Explainer: 21वीं सदी के कौन हैं 3 बेस्ट भारतीय बल्लेबाज? जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में मचाया धमाल, जानिए तीनों के नाम
Top 3 Indian Test Batsmen : भारतीय क्रिकेट की शुरुआत 18वीं शताब्दी (वर्ष 1721) में हुई थी. तब से अब तक कई सदियां बदल गईं और खेल के कई नियम और खिलाड़ी समय-समय पर बदलते रहे. इंडियन क्रिकेट ने अगल अलग सदी में स्वर्णिम काल देखा है. भारतीय क्रिकेट के लिए 21वीं सदी काफी शानदार रही है. इस सदी में भारत को कई बड़े-बड़े खिलाड़ी मिले हैं. इन खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट के लिए उम्दा प्रदर्शन किया है. आज हम आपको उनके 3 भारतीय खिलाड़ियों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने 21वीं सदी में भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया. इसके साथ ही वो 21वीं सदी में भारत के बेस्ट 3 टेस्ट बल्लेबाजों की श्रेणी में आते हैं.
इंडियन क्रिकेट में कई दिग्गज और बड़े बड़े खिलाड़ी मौजूद रहे हैं. इनमें कपिल देव से लेकर बिशन सिंह बेदी जैसे खिलाड़ी भी मौजूद रहे हैं. वहीं सी.के. नायडू, अमर सिंह, लाला अमरनाथ उस दौर के खिलाड़ी हैं, जब भारतीय क्रिकेट की शुरुआत हुई थी. इस दौर में भारतीय क्रिकेट का स्तर काफी कमजोर था. इसके बाद सदी दर सदी क्रिकेट का स्तर काफी ऊंचाईयों पर पहुंचा और 21वीं सदी में भारतीय क्रिकेट शीर्ष पर रहा है.
A complete team effort. Congratulations to Yashasvi & Ishan on your Test debuts. ???????? pic.twitter.com/4i2WA0sEjA
— Virat Kohli (@imVkohli) July 15, 2023
कौन है 21वीं सदी के 3 बेस्ट भारतीय बल्लेबाज
इस पर इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर स्टूअर्ड बॉर्ड और वर्तमान विकेटकीपर बल्लेबाज जोस बटलर ने लव ऑफ क्रिकेट पॉकक्सट में भी बात की है. इन दोनों खिलाड़ियों ने 21वीं सदी के 3 बेस्ट भारतीय टेस्ट बल्लेबाजों को चुना है. इसमें सबसे पहले नाम इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर है. इस लिस्ट में दूसरा नाम पूर्व बल्लेबाज राहुल द्रविड़ है. विराट कोहली इस लिस्ट में तीसरे बल्लेबाज के तौर पर शामिल हैं.
???? STUART BROAD & JOS BUTTLER PICKED TOP 3 INDIAN TEST BATTERS OF 21ST CENTURY ???? (Love for Cricket podcast).
— Tanuj (@ImTanujSingh) October 8, 2026
- Sachin Tendulkar.
- Rahul Dravid.
- Virat Kohli. pic.twitter.com/CyHaR7R1fy
1 - सचिन तेंदुलकर
इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज और मास्टर ब्लास्टर के नाम से मशहूर सचिन तेंदुलकर 21वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ भारतीय बल्लेबाजों में शामिल हैं. सचिन ने जो इंडियन क्रिकेट के लिए किया है, वो कोई नहीं कर पाया है. तेंदुलकर ने अपने क्रिकेट करियर में कुल मिलाकर 100 शतक लगाए, जो आज तक कोई भी इंडियन बल्लेबाज नहीं कर पाया. इसके साथ ही सचिन क्रिकेट की दुनिया में सभी देशों में जाने-पहचाने जाते हैं. सचिन तेंदुलकर ने साल 2013 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया. तो आइए उनकी तीन बेस्ट पारियों पर नजर डालते हैं.
He not only taught us cricket, but instilled the belief in us that one day we'll play for India if we played with sincerity and honesty.
— Sachin Tendulkar (@sachin_rt) December 3, 2021
You can't ever thank someone enough for a gift like this. Wish you were here with us, Achrekar Sir.
