पेरेंटिंग- क्या 8 साल के बच्चे को बोर्डिंग भेजना सही:बच्चा डिसिप्लिन सीखेगा या बिगड़ जाएगा, असमंजस में हैं, सही फैसला कैसे लें?
सवाल- मैं 40 साल का हूं और जयपुर में रहता हूं। मेरा 8 साल का बेटा है। हम दोनों पति-पत्नी की जॉब ऐसी है कि अगले कुछ सालों में हमें लंबे समय तक घर से बाहर रहना पड़ सकता है। इसी वजह से हम बेटे के लिए बोर्डिंग स्कूल का विकल्प सोच रहे हैं। परिवार के लोगों का कहना है कि बोर्डिंग स्कूल में बच्चे कॉन्फिडेंस और डिसिप्लिन सीखते हैं। लेकिन मेरी पत्नी को लगता है कि 8-10 साल की उम्र में बच्चे को माता-पिता से दूर भेजना उसके लिए इमोशनली काफी मुश्किल हो सकता है। हम दोनों असमंजस में हैं। क्या बेटे को बोर्डिंग स्कूल भेजना चाहिए? इसकी सही उम्र क्या है? हम सही फैसला कैसे लें? एक्सपर्ट- डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इस सवाल का जवाब सिर्फ बच्चे की उम्र से नहीं दिया जा सकता। दो बच्चे एक ही उम्र के हों, फिर भी उनकी भावनात्मक तैयारी बिल्कुल अलग हो सकती है। इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “बोर्डिंग स्कूल की सही उम्र क्या है?” बल्कि यह होना चाहिए कि “क्या मेरा बच्चा अभी लंबे समय तक माता-पिता से दूर रहने के लिए तैयार है?” पेरेंट्स का इमोशनल सपोर्ट बच्चे के लिए जरूरी आठ साल की उम्र में बच्चा माता-पिता से मिलने वाले इमोशनल सपोर्ट पर काफी निर्भर होता है। वह स्कूल, दोस्तों और दूसरी एक्टिविटीज में धीरे-धीरे स्वतंत्र होना सीख रहा होता है। लेकिन तनाव, डर, अकेलेपन या असफलता से निपटने में माता-पिता की मौजूदगी उसके लिए महत्वपूर्ण रहती है। बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा पर काम करने वाली संस्था ‘यूनिसेफ’ 7-10 वर्ष के बच्चों को परिवार से अलग करने के मामलों में विशेष सावधानी की सलाह देती है। एक जैसे नहीं होते सभी बच्चे इसका मतलब यह नहीं है कि 8 साल के बच्चे को बोर्डिंग स्कूल भेजना हमेशा गलत है। दरअसल कुछ बच्चे- लेकिन कुछ बच्चों को ये परेशानियां हो सकती हैं- इसलिए फैसला बच्चे की ‘उम्र’ नहीं, उसकी ‘तैयारी’ देखकर करें। इसके लिए बच्चे में कुछ चीजें नोटिस करें- बच्चे की इच्छा जानना जरूरी अगर माता-पिता दोनों की नौकरी के कारण घर पर पर्याप्त समय देना मुश्किल है, तो बोर्डिंग एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। लेकिन बच्चे को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि- “मम्मी-पापा के पास मेरे लिए समय नहीं है, इसलिए मुझे भेजा जा रहा है।” बच्चे से खुलकर पूछें कि वह क्या चाहता है। सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि अलग-अलग समय पर बातचीत करें। उससे पूछें कि बोर्डिंग स्कूल में रहने को लेकर उसे किस बात की खुशी है और किस बात का डर है। अगर बच्चा कहता है कि- तो फैसला कुछ समय के लिए टालना बेहतर है। जरूरत पर बच्चे के साथ किसी चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से बातचीत भी कर सकते हैं। बच्चे को बोर्डिंग स्कूल भेजने से पहले उससे कुछ सवाल जरूर पूछें- आत्मनिर्भरता की शुरुआत घर से यह बात कुछ हद तक सही है कि बोर्डिंग में बच्चे रोजमर्रा के काम खुद करना, समय का पालन करना और समूह में रहना सीखते हैं। लेकिन आत्मनिर्भरता की शुरुआत घर से ही होती है, जैसेकि- इसलिए बच्चे को बोर्डिंग स्कूल भेजने से पहले उसे आत्मनिर्भर से जुड़ी छोटी-छोटी आदतें सिखाना जरूरी है। बोर्डिंग से ज्यादा बच्चे की सुरक्षा सबसे अहम अगर बोर्डिंग का फैसला करते हैं तो स्कूल की बिल्डिंग, फीस और रिजल्ट से ज्यादा महत्वपूर्ण वहां का रेजिडेंशियल वातावरण है। इसके लिए इन सवालों के जवाब जरूर लें- इसके अलावा- साथ ही स्कूल में ये चीजें जरूर चेक करें- पहले छोटे अनुभव, फिर लें फैसला पेरेंट्स की भूमिका बोर्डिंग स्कूल में रहने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि माता-पिता की भूमिका कम हो गई। रेगुलर फोन या वीडियो कॉल, तय मुलाकातें, स्कूल एक्टिविटीज में पेरेंट्स की भागीदारी और बच्चे की छोटी-बड़ी बातों को ध्यान से सुनना बहुत जरूरी है। चाइल्ड साइकोलॉजी में सुरक्षित और भरोसेमंद संबंध को बच्चे के इमोशनल ग्रोथ का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। इसलिए बच्चे को यह भरोसा लगातार मिलना चाहिए कि- “तुम जहां भी रहो, तुम्हारे माता-पिता तुम्हारे साथ