व्यापारी संगठनों ने नए यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को त्योहारी सीजन तक टालने की अपील की
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। व्यापारी संगठनों ने भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए यूपीआई एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) फ्रेमवर्क को त्योहारी सीजन तक टालने की अपील की है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
सूत्रों के हवाले से एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में बताया गया कि व्यापारी संगठनों ने त्योहारी सीजन और अगले साल की शुरुआत तक प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को टालने की अपील की है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो त्योहारी सीजन में उनकी बिक्री पर असर हो सकता है।
नए एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतानों के लिए चुनिंदा व्यापारी श्रेणियों पर 5 रुपए का एक समान शुल्क लागू होगा, जबकि 2,000 रुपए से अधिक के बड़े पर्सन टू मर्चेंट (पी2एम) भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए होगी।
एनपीसीआई का अनुमान है कि इन बदलावों का असर मर्चेंट ट्रांजैक्शन के सिर्फ 4 प्रतिशत हिस्से पर ही पड़ेगा, और 95 प्रतिशत से ज्यादा पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई पेमेंट एमडीआर फ्रेमवर्क के दायरे से बाहर रहेंगे। पीयर-टू-पीयर (पी2पी) मर्चेंट मॉडल का इस्तेमाल करने वाले छोटे मर्चेंट को जीरो एमडीआर की सुविधा मिलती रहेगी।
आम यूजर्स के लिए मुफ्त यूपीआई इस्तेमाल पर कोई मासिक कोटा या लिमिट तय नहीं की गई है, और वे तय मुफ्त फ्रेमवर्क के तहत ट्रांजैक्शन पर बिना किसी एमडीआर चार्ज के यूपीआई पेमेंट करना जारी रख सकते हैं।
नए फ्रेमवर्क में छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक खास फंड भी बनाया गया है, जिसके लिए कुल एमडीआर कलेक्शन का 5 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया है। एमडीआर से होने वाली कमाई को अलग-अलग कंपनियों के बीच बांटा जाएगा और इसका मकसद यूपीआई के विस्तार, साइबर सिक्योरिटी और इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
साथ ही, एनपीसीआई ने बैंकों को यह पक्का करने के लिए कहा है कि व्यापारी एमडीआर चार्ज का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
--आईएएनएस
एबीएस
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Dussehra 2026: दशहरा की सही तारीख क्या है? नोट करें रावण दहन का समय
Dussehra 2026: दशहरा का त्योहार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी के दिन मनाया जाता है. दशहरे को विजयदशमी भी कहा जाता है. इस दिन रावण दहन किया जाता है. यह ऐसा पर्व है जिसमें अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है. देश के अलग-अलग हिस्सों में रामलीला, रावण दहन, शस्त्र पूजन और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. आइए जानते हैं दशहरा 2026 की सही तिथि और शुभ मुहूर्त.
कब है दशहरा 2026?
द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 पर हो रही है. इस तिथि का समापन अगले दिन 21 अक्टूबर को दोपहर 02:11 मिनट पर होगा. दशहरे के दिन विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर को दोपहर 01:59 मिनट से लेकर 02:45 मिनट तक रहेगा. इसलिए, 20 अक्टूबर को ही दशहरा मनाया जाएगा और इस दिन पर ही रावण दहन किया जाएगा.
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दशहरा का महत्व क्या है?
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के दौरान प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक नवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है. इसके बाद दशमी तिथि पर दशहरा का पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान राम ने लंका पर जीत हासिल की थी और रावण का वध किया था. नवरात्रि के नौ दिनों में देशभर में कई स्थानों पर रामलीला का आयोजन किया जाता है. इस दौरान खुले मैदानों में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले लगाए जाते हैं. उन्हें जलाया जाता है. बड़े-बड़े मेले आयोजित किए जाते हैं और दशहरे के दिन पर ही दुर्गा विसर्जन किया जा सकता है.
दशहरा 2026 का पूजा मुहूर्त
दशहरा के दिन पूजा और शुभ कार्यों के लिए विजय मुहूर्त का खास महत्व माना जाता है. 20 अक्टूबर 2026 को विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. वहीं, अपराह्न पूजा का मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से लेकर 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगा. इन मुहूर्तों में शस्त्र पूजन और अन्य धार्मिक कार्य किए जाते हैं.
रावण दहन कब होगा?
दशहरा के दिन आमतौर पर रावण दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है. हालांकि, रावण दहन का स्थानीय समय शहर और आयोजन स्थलों के अनुसार भी किया जा सकता है. इसलिए, स्थानीय पंचांद और आयोजन की जानकारी भी देखी जा सकती है.
रावण के 10 सिर होने का प्रतीक क्या है?
रावण के दस सिरों के कई धार्मिक व्याख्याओं में मनुष्य के अंदर मौजूद नकारात्मक प्रवृत्तियों का प्रतीक माना जाता है. इनमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और अन्य बुरी प्रवत्तियों को शामिल किया जाता है. रावण दहन का संदेश सिर्फ किसी पुतले को जलाने तक सीमित नहीं माना जाता है बल्कि इसे अपने भीतर की नकारात्मकता और बुरी आदतों को खत्म करने के संकल्प से भी जोड़ा जाता है.
इस साल दशहरा क्यों खास है?
वर्ष 2026 में दशहरा के दिन श्रवण नक्षत्र का संयोग बन रहा है. पंचांग के अनुसार, यह नक्षत्र 19 अक्टूबर की दोपहर से शुरू हो रही है और 20 अक्टूबर की शाम तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रवण नक्षत्र को शुभ माना जाता है. इसलिए, विजयदशमी के दिन शस्त्र पूजन किया जाता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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