाओं के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए चप्पल प्रदर्शन किया जाएगा. आयोजकों के मुताबिक, इस पहल के जरिए मताधिकार और मतदाता सूची में नाम बनाए रखने से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा.

10 अक्टूबर को दिल्ली में होगा बड़ा प्रदर्शन

बेंगलुरु के आंदोलन के बाद अब सबकी नजर दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन पर है. आयोजकों ने इसे SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर बताया है.

आशुतोष रांका ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बाधित करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से दक्षिणपंथी चरमपंथी समूहों को जुटाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और प्रदर्शनकारी हिंसा का रास्ता नहीं अपनाएंगे.

सोशल मीडिया पर अपने संदेश में उन्होंने कहा, हम हिंसा नहीं करेंगे. भारत देख रहा है. इस बार मामला सिर्फ दिल्ली पुलिस तक सीमित नहीं रहेगा.

हालांकि, प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने या हिंसा की तैयारी से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है.

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CJP ने वॉलंटियर्स की हिरासत को लेकर उठाए सवाल

आंदोलन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर के कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में उसके वॉलंटियर्स को हिरासत में लिया जा रहा है.

पार्टी का दावा है कि इस तरह की कार्रवाई से विरोध की आवाज दबने के बजाय लोगों में नाराजगी बढ़ेगी. आयोजकों ने संकेत दिया है कि वे अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन जारी रखेंगे.

इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन या पुलिस का पक्ष सामने आने पर ही हिरासत की परिस्थितियों और कार्रवाई के कारणों की स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी.

विपक्ष भी चुनाव आयोग के खिलाफ उठा रहा आवाज

SIR को लेकर जारी विवाद अब केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं रह गया है. विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं. विपक्षी नेताओं की बैठकों और विरोध-प्रदर्शनों के जरिए इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की जा रही है.

दूसरी ओर, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक आंकड़ों और शिकायतों की निष्पक्ष जांच से ही संभव है.

बढ़ सकता है SIR विवाद

बेंगलुरु का चप्पल आंदोलन और दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन आने वाले दिनों में SIR विवाद को और चर्चा में ला सकते हैं. फिलहाल प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित तौर पर हटाए गए नामों की जांच और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़ी हैं.

10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर प्रशासन की प्रतिक्रिया और आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या पर भी नजर रहेगी. यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उठाए गए सवालों पर चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या जवाब दिया जाता है.

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व्यापारी संगठनों ने नए यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को त्योहारी सीजन तक टालने की अपील की

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। व्यापारी संगठनों ने भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए यूपीआई एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) फ्रेमवर्क को त्योहारी सीजन तक टालने की अपील की है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

सूत्रों के हवाले से एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में बताया गया कि व्यापारी संगठनों ने त्योहारी सीजन और अगले साल की शुरुआत तक प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को टालने की अपील की है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो त्योहारी सीजन में उनकी बिक्री पर असर हो सकता है।

नए एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतानों के लिए चुनिंदा व्यापारी श्रेणियों पर 5 रुपए का एक समान शुल्क लागू होगा, जबकि 2,000 रुपए से अधिक के बड़े पर्सन टू मर्चेंट (पी2एम) भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए होगी।

एनपीसीआई का अनुमान है कि इन बदलावों का असर मर्चेंट ट्रांजैक्शन के सिर्फ 4 प्रतिशत हिस्से पर ही पड़ेगा, और 95 प्रतिशत से ज्यादा पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई पेमेंट एमडीआर फ्रेमवर्क के दायरे से बाहर रहेंगे। पीयर-टू-पीयर (पी2पी) मर्चेंट मॉडल का इस्तेमाल करने वाले छोटे मर्चेंट को जीरो एमडीआर की सुविधा मिलती रहेगी।

आम यूजर्स के लिए मुफ्त यूपीआई इस्तेमाल पर कोई मासिक कोटा या लिमिट तय नहीं की गई है, और वे तय मुफ्त फ्रेमवर्क के तहत ट्रांजैक्शन पर बिना किसी एमडीआर चार्ज के यूपीआई पेमेंट करना जारी रख सकते हैं।

नए फ्रेमवर्क में छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक खास फंड भी बनाया गया है, जिसके लिए कुल एमडीआर कलेक्शन का 5 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया है। एमडीआर से होने वाली कमाई को अलग-अलग कंपनियों के बीच बांटा जाएगा और इसका मकसद यूपीआई के विस्तार, साइबर सिक्योरिटी और इनोवेशन को बढ़ावा देना है।

साथ ही, एनपीसीआई ने बैंकों को यह पक्का करने के लिए कहा है कि व्यापारी एमडीआर चार्ज का बोझ ग्राहकों पर न डालें।

--आईएएनएस

एबीएस

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