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एनटीपीसी 2047 तक स्थापित करेगा 30 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता : श्रीपद नाइक

नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। सरकारी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी 2047 तक 30 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की योजना बना रही है। यह जानकारी केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक की ओर से गुरुवार को संसद में दी गई।

सभी जरूरी आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद, एनटीपीसी ने कंपनी अधिनियम के तहत एनटीपीसी परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीयूएनएल) नामक पूर्ण स्वामित्व वाली परमाणु सहायक कंपनी का गठन किया है।

लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा, एनटीपीसी का 30 गीगावाट का लक्ष्य सरकार के 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने के निर्णय का हिस्सा है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि एनटीपीसी और न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) का एक संयुक्त उद्यम, अनु शक्ति विद्युत निगम लिमिटेड राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में 4X700 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की प्रक्रिया में है।

इस प्लांट को माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (एमबीआरएपीपी) कहा जाता है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, एमबीआरएपीपी की पहली 700 मेगावाट इकाई का प्रारंभिक परीक्षण वित्त वर्ष 2032-33 तक शुरू हो जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विभिन्न विकल्पों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संभावित सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने के लिए, एनटीपीसी लिमिटेड ने रुचि पत्र (ईओआई) जारी किया है।

एनटीपीसी ने पिछले महीने गुजरात और राजस्थान में अपनी सहायक कंपनियों की विभिन्न सौर परियोजनाओं के माध्यम से वाणिज्यिक क्षमता में 359.58 मेगावाट की वृद्धि दर्ज की है, जिससे समूह की कुल वाणिज्यिक क्षमता 85.5 गीगावाट से अधिक हो गई है।

एनटीपीसी भारत की एक चौथाई बिजली आवश्यकताओं की पूर्ति में योगदान दे रही है और इसकी स्थापित क्षमता 85 गीगावाट से अधिक है, साथ ही 30.90 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता निर्माणाधीन है, जिसमें 13.3 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है।

कंपनी ने 2032 तक 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है, जिससे भारत के नेट जीरो लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।

कंपनी के अनुसार, थर्मल, हाइड्रो, सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों के विविध पोर्टफोलियो के साथ, एनटीपीसी देश को विश्वसनीय, किफायती और टिकाऊ बिजली प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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सीआईए ने 'वर्ल्ड फैक्टबुक रेफरेंस टूल' का प्रकाशन बंद किया

वाशिंगटन, 5 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) ने घोषणा की है कि 60 से ज्यादा वर्षों के बाद, वह पॉपुलर वर्ल्ड फैक्टबुक रेफरेंस मैनुअल को बंद कर रही है।

सीआईए की वेबसाइट पर बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को इसका ऐलान किया गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार इसमें फैक्टबुक को बंद करने के फैसले का कोई कारण नहीं बताया गया है, लेकिन यह डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ के उस वादे के बाद आया है जिसमें उन्होंने ऐसे प्रोग्राम्स को बंद करने की बात कही थी जो एजेंसी के मुख्य मिशन को आगे नहीं बढ़ाते।

पहली बार 1962 में इंटेलिजेंस अधिकारियों के लिए एक प्रिंटेड, क्लासिफाइड रेफरेंस मैनुअल के रूप में लॉन्च की गई थी। ये फैक्टबुक गैर अमेरिकी देशों, उनकी अर्थव्यवस्थाओं, सेनाओं, संसाधनों और समाजों की डिटेल आंकड़ों के साथ पेश करती रही है।

फैक्टबुक इतनी उपयोगी साबित हुई कि दूसरी फेडरल एजेंसियों ने भी इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, और एक दशक के अंदर, इसका एक अनक्लासिफाइड वर्जन जनता के लिए जारी किया गया।

1997 में ऑनलाइन होने के बाद, फैक्टबुक जल्दी ही पत्रकारों, सामान्य ज्ञान के शौकीनों और कॉलेज निबंध लिखने वालों के लिए एक प्रमुख रेफरेंस साइट बन गई, जिस पर हर साल लाखों लोग विजिट करते थे।

एबीसी न्यूज के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में व्हाइट हाउस ने सीआईए और नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी में स्टाफ कम करने का कदम उठाया है, जिससे एजेंसी को कम संसाधनों में ज्यादा काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

फैक्टबुक के पब्लिकेशन को बंद करने के फैसले पर कमेंट मांगने वाले मैसेज का सीआईए ने कोई जवाब नहीं दिया।

बता दें कि रैटक्लिफ ने पिछले साल सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी से कहा था कि, हम (सीआईए) वहां नहीं हैं जहां हमें होना चाहिए।

रैटक्लिफ ने कहा था कि वह चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानते हैं, जबकि रूस, ईरान, उत्तर कोरिया और ड्रग कार्टेल, हैकिंग गैंग और आतंकवादी संगठन भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौतियां पेश कर रहे हैं।

--आईएएनएस

केआर/

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2009 की वो बात भूल न जाना... पाकिस्तान को क्या याद दिलाकर बोल रहा श्रीलंका, भारत से 15 को जरूर खेलना

Sri Lanka cricket board urges PCB to reconsider: श्रीलंका ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को लेटर लिखा है. एसएलसी ने पीसीबी से कहा है कि वह भारत के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप मैच का बहिष्कार न करे.श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने पीसीबी को याद दिलाया है कि साल 2009 में कैसे उसने पाकिस्तान की मदद की थी. जब कोई भी टीम पाकिस्तान जाने से इनकार कर रही थी तब श्रीलंका ने उसकी मदद की. Fri, 6 Feb 2026 01:14:08 +0530

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