Always in our hearts. pic.twitter.com/OSobeCKAdj
सचिन की 241 रनों की पारी
सचिन तेंदुलकर ने 2004 में सिडनी टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नाबाद 241 रन की ऐतिहासिक पारी खेली. उन्होंने 436 गेंदों का सामना करते हुए 33 चौके लगाए. इस पारी की सबसे खास बात यह रही कि सचिन ने कवर ड्राइव खेलने से परहेज किया और बेहद अनुशासित बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को थका दिया.
सचिन की 136 रन की पारी
1999 में चेन्नई टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ सचिन तेंदुलकर ने 136 रन की शानदार पारी खेली. उन्होंने 273 गेंदों का सामना किया और 18 चौके लगाए. पाकिस्तान के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के सामने सचिन ने दर्द के बावजूद संघर्ष जारी रखा, लेकिन उनके आउट होने के बाद भारत लक्ष्य से 17 रन दूर रह गया,
सचिन तेंदुलकर का टेस्ट करियर
| अवधि | मैच | पारियां | नाबाद | रन | सर्वोच्च स्कोर | औसत | शतक | अर्धशतक | शून्य | चौके | छक्के |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1989–2013 | 200 | 329 | 33 | 15,921 | 248* | 53.78 | 51 | 68 | 14 | 2058 | 69 |
2 - राहुल द्रविड़
इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज और टीम इंडिया के पूर्व कोच राहुल द्रविड़ भी 21वीं सदी के बेस्ट भारतीय बल्लेबाजों में शामिल हैं. उन्होंने इंडियन क्रिकेट में बहुत बड़ा योगदान दिया है. उनके द वॉल यानी दीवार के नाम से जाना जाता था. द्रविड़ जब टेस्ट क्रिकेट में अपना पैर क्रीज पर जमा लेते थे तो उनको आउट करना किसी भी गेंदबाज के लिए आसान नहीं होता था. वो भारत के बेस्ट टेस्ट बल्लेबाजों की लिस्ट में टॉप पर रखे जाएंगे. उन्होंने इंडियन क्रिकेट में बहमुल्य योगदान दिया है. उन्होंने साल 2012 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया.
द्रविड़ की 233 रनों की पारी
राहुल द्रविड़ ने 2003 में एडिलेड टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 233 रन की शानदार पारी खेली. उन्होंने 446 गेंदों का सामना किया और 23 चौके लगाए. द्रविड़ की इस मैराथन पारी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक जीत की नींव रखी.
द्रविड़ की 180 रनों की पारी
राहुल द्रविड़ ने 2001 में कोलकाता टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 180 रन की यादगार पारी खेली. उन्होंने 353 गेंदों का सामना करते हुए 20 चौके लगाए, वीवीएस लक्ष्मण के साथ उनकी 376 रन की साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया और भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
राहुल द्रविड़ का टेस्ट करियर
| फॉर्मेट | मैच | पारियां | नाबाद | रन | सर्वोच्च स्कोर | औसत | गेंदें | स्ट्राइक रेट | शतक | अर्धशतक | चौके | छक्के |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| टेस्ट | 164 | 286 | 32 | 13,288 | 270 | 52.30 | 31,258 | 42.50 | 36 | 63 | 1,654 | 21 |
3 - विराट कोहली
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली भी 21वीं सदी के बेस्ट भारतीय टेस्ट बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल हैं. विराट कोहली ने अपने बल्ले से सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे बल्लेबाजों के टीम से जाने के बाद अहम योगदान दिया और पूरी टीम को संभाला. उन्होंने अपने करियर में शानदार प्रदर्शन किया और भारत के बेस्ट टेस्ट बल्लेबाजों की लिस्ट में शामिल हैं. विराट कोहली ने 2025 में अपने टेस्ट करियर संन्यास लेने के बाद अलविदा कह दिया.
The whites ❤️???? pic.twitter.com/D5DYs4Dxyt
— Virat Kohli (@imVkohli) May 27, 2023
कोहली की 254* रनों की पारी
विराट कोहली ने पुणे टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 254 रन बनाए. इस पारी में उन्होंने 33 चौके और 2 छक्के लगाए. उनकी शानदार बल्लेबाजी ने भारत को विशाल स्कोर तक पहुंचाया और पारी से जीत में अहम भूमिका निभाई.
