इस नेता को प्रधानमंत्री देखना चाहते थे नाना पाटेकर, PM पद को लेकर कही थी बड़ी बात
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया. अपने लंबे फिल्मी करियर के दौरान वह फिल्मों के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए भी चर्चा में रहे. वह अपनी बात खुलकर रखने के लिए जाने जाते थे और राजनीतिक नेताओं के बारे में भी अपनी पसंद जाहिर करने से पीछे नहीं हटते थे. नाना पाटेकर ने एक बार बताया था कि वह किस नेता को देश के प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. उनका यह बयान अप्रैल 2018 में सामने आया था, जब वह अपनी संस्था ‘नाम फाउंडेशन’ के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे.
शरद पवार को लेकर कही थी बड़ी बात
कार्यक्रम के दौरान नाना पाटेकर से जब उनकी राजनीतिक पसंद को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने शरद पवार का नाम लिया था. उन्होंने कहा था कि अगर वरिष्ठ नेता शरद पवार प्रधानमंत्री बनते हैं तो उन्हें खुशी होगी. नाना पाटेकर ने यह भी कहा था कि अगर महाराष्ट्र से आने वाला कोई व्यक्ति देश के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंचता है तो उन्हें खास तौर पर खुशी होगी.
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1996 के राजनीतिक घटनाक्रम का किया था जिक्र
नाना पाटेकर ने 1996 के राजनीतिक घटनाक्रम को याद करते हुए कहा था कि उस समय एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने थे. उनके मुताबिक, उस दौर में शरद पवार के नाम की भी प्रधानमंत्री पद के लिए चर्चा हुई थी, लेकिन वह इस पद तक नहीं पहुंच सके. उन्होंने अपनी बातचीत में यह भी कहा था कि उनके विचार में शरद पवार को इससे पहले ही प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिल जाना चाहिए था. हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई थी कि वह आगे भी उन्हें इस पद पर देखना चाहेंगे.
BJP को लेकर भी जताई थी निराशा
नाना पाटेकर ने उस दौरान केंद्र की तत्कालीन सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लेकर भी अपनी राय रखी थी. उन्होंने कहा था कि वह सरकार से निराश महसूस कर रहे हैं और शरद पवार को प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं.
कांग्रेस को लेकर भी कही थी अपनी बात
नाना पाटेकर ने कांग्रेस को लेकर भी खुलकर अपनी राय रखी थी. उन्होंने कहा था कि राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच मतभेद और विवाद चलते रहते हैं, लेकिन भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था लंबे समय से कायम है. उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के बने रहने का श्रेय कांग्रेस को दिया था। उनका यह बयान उस समय राजनीतिक तौर पर काफी चर्चा में रहा था.
किसानों के मुद्दों पर भी उठाते रहे आवाज
फिल्मों से अलग नाना पाटेकर सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रहे. किसानों की परेशानियों और उनकी उपज के उचित दाम जैसे विषयों को उन्होंने कई मौकों पर उठाया। उनकी संस्था ‘नाम फाउंडेशन’ भी किसानों से जुड़े मुद्दों पर काम करती रही है. नाना पाटेकर ने मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों को मिलने वाले सरकारी सम्मानों पर भी सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि फिल्म और कला के क्षेत्र में योगदान देने वाली हस्तियों को भी पद्म पुरस्कार जैसे सम्मान पाने का अधिकार होना चाहिए.
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नाना पाटेकर को क्यों कहा जाता था ‘एंग्री मैन’? जानें पर्दे पर गुस्से के पीछे की पूरी कहानी
Nana Patekar Angry Man: नाना पाटेकर के निधन से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है. फैंस और फिल्म इंडस्ट्री के लोग उन्हें याद कर रहे हैं. नाना पाटेकर ने अपनी एक्टिंग से लोगों के दिलों में एक खास पहचना बनाई थी. उनके किरदार और डॉयलॉग्स तो आज भी लोगों की जुबां पर रहते थे. लेकिन क्या आपको पता है कि नाना पाटेकर को बॉलीवुड का ‘एंग्री मैन’कहा जाता था. तो चलिए जानते हैं, इसके पीछे की वजह.
क्यों कहा जाता था ‘एंग्री मैन’?
नाना पाटेकर ने फिल्मों से पहले थिएटर में काम किया था. उन्होंने खुद बताया था कि वो 50 साल से ज्यादा समय तक थिएटर से जुड़े रहे और स्कूल के दिनों से ही स्टेज पर एक्टिंग करते थे. यही वजह है कि वो अपने डॉयलॉग, आवाज और बॉडी लैंग्वेज को अपनी एक्टिंग पर बखूबी निभाते थे. नाना को फिल्मों में उनके गुस्से, तेज आवाज और दमदार डायलॉग के लिए खास तौर पर जाना जाता था. उनके कई किरदार ऐसे रहे, जो गलत चीजों के खिलाफ खुलकर खड़े होते थे. इसके अलावा उनका सामने वाले को घूरकर देखने का अंदाज भी लोगों के बीच काफी मशहूर था.
‘परिंदा’ ने बदली स्क्रीन इमेज
नाना के करियर में ‘परिंदा’ एक बड़ा मोड़ साबित हुई थी. फिल्म में उन्होंने एक हिंसक और मानसिक रूप से अस्थिर गैंगस्टर का रोल प्ले किया था. उनके चेहरे, बोलने के तरीके और अचानक हिंसक हो जाने वाले रोल को देखकर फैंस भी हैरान रह गए थ. इस फिल्म के बाद फिर उन्हें वॉइलेंट किरदार मिलने लगे थे. नाना ने एक बार बताया था कि वो ये रोल इस वजह से करते थे, क्योंकि उन्हें इसके पैसे मिलते थे.
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‘क्रांतिवीर’ ने गुस्से को बना दी पहचान
‘परिंदा’ फिलम ने जहां नाना को खतरनाक एक्टर की पहचान दी थी, तो ‘क्रांतिवीर’ ने उनके गुस्से को दर्शाया था. फिल्म में उनका किरदार एक ऐसा आदमी का था जो समाज की हालत से परेशान था. उसका गुस्सा सिर्फ मारधाड़ वाला गुस्सा नहीं था, बल्कि विद्रोह और बगावत से भी जुड़ा था. दिलचस्प बात ये है कि फिल्म का मशहूर डायलॉग पूरी तरह पहले से लिखा हुआ नहीं था. नाना ने बताया था कि उन्होंने उस सीन में काफी कुछ मौके पर ही बोल दिया था. यही अंदाज उनके एक्टिंग की बड़ी ताकत बना.
रियल लाइफ में भी थे गुस्सेल
नाना ने खुद कई इंटरव्यू में अपने गुस्से के बारे में खुलकर बात की थी. एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि दूसरे लोग गुस्सा होने पर उसे शब्दों में निकालते हैं, जबकि उनका गुस्सा कई बार हिंसक तरीके से बाहर आता था. उन्होंने ये भी कहा था कि अपने गुस्से की वजह से उन्होंने जिंदगी में कई चीजें खोईं. बाद में उन्होंने कहा कि उम्र के साथ उन्होंने अपने गुस्से पर काफी काबू पाया. साल 2024 में नाना ने अपने गुस्से को लेकर बात करते हुए कहा था कि एक्टिंग ने उन्हें अपनी फ्रस्टेशन निकालने का एक रास्ता दिया.
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