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Election Commission पर हार का ठीकरा फोड़कर अराजकता फैला रहे Rahul Gandhi, बोले CM Mohan Yadav

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (CM) मोहन यादव ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे पार्टी की लगातार चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग को दोषी ठहराकर अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। CM यादव ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसा व्यवहार ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) अपनी राजनीतिक चालों से प्रधानमंत्री का सम्मान कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

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CM ने कहा कि राहुल गांधी जो अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वह किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए ठीक नहीं है। चुनाव आयोग की देखरेख में पूरी चुनावी प्रक्रिया होती है और कांग्रेस पार्टी को लगातार चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है; ऐसे में अगर वे अपनी हार के लिए चुनाव आयोग को दोषी ठहराते हैं, तो यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण होगा। प्रधानमंत्री को नीचा दिखाने की राहुल गांधी की चालें कामयाब नहीं होंगी। मैं इस व्यवहार की निंदा करता हूं और उम्मीद करता हूं कि कांग्रेस पार्टी ऐसा करना बंद कर देगी।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को लगातार तीन लोकसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा और कई राज्यों में बार-बार हार मिली, फिर भी वे इन हार की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में लगातार तीन लोकसभा चुनाव हारने और कई राज्यों में बार-बार हार का सामना करने के बावजूद, वे इन हार का पूरा दोष चुनाव आयोग पर मढ़कर अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल झूठे तरीके से बढ़ाने और अपनी लीडरशिप को सही साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी और उसके कार्यकर्ता इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि उनके नेतृत्व में हार के इस सिलसिले के बीच, वे ऐसे लोगों के समूह को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं जो खुद हारने के आदी हो चुके हैं। मेरा मानना ​​है कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है; उन्हें ऐसी हरकतों से बचना चाहिए।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं राहुल गांधी को लगभग 30 साल पुराने उस दौर की याद दिलाना चाहता हूं जब गठबंधन सरकारें आम बात थीं, और उसकी तुलना उस समय से करना चाहता हूं जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी और मोदी जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था। ऐसी स्थिति में, कांग्रेस को इतनी करारी हार का सामना क्यों करना पड़ा? कांग्रेस अभी भी इस बात को स्वीकार नहीं कर पाई है। पार्टी लगातार साजिशें रचती रहती है, लेकिन अराजकता का माहौल बनाना बिल्कुल भी उचित नहीं है। मेरा मानना ​​है कि पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए राहुल गांधी को अपने आचरण और व्यवहार पर विचार करने की ज़रूरत है।

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Indian Air Force Day पर आकाश में भारत की दहाड़, PM Modi और Air Chief Marshal AP Singh के बयानों ने दुश्मनों को बुरी तरह हिला डाला

भारतीय वायुसेना ने आज अपना 94वां वायुसेना दिवस पूरे गौरव और सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के साथ मनाया। गाजियाबाद के हिंडन वायुसैनिक अड्डे पर आयोजित भव्य समारोह में देश ने एक बार फिर उस ताकत को देखा, जिसने दशकों से भारतीय आसमान की रक्षा की है और जरूरत पड़ने पर दुश्मन के घर में घुसकर उसे जवाब देने का सामर्थ्य साबित किया है। समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय वायुसेना हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और ऑपरेशन सिंदूर ने उसकी तेज और प्रभावी युद्धक क्षमता का प्रमाण दिया है।

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि दुनिया के हालिया संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में वायु शक्ति किसी देश के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा का प्राथमिक माध्यम बन चुकी है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना ने इस अभियान में जिस गति से युद्धक कार्रवाई की, उसने उसकी युद्धक तैयारी और क्षमता को साबित किया। 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे ए.पी. सिंह ने वायुसेना प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया।

हम आपको बता दें कि हिंडन वायुसैनिक अड्डे पर समारोह की शुरुआत शानदार सैन्य परेड से हुई। तीनों सेनाओं के प्रमुखों, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और पूर्व वायुसेना प्रमुखों की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह 1960 के दशक की एक पुरानी कार में परेड स्थल पहुंचे, जबकि तीन हेलीकॉप्टरों ने ‘ध्वज’ संरचना में उड़ान भरकर आसमान में भारतीय वायुसेना की शक्ति का प्रदर्शन किया।

समारोह में देश के अग्रिम पंक्ति के युद्धक विमानों और हेलीकॉप्टरों ने भी दुश्मनों के लिए स्पष्ट संदेश दिया। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और जगुआर जैसे लड़ाकू विमान, एलसीएच प्रचंड और एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टरों के साथ महत्वपूर्ण हथियार प्रणालियां और वायु रक्षा प्रणालियां प्रदर्शित की गईं। यह केवल सैन्य साजो-सामान की प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि बदलते युद्धक्षेत्र में भारत की तैयारियों और तकनीकी क्षमता का प्रत्यक्ष प्रदर्शन था।

उधर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वायु योद्धाओं, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय वायु योद्धाओं के साहस, सटीकता और युद्धक तैयारी को प्रदर्शित किया। उन्होंने आपदा और मानवीय संकटों के दौरान वायुसेना की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व है और देश उनके साहस तथा आसमान की रक्षा के संकल्प को सलाम करता है। उन्होंने खास तौर पर कहा कि भारतीय वायुसेना दुश्मन को सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि आंकड़ों और मानवरहित विमानों से भी चौंकाने में सक्षम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में दुनिया की बेहतरीन तकनीकों को भारतीय वायुसेना और सशस्त्र बलों तक पहुंचाया गया है तथा ऑपरेशन सिंदूर का हर क्षण भारतीय सैन्य शक्ति की क्षमता का प्रमाण है।

हम आपको बता दें कि 8 अक्टूबर का दिन इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि 1932 में इसी दिन भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी। शुरुआत में यह ब्रिटिश शाही वायुसेना की सहायक शाखा थी और 1933 में इसका पहला परिचालन दस्ता बना। 1945 में इसके नाम के साथ ‘शाही’ शब्द जुड़ा, जिसे 1950 में भारत के गणराज्य बनने के बाद हटा दिया गया। आज यही शक्ति ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ यानि ‘गौरव के साथ आकाश को छुओ’ के संकल्प के साथ भारत की सुरक्षा की प्रहरी बनी हुई है।

ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन पूमलाई और अब ऑपरेशन सिंदूर तक भारतीय वायुसेना की यात्रा केवल इतिहास नहीं, बल्कि भारत के बढ़ते सैन्य आत्मविश्वास की कहानी है। आज का संदेश बिल्कुल साफ है। भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर युद्ध थोपा गया तो भारतीय वायुसेना आसमान से ऐसा जवाब देने की क्षमता रखती है, जिसे दुश्मन लंबे समय तक याद रखेगा।
 

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Jeet Raval: गुजरात में हुआ जन्म, न्यूजीलैंड के लिए खेला क्रिकेट, अब 38 की उम्र में किया संन्यास का ऐलान

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