Delhi Police ने सोशल मीडिया से हटवाईं प्रदर्शन से जुड़ी 11 भ्रामक पोस्ट
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर दिल्ली पुलिस ने एक सोशल मीडिया मंच से उन 11 पोस्ट और वीडियो हटाने या उन तक पहुंच प्रतिबंधित करने को कहा है जिनमें राष्ट्रीय राजधानी में हालिया प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पुलिस की कार्रवाई का भ्रामक चित्रण किया गया है। पुलिस ने कहा कि यह सामग्री लोगों को उद्वेलित कर सकती है और कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आईएफएसओ) के संयुक्त पुलिस आयुक्त ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत नोटिस जारी कर सोशल मीडिया मंच को निर्देश दिया कि सूचना मिलने के तीन घंटे के भीतर संबंधित यूआरएल को हटाया जाए या उन तक पहुंच प्रतिबंधित की जाए।
यह कार्रवाई 24 वर्षीय युवक की गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि में हुई है। उस व्यक्ति पर कृत्रिम मेधा (एआई) से बनाया गया वीडियो प्रसारित करने का आरोप है, जिसमें गलत तरीके से एक पुलिस अधिकारी को कथित तौर पर एक महिला का यौन उत्पीड़न करते दिखाया गया था। पुलिस ने कहा कि वह इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस फर्जी सामग्री का प्रसार दिल्ली पुलिस को बदनाम करने और प्रदर्शनों के दौरान असंतोष पैदा करने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था।
नोटिस के अनुसार इन 11 पोस्ट में ऐसे वीडियो थे जो उस प्रदर्शन से संबंधित थे। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। दिल्ली पुलिस ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों को धक्का दिया, अवरोधक हटाए या उनके ऊपर से छलांग लगाई और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों का पालन करने के निर्देश के बावजूद जबरन आगे बढ़ने की कोशिश की।
नोटिस में कहा गया कि जब प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस का रास्ता रोकना या उसका विरोध करना जारी रखा, तो तैनात पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए कुछ लोगों को रोका या हिरासत में लिया। इसमें कहा गया कि वीडियो में बाद की पुलिस कार्रवाई को ‘‘दुर्व्यवहार या अनुचित बल प्रयोग’’ के रूप में ‘‘चुनिंदा तरीके से’’ दिखाया गया है और कथित तौर पर उन पहले की घटनाओं को हटा दिया गया है, जिनमें रास्ता रोकना, विरोध करना और निर्देशों का पालन नहीं करना शामिल था तथा जिनके कारण पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने कहा कि इस तरह का ‘‘चुनिंदा, भ्रामक और अधूरा’’ चित्रण पुलिसकर्मियों के आचरण को लेकर गलत धारणा पैदा कर सकता है, लोगों को उकसा सकता है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई वैध कार्रवाई में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है।
पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत मंच से संबंधित सामग्री हटाने या उस तक पहुंच प्रतिबंधित करने को कहा है। साथ ही, साक्ष्य के उद्देश्य से संबंधित डेटा, लॉग और ग्राहकों की जानकारी सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया गया है। नोटिस में सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाले बयानों का उल्लेख किया गया है, जिनमें झूठी सूचना या अफवाह और मानहानि से संबंधित सामग्री शामिल है।
प्रदर्शनों से संबंधित सोशल मीडिया सामग्री और पुलिस कार्रवाई के बारे में कथित तौर पर भ्रामक या छेड़छाड़ की गई सामग्री के जरिए धारणा बनाने की कोशिशों को लेकर बढ़ी जांच-पड़ताल के बीच पुलिस ने यह कार्रवाई की है। पुलिस ने छह अक्टूबर को मेवात क्षेत्र से नदीम अहमद अमीन को गिरफ्तार किया था। उस पर पुलिसकर्मी से संबंधित एक फर्जी एआई-निर्मित वीडियो प्रसारित करने का आरोप है।
अधिकारियों ने कहा कि जांचकर्ता उन अन्य सोशल मीडिया खातों की भी पहचान कर रहे हैं जो कथित तौर पर दिल्ली पुलिस की छवि खराब करने के लिए गलत धारणा बनाने में शामिल हैं। वे यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या ऐसी सामग्री का प्रसार पहले से बनाई गई किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था।
Delhi High Alert | CJP प्रदर्शन से पहले छावनी बनी दिल्ली! जंतर-मंतर पर परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर, FRS तकनीक से 2,800 संदिग्धों पर कड़ी नजर
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर दिए गए विरोध प्रदर्शन के आह्वान ने राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर ला दिया है। दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस प्रदर्शन की औपचारिक अनुमति नहीं दी है, लेकिन CJP प्रमुख अभिजीत दिपके के कड़े रुख और हजारों समर्थकों के जुटने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी दिल्ली को अभेद्य किले में तब्दील करने की तैयारी कर ली है।
आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों पर नज़र रखने के लिए पुलिस को निर्देश