विराट की 149 रनों की पारी
एजबेस्टन टेस्ट में विराट कोहली ने इंग्लैंड के खिलाफ 149 रन की शानदार पारी खेली. इस पारी में उन्होंने 22 चौके और 1 छक्का भी लगाया. दबाव में खेली इस पारी ने उनकी तकनीक, धैर्य और नेतृत्व क्षमता को साबित किया.
विराट कोहली का टेस्ट करियर
| फॉर्मेट | मैच | पारियां | नाबाद | रन | सर्वोच्च स्कोर | औसत | गेंदें | स्ट्राइक रेट | शतक | अर्धशतक | चौके | छक्के |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| टेस्ट | 123 | 210 | 13 | 9,230 | 254* | 46.90 | 16,608 | 55.60 | 30 | 31 | 1,027 | 30 |
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बच्चों में तेजी से बढ़ रहा मोटापा, डब्ल्यूएचओ ने जारी की पहली ग्लोबल गाइडलाइन
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। आज के समय में मोटापा सिर्फ बड़ों की समस्या नहीं रह गया है। बच्चों और किशोरों में भी बढ़ता वजन चिंता का विषय बनता जा रहा है। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी और खानपान की आदतों में बदलाव के बीच बचपन में मोटापे के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसी बढ़ती समस्या को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बच्चों और किशोरों में मोटापे की देखभाल और इलाज को लेकर पहली वैश्विक गाइडलाइन जारी की है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक साल 2024 में दुनियाभर में 5 से 19 साल की उम्र के करीब 17 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे के साथ जी रहे थे। इनमें 5 से 9 साल की उम्र के करीब 7 करोड़ बच्चे और 10 से 19 साल के करीब 10 करोड़ किशोर शामिल थे। चिंता की बात यह है कि इस आयु वर्ग में मोटापे की दर 1990 के बाद से चार गुना बढ़ गई है। उस समय यह दर करीब 2 फीसदी थी जो 2024 में बढ़कर 8 फीसदी हो गई।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मोटापा एक ऐसी बीमारी है, जो लंबे समय तक बनी रह सकती है और दोबारा भी हो सकती है। इसका असर सिर्फ बच्चे के वजन तक सीमित नहीं रहता। बचपन में मोटापा आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों समेत कई गैर-संचारी रोगों का खतरा बढ़ा सकता है। इसके अलावा मोटापे से जूझ रहे बच्चों को स्कूल या समाज में मजाक, भेदभाव और बुलिंग का सामना भी करना पड़ सकता है, जिसका असर उनके आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
नई गाइडलाइन में डब्ल्यूएचओ ने बच्चों और किशोरों के इलाज में केवल वजन कम करने पर ध्यान देने के बजाय उनकी पूरी सेहत और जीवनशैली को बेहतर बनाने पर जोर दिया है। संगठन ने मोटापे से जूझ रहे बच्चों और किशोरों के लिए व्यवस्थित डाइट, नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव से जुड़े उपायों की सलाह दी है।
डब्ल्यूएचओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि छोटे बच्चों के मामले में दवाओं या सर्जरी को सामान्य इलाज के तौर पर नहीं अपनाना चाहिए। 0 से 9 साल के बच्चों के लिए मोटापे के इलाज में दवाओं, बैरियाट्रिक सर्जरी और वजन घटाने वाले उपकरणों की सिफारिश नहीं की गई है। 10 से 19 साल के किशोरों में भी दवाओं पर तभी विचार किया जा सकता है, जब विशेषज्ञों की निगरानी में चलाया गया लाइफस्टाइल कार्यक्रम अपेक्षित परिणाम न दे।
गाइडलाइन में मानसिक स्वास्थ्य को भी नजरअंदाज न करने की बात कही गई है। चिंता, अवसाद, कम आत्मसम्मान और भावनात्मक परेशानियां बच्चों की खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की आदतों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए मोटापे के साथ-साथ बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर भी समय रहते ध्यान देना जरूरी है।
--आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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