IMC में PM Modi बोले, Digital India से खत्म हुआ डिजिटल डिवाइड, हर जिले तक पहुंचा 5G
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'डिजिटल इंडिया' पहल को टेक्नोलॉजी के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक अहम कोशिश बताया। उन्होंने सरकार के इस लक्ष्य पर ज़ोर दिया कि डिजिटल अंतर को खत्म किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आधुनिक टेक्नोलॉजी सिर्फ़ साधन-संपन्न लोगों तक ही सीमित न रहे। 8 अक्टूबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस' (IMC) के 10वें संस्करण को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि इस बदलाव में मोबाइल फ़ोन की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया पहल के ज़रिए हमने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया, जिसमें मोबाइल फ़ोन इस बदलाव के केंद्र में रहा। यह टेक्नोलॉजी के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ी कोशिश रही है।
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उन्होंने माना कि भारत को डिजिटल अंतर (डिजिटल डिवाइड) की चुनौती का सामना करना पड़ा है, जहाँ आधुनिक तकनीक तक पहुँच मुख्य रूप से उन्हीं लोगों के लिए संभव थी जो इसका खर्च उठा सकते थे। उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में, मोबाइल फ़ोन न केवल आधुनिक संचार के साधन के रूप में, बल्कि सुशासन के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में भी उभरा है। यह हमारे 'डिजिटल इंडिया' विज़न के केंद्र में रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में सुधार किए और तकनीक तक पहुँच को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार किया। उन्होंने कहा कि हमने इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया कि मोबाइल फ़ोन और अन्य टेलीकॉम हार्डवेयर का निर्माण भारत में ही हो। देश भर में 5G कनेक्टिविटी के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह तकनीक हर जिले तक पहुँच गई है और पूरे भारत में 5,50,000 से अधिक 5G बेस स्टेशन काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि 2022 की तुलना में मोबाइल इंटरनेट की गति दस गुना बढ़ गई है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के पिछले कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी को याद करते हुए कहा कि इस मंच ने भारत के टेलीकॉम सेक्टर और डिजिटल कनेक्टिविटी के विकास को दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि 2022 में IMC में ही भारत में 5G लॉन्च किया गया था और 2023 में उन्होंने देश में 5G के रोलआउट से लेकर 5G की पहुंच बढ़ाने तक के सफर पर बात की थी। प्रधानमंत्री ने सरकार के प्रमुख के तौर पर अपने कार्यकाल के 25 साल पूरे होने पर मिली शुभकामनाओं के लिए नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समर्थकों का आभार भी व्यक्त किया।
Rajeev Chandrasekhar ने VD Satheesan पर लगाया आरोप, कहा फर्जी प्रदर्शनों से जनता को न भटकाएं
तिरुवनंतपुरम, आठ अक्टूबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरलम इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री वी डी सतीशन पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षद आर सुगाथन के खिलाफ कार्रवाई के जरिए कानून और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है और वह ‘‘लोकतंत्र को लेकर फर्जी विरोध प्रदर्शनों’’ के जरिए केरल के लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जा रहे विरोध प्रदर्शन को भी ‘‘फर्जी नाटक’’ करार दिया। चंद्रशेखर ने यह टिप्पणी सतीशन के दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल होने और प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने की आलोचना करने वाली उनकी सोशल मीडिया पोस्ट के बाद ‘एक्स’ पर की।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा था कि चुनावी प्रक्रिया की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाने को लेकर गांधी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी ‘‘लोकतांत्रिक असहमति पर हमला’’ है। उन्होंने यह भी कहा था, ‘‘मतदाता सूचियों में अनियमितताओं के खिलाफ और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए लड़ाई जारी है। लोकतंत्र को दबाया नहीं जा सकता।’’ मुख्यमंत्री के बयान का जवाब देते हुए चंद्रशेखर ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मुख्यमंत्री वी डी सतीशन, अपना समय बर्बाद न करें और लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता तथा संविधान को लेकर अपने फर्जी विरोध प्रदर्शनों के जरिए मलयालियों का ध्यान भटकाने की कोशिश न करें।
आपके प्रशासन पर कानून, न्याय और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोप हैं।’’ नेमोम से भाजपा विधायक चंद्रशेखर का इशारा भाजपा पार्षद सुगाथन की ऐहतियातन हिरासत की ओर था, जिन्हें हाल में केरल उच्च न्यायालय के आदेश के बाद रिहा किया गया था। चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि सुगाथन की हिरासत ‘‘पिनराई विजयन और वी डी सतीशन सरकारों की सोची-समझी और सुनियोजित आपराधिक साजिश’’ थी, जिसमें उन्होंने केरल असामाजिक गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (केएएपीए) के सलाहकार बोर्ड, एक जिलाधिकाराी और पुलिस का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, ‘‘जब राहुल गांधी दिल्ली में अपना फर्जी नाटक कर रहे हैं, वहीं केरल में लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित पार्षद सुगाथन के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का वास्तविक मामला है, जिसके लिए जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत है।’’ इन आरोपों और दावों पर मुख्यमंत्री या उनके कार्यालय की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
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