सभी स्टेशन हाउस ऑफिसर्स (SHOs) को अपने-अपने इलाकों में आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखने का निर्देश दिया गया है। पुलिस आपराधिक रिकॉर्ड वाले लगभग 2,800 लोगों की पहचान करने के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) का भी इस्तेमाल कर रही है। उन लोगों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है जो पहले गंभीर अपराधों में शामिल रहे हैं। पुलिस टीमें यह पता लगाने की भी कोशिश कर रही हैं कि प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली कौन आ सकता है और वे किन जगहों से आ रहे हैं।
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बस बुकिंग पुलिस की निगरानी में
दिल्ली की ओर बसों की आवाजाही पर भी नज़र रखी जा रही है। पुलिस प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए बसें बुक करने वाले लोगों और संगठनों का विवरण इकट्ठा कर रही है। अधिकारियों को राष्ट्रीय राजधानी की ओर जाने वाली बसों के बारे में जानकारी ट्रैक करने और निगरानी व आवश्यक कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस टीमों को सतर्क करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस ने पेइंग गेस्ट (PG) आवास संचालकों को छात्रों से संपर्क करने और उन्हें विरोध प्रदर्शन में भाग न लेने की सलाह देने का भी निर्देश दिया है।
UP, राजस्थान के एंट्री पॉइंट्स पर नज़र
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दिल्ली पुलिस को संदेह है कि प्रदर्शनकारी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के रास्तों से राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश कर सकते हैं। नतीजतन, संभावित एंट्री पॉइंट्स पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, साथ ही चेकिंग बढ़ाने और जहां भी आवश्यक हो अतिरिक्त बैरिकेड्स लगाने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली पुलिस के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली जिले में धरने या विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पुलिस सूत्रों ने आगे कहा कि CJP नेता और स्वयंसेवक औपचारिक अनुमति मिलने से पहले ही सोशल मीडिया पर लोगों से विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अपील कर रहे हैं। पुलिस को ऐसी अपील के बारे में भी जानकारी मिली है जिनमें लोगों से कहा गया है कि अगर अधिकारी उन्हें रोकते हैं, तो वे उसी जगह पर प्रदर्शन करें।
CJP के जुलाई के विरोध प्रदर्शन के बाद आपराधिक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच शुरू हुई
सुरक्षा की हालिया तैयारियों में जुलाई में हुए CJP आंदोलन को भी ध्यान में रखा गया है। पुलिस के अनुसार, उस विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और उसके आसपास आपराधिक रिकॉर्ड वाले लगभग 2,873 लोगों की पहचान की गई थी। इनमें से लगभग 989 लोग गंभीर अपराधों से जुड़े बताए गए। पुलिस ने दावा किया कि लगभग 101 लोगों के खिलाफ हत्या के मामले दर्ज थे। पुलिस ने यह भी दावा किया कि पहचाने गए लोगों में से 42 के खिलाफ हत्या के दो या उससे अधिक मामले दर्ज थे, जबकि 12 लोगों के नाम पर हत्या के 10 या उससे अधिक मामले दर्ज थे।
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दिल्ली पुलिस ने CAPF की 20 कंपनियों की मांग की
सुरक्षा व्यवस्था के तहत, दिल्ली पुलिस ने 1 अक्टूबर से सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) की कम से कम 20 कंपनियों की मांग की है। CAPF के जवानों को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में तैनात किया जा रहा है, जबकि नई दिल्ली इलाके में कई जगहों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। नई दिल्ली इलाके में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना और प्रदर्शनकारियों के हटने से इनकार करने पर उन्हें हिरासत में लेने से पैदा होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए लगभग 4,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किए जाने की उम्मीद है।
अस्थायी हिरासत केंद्र बनाने पर विचार किया जा रहा है
अधिकारी शहर के स्टेडियमों में अस्थायी हिरासत केंद्र बनाने की संभावना पर भी चर्चा कर रहे हैं। अगर ज़रूरत पड़ी तो बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेने की स्थिति से निपटने की तैयारियों के तहत संबंधित विभागों के साथ बातचीत चल रही है।
CJP का कहना है कि पुलिस को सूचित कर दिया गया है
CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन ने प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के बारे में पुलिस को पहले ही सूचित कर दिया है। इस राजनीतिक संगठन का 10 अक्टूबर का कार्यक्रम दिल्ली में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच हो रहा है, जिसमें अधिकारी लोगों के जुटने की संभावित कोशिशों, परिवहन व्यवस्था और जंतर-मंतर की ओर लोगों की आवाजाही पर नज़र रख रहे हैं।
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