UN महासभा में Raghu Puri ने Pakistan को घेरा, आतंकियों को पनाह देने पर लगाई फटकार
भारत ने एक बार फिर आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के लिए पाकिस्तान को निशाने पर लिया है। भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि दुनिया 2008 के मुंबई आतंकी हमलों और 22 अप्रैल के पहलगाम हमले को भूली नहीं है। साथ ही, यह भी दोहराया है कि आतंकवाद को उसके फाइनेंसरों और प्रायोजकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए बिना नहीं हराया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी मिशन के सदस्य रघु पुरी ने ये बातें कहीं। उन्होंने UN महासभा की छठी समिति में 'अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपाय' एजेंडा आइटम पर पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयान के जवाब में दिल्ली का 'जवाब देने का अधिकार' इस्तेमाल करते हुए ये टिप्पणियां कीं। पुरी ने कहा कि पाकिस्तान ने खुद को पीड़ित के तौर पर पेश किया है, लेकिन उसने ऐसे 'फ्रेंकस्टीन' पैदा किए हैं, जिन पर से उसका नियंत्रण खत्म हो गया है और जो अब पड़ोसी देशों में तबाही मचा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि हमें यह भी याद है कि कुछ महीने पहले ही पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने इसी मंच का इस्तेमाल करके जैश-ए-मोहम्मद को एक खत्म हो चुका संगठन बताया था। दुनिया पहले भी यह नाटक देख चुकी है और हमें साफ पता है कि इस बार भी कुछ अलग नहीं होने वाला है। पुरी ने कहा कि जब मीडिया अज़हर तक पहुँच सकता है और 'ऑपरेशन सिंदूर' की कामयाबी के बारे में उससे पुष्टि कर सकता है, तो ज़ाहिर है कि पाकिस्तानी सरकार को पता होगा कि वह कहाँ है। मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में कमियों और टेरर फ़ाइनेंसिंग (आतंकवाद के लिए पैसे की फंडिंग) को रोकने में नाकाम रहने की वजह से पाकिस्तान को 2018 और 2022 के बीच फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में रखा गया था। पुरी ने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ (जो पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की बेटी हैं) के हालिया बयान का भी ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था, अफ़सोस की बात यह है कि को जो ख़तरा है, वह मेरे पड़ोसी देशों से कम और मेरे पड़ोसी प्रांतों से ज़्यादा है। इस काले राज़ को उजागर करते हुए पुरी ने कहा आप एक ही समय में खरगोश के साथ दौड़ भी नहीं सकते और शिकारी कुत्तों के साथ शिकार भी नहीं कर सकते। असलियत कभी ऐसे काम नहीं करती।
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उन्होंने कहा कि जब आतंकवादी समूहों को सरकारी राजनीतिक संरक्षण में काम करने की छूट दी जाती है, तो अंतरराष्ट्रीय वादे बेमानी हो जाते हैं और जब दोषियों को सुरक्षित पनाहगाह मिलती है, तो आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता। पुरी ने कहा दुनिया 9/11 और ओसामा बिन लादेन समेत उसके दोषियों के पकड़े जाने की घटना को नहीं भूली है। दुनिया 26/11 को नहीं भूली है। दुनिया पहलगाम को नहीं भूली है। उन्होंने आगे कहा कि "दुर्भाग्य से" यह सूची बहुत लंबी और दुखद है। उन्होंने कहा पहलगाम में पीड़ितों से उनकी राजनीतिक विचारधारा के बारे में नहीं, बल्कि उनके धर्म के बारे में पूछा गया था। इसलिए यह बहुत अजीब बात है कि पाकिस्तान धार्मिक नफरत से लड़ने की बात तो करता है, लेकिन साथ ही ऐसी स्थितियों को भी बढ़ावा देता है जिनसे यह नफरत बनी रहती है और पनपती है, खासकर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर।
Arthritis Symptoms: जोड़ों की पुरानी चोट से बढ़ सकता है Osteoarthritis का रिस्क, सही समय पर लें डॉक्टरी सलाह
उम्र बढ़ने के साथ ही कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन अगर उम्र बढ़ने के साथ ही जोड़ों में दर्द और चलने आदि में परेशानी महसूस हो, तो फौरन डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। क्योंकि यह आर्थराइटिस यानी गठिया के शुरूआती लक्षण हो सकते हैं। आर्थराइटिस जोड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी है। वेट ज्यादा होने, उम्र बढ़ने के साथ या जोड़ों की पुरानी चोट की वजह से यह समस्या हो सकती है।
इसके साथ ही अगर परिवार में पहले से किसी को यह बीमारी रही है, तो आपमें भी इस बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि आर्थराइटिस को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं है, लेकिन वेट कंट्रोल करके, फिजिकल एक्टिविटी और जोड़ों की चोट से बचकर आर्थराइटिस के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस समस्या से किस तरह से बचाव किया जा सकता है।
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शरीर को रखें एक्टिव
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो फिजिकल एक्टिविटी से आर्थराइटिस के जोखिम को करने के साथ-साथ पहले से मौजूद आर्थराइटिस के लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है।
साइकिलिंग, तेज गति से चलना, तैराकी और हल्के व्यायाम करने से जोड़ों पर कम दबाव पड़ता है।
वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिटन की मध्यम तीव्रता वाली एक्टिविटी और कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्टिविटी करने की सलाह दी जाती है।
वेट कंट्रोल रखें
संतुलित भोजन और नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटी के जरिए वेट को बढ़ने से रोका जा सकता है।
जिन लोगों का वेट ज्यादा है, उनके लिए 5-10% वेट कम करना भी आर्थराइटिस से जुड़े दर्द और चलने-फिरने की समस्या को कम करने में सहायता कर सकता है।
मामूली न समझें जोड़ों की चोट
अगर घुटने या फिर किसी दूसरे जोड़ में चोट लगी है, तो यह भविष्य में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ा सकती है। आमतौर पर गिरने, खेलने के दौरान या काम के दौरान बार-बार एक ही जोड़ पर दबाव पड़ने से खतरा बढ़ सकता है। इसलिए व्यायाम करते समय सही तकनीक अपनाना, चोट लगने पर पर्याप्त आराम व जरूरत पड़ने पर डॉक्टरी मदद और शरीर को धीरे-धीरे गतिविधि के लिए तैयार करना आदि जरूरी है। वहीं बार-बार होने वाले जोड़ के दर्द को नजरअंदाज करने की गलती नहीं करना चाहिए।
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