फिर लगी तेल में आग: होर्मुज से लाल सागर तक गहराया संकट, 100 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
Brent Crude Price: कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला। गुरुवार शाम ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर तक पहुंच गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और दुनिया की तेल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।
बाजार में निवेशकों को डर है कि अगर क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता और इससे कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती।
ब्रेंट क्रूड फिर 100 डॉलर पर
क्रूड की कीमतों में तेजी तब और तेज हुई जब यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके अलावा अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार 12वीं रात भी हमले किए जाने की खबरों ने मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ा दिया। इन घटनाओं ने दुनिया भर के तेल कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी और बाजार में सप्लाई को लेकर जोखिम का प्रीमियम बढ़ गया।
बाब-अल-मंदेब में भी बढ़ा संघर्ष
मौजूदा स्थिति में बाजार की सबसे बड़ी चिंता दुनिया के दो अहम ऊर्जा मार्गों को लेकर है। इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट शामिल हैं। इन दोनों समुद्री रास्तों से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही होती। अगर इन मार्गों पर किसी तरह की लंबे समय तक रुकावट आती, तो वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई कम हो सकती है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता।
बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट क्यों अहम है?
बाब-अल-मंदेब लाल सागर को गल्फ ऑफ ऐडन से जोड़ता है। यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्ग है। दुनिया के करीब 12% वैश्विक व्यापार की आवाजाही इस क्षेत्र से जुड़ी है। हर साल करीब 4.1 अरब बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस रास्ते से गुजरते हैं। यहां किसी भी तरह की सुरक्षा समस्या से तेल और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती।
वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग माना जाता। इसके जरिए समुद्र के रास्ते होने वाले वैश्विक कच्चे तेल निर्यात का करीब एक-चौथाई हिस्सा गुजरता। ऐसे में होर्मुज या बाब-अल-मंदेब में लंबे समय तक बाधा आने से वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने के बाद अब बाजार की नजर इसके व्यापक आर्थिक असर पर है। अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती, तो पेट्रोल-डीजल और दूसरे ईंधनों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई फिर से बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता।
साथ ही, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक विकास पर भी दबाव पड़ सकता। केंद्रीय बैंकों के लिए भी स्थिति मुश्किल हो सकती है, क्योंकि उन्हें धीमी आर्थिक वृद्धि और लगातार बनी महंगाई के बीच संतुलन बनाना होगा।
(प्रियंका कुमारी)
Health Insurance: फैमिली फ्लोटर या अलग-अलग पॉलिसी, परिवार के लिए क्या बेहतर? समझें पूरा गणित
परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय सबसे बड़ा सवाल होता है कि सभी सदस्यों के लिए एक ही फैमिली फ्लोटर पॉलिसी ली जाए या हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हेल्थ इंश्योरेंस कराया जाए। फैमिली फ्लोटर पॉलिसी संभालने में आसान होती है और कम उम्र के स्वस्थ परिवार के लिए यह किफायती विकल्प भी हो सकती, लेकिन जैसे-जैसे परिवार के सदस्यों की उम्र बढ़ती या माता-पिता को पॉलिसी में शामिल किया जाता है, तब एक ही साझा कवर हमेशा सबसे बेहतर विकल्प नहीं होता।
दोनों पॉलिसियों में सबसे बड़ा अंतर सम इंश्योर्ड का है। इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसी में हर बीमित व्यक्ति के लिए अलग सम इंश्योर्ड होता है, जबकि फैमिली फ्लोटर में एक ही रकम परिवार के सभी सदस्यों के लिए साझा होती है।
फैमिली फ्लोटर vs व्यक्तिगत बीमा में क्या अंतर?
उदाहरण के लिए, अगर किसी परिवार के पास 10 लाख रुपये का फैमिली फ्लोटर है और एक सदस्य के इलाज में 7 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं, तो बाकी पूरे परिवार के लिए उस पॉलिसी वर्ष में सिर्फ 3 लाख रुपये का कवर बचता है।
युवा दंपती या छोटे बच्चों वाले परिवारों के लिए फैमिली फ्लोटर अक्सर उपयोगी हो सकता। ऐसे परिवारों में एक ही समय पर कई सदस्यों को महंगे इलाज की जरूरत पड़ने की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में एक साझा कवर अलग-अलग पॉलिसी खरीदने के मुकाबले कम खर्च में पर्याप्त सुरक्षा दे सकता है।
माता-पिता के लिए अलग हेल्थ इंश्योरेंस बेहतर विकल्प
जब परिवार में बुजुर्ग माता-पिता शामिल होते हैं, तो स्थिति बदल सकती है। उम्र बढ़ने के साथ अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर इलाज की जरूरत की संभावना भी बढ़ती है। ऐसे में माता-पिता के इलाज पर एक बड़ा क्लेम साझा बीमा राशि का बड़ा हिस्सा खत्म कर सकता है। इसके बाद बाकी परिवार के लिए साल के बचे हुए समय में कम कवर रह जाता है। यही वजह है कि कई परिवार अपने लिए और बच्चों के लिए फैमिली फ्लोटर, जबकि माता-पिता के लिए अलग हेल्थ इंश्योरेंस रखना पसंद करते हैं।
हेल्थ इंश्योरेंस चुनते समय सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि कितने लोग कवर हो रहे हैं। इन बातों पर भी ध्यान देना जरूरी है-
- पॉलिसी का प्रीमियम और सम इंश्योर्ड
- वेटिंग पीरियड और बीमारी से जुड़े एक्सक्लूजन
- रूम रेंट की सीमा
- को-पेमेंट की शर्त
- उम्र के साथ प्रीमियम में होने वाली बढ़ोतरी
- क्लेम के समय वास्तविक कवरेज
अलग-अलग पॉलिसी का क्या फायदा
अलग-अलग पॉलिसी रखने का एक फायदा यह भी है कि परिवार के सदस्यों की जरूरत के हिसाब से कवर को स्वतंत्र रूप से मैनेज किया जा सकता है। बच्चे के आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने, शादी करने या दूसरे शहर में रहने की स्थिति में अलग पॉलिसी को संभालना आसान हो सकता है। हालांकि, हर सदस्य के लिए अलग पॉलिसी लेना भी जरूरी नहीं।
कई छोटी और कम कवर वाली पॉलिसियां खरीदने से खर्च और कागजी प्रक्रिया बढ़ सकती। एक व्यावहारिक विकल्प यह हो सकता है कि युवा परिवार के लिए फैमिली फ्लोटर, बुजुर्ग माता-पिता के लिए अलग पॉलिसी और बड़े अस्पताल खर्चों से अतिरिक्त सुरक्षा के लिए सुपर टॉप-अप लिया जाए।
सिर्फ कंपनी से मिलने वाले हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर रहना भी सही नहीं है। नौकरी बदलने या रिटायरमेंट के बाद यह कवर खत्म हो सकता है। इसलिए व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस को भी प्राथमिकता देना बेहतर है।
आखिरकार सही सवाल यह नहीं है कि हर सदस्य के लिए अलग पॉलिसी होनी चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि अगर परिवार के किसी एक सदस्य को बड़ा मेडिकल खर्च आ जाए, तो क्या पूरी बीमा व्यवस्था बाकी सदस्यों को भी पर्याप्त सुरक्षा दे पाएगी।
(प्रियंका कुमारी)
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