Jaisalmer Fort Histor: सोने जैसा चमकता जैसलमेर किला, लेकिन इतिहास है बेहद दर्दनाक! जानिए पूरी कहानी
Jaisalmer Fort Histor: नमस्कार आपका स्वागत है राजस्थान की स्वर्ण नगरी जैसलमेर में। थार के विशाल मरुस्थल के बीच खड़ा यह अद्भुत दुर्ग लगभग 900 वर्षों और स्थापत्य कला की गौरवशाली गाथा सुना रहा है। सन 1155 ईस्वी में भाटी राजपूत शासक रावल जैसल ने त्रिकूट पहाड़ी पर एक ऐसे दुर्ग की नींव रखी जो […]
बेटी का नाम बदलने हाईकोर्ट पहुंचा परिवार:‘लक्ष्मी’ की जगह ‘वीणा’ रखने की मांग; बोले- ज्योतिष के हिसाब से ज्यादा शुभ, कर्नाटक HC ने दी मंजूरी
कर्नाटक में एक 16 साल की लड़की का नाम बदलने के लिए उसके माता-पिता हाईकोर्ट पहुंचे। परिवार ने बेटी का नाम ‘लक्ष्मी’ से बदलकर ‘वीणा’ करने की मांग की। उनका कहना था कि ज्योतिष और अंकशास्त्र के हिसाब से ‘वीणा’ नाम बच्ची के लिए ज्यादा शुभ रहेगा। सिविल कोर्ट ने परिवार की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद बच्ची के पिता ने हाईकोर्ट में अपील की। जस्टिस हंचाटे संजीवकुमार ने गुरुवार को निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए बच्ची का नाम बदलने की मंजूरी दे दी। फैसले में जस्टिस हंचाटे संजीवकुमार ने कहा कि समाज में हर व्यक्ति की पहचान उसके नाम से होती है। इसलिए नाम से पहचाने जाने का अधिकार नागरिक अधिकार है। कोर्ट के मुताबिक, नाम में सुधार या बदलाव के लिए सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया जा सकता है। 2010 में हुआ था जन्म, नामकरण में रखा था ‘लक्ष्मी’ कोर्ट के मुताबिक, बच्ची का जन्म 10 अक्टूबर 2010 को हुआ था। नामकरण समारोह के दौरान उसका नाम ‘लक्ष्मी एन.’ रखा गया था। बाद में माता-पिता ने नाम बदलने का फैसला किया। बच्ची के पिता ने सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। इसमें बच्ची को ‘वीणा एन.’ घोषित करने और स्कूल रिकॉर्ड में नया नाम दर्ज करने की मांग की गई थी। हालांकि, याचिका खारिज हो गई। सिविल कोर्ट ने किस आधार पर याचिका खारिज की सिविल कोर्ट ने कहा था कि ‘वीणा एन.’ नाम होने का कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि माता-पिता ने पहले बच्ची के स्कूल से नाम बदलने के लिए संपर्क नहीं किया था। हाईकोर्ट में परिवार ने बताया कि नाम बदलने को लेकर अखबारों में सार्वजनिक सूचनाएं प्रकाशित की गई थीं। उन्होंने कर्नाटक सरकार के उस सर्कुलर का भी हवाला दिया, जिसमें नाम बदलने के लिए सिविल कोर्ट की डिक्री को जरूरी बताया गया है। हाईकोर्ट ने कहा- यह नाम सुधार का नहीं, बदलने का मामला हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह मानकर गलती की कि ‘वीणा’ नाम के इस्तेमाल का दस्तावेजी सबूत होना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, परिवार का मामला यह नहीं था कि स्कूल में बच्ची का नाम गलती से ‘लक्ष्मी एन.’ दर्ज हो गया था। मामला शुरू से ही नाम बदलने का था। कोर्ट ने कहा कि बच्ची की मांग सिर्फ इतनी थी कि उसे आगे से ‘वीणा एन.’ नाम से जाना जाए। इसलिए ‘वीणा एन.’ नाम वाला कोई पुराना दस्तावेज पेश करने का सवाल ही नहीं उठता। नाम बदलने पर किसी ने आपत्ति नहीं की हाईकोर्ट ने नोट किया कि नाम बदलने की मांग पर किसी ने आपत्ति नहीं की। कोर्ट ने यह भी माना कि इससे प्रतिवादियों या किसी अन्य व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं होगा। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने ‘लक्ष्मी एन.’ से ‘वीणा एन.’ नाम बदलने की अनुमति दे दी और संबंधित रिकॉर्ड में इसे दर्ज करने के निर्देश दिए। स्कूल के पास खुद नाम बदलने का अधिकार नहीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूल अपने स्तर पर किसी व्यक्ति का नाम नहीं बदल सकता। इसके लिए सक्षम सिविल कोर्ट की डिक्री जरूरी है। हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार के 26 अक्टूबर 2025 के सर्कुलर का भी उल्लेख किया। इसमें नाम, माता-पिता के नाम या जन्मतिथि में बदलाव के लिए सक्षम सिविल कोर्ट से डिक्री लेने की बात कही गई है। ------------------------------- यह खबर भी पढ़ें… जज का रेप पीड़ित बच्ची को संदेश, लिखा- दोषी कभी आजाद नहीं होगा, बचपन नहीं लौटा सकते, लेकिन तुम्हारी हिम्मत याद रखेंगे 7 साल की बच्ची का उसके परिचित ने रेप किया। बच्ची उसे अंकल कहती थी। रेप का मुकदमा दिल्ली की ट्रायल कोर्ट में पहुंचा। जज ने फैसला सुनाते हुए पीड़ित के लिए एक संदेश भी लिखा। इसमें कहा, “हम तुम्हारा बचपन तो नहीं लौटा सकते, लेकिन जिसने तुम्हें चोट पहुंचाई, वह अब कभी जेल से बाहर नहीं आ पाएगा।” पूरी खबर पढ़ें…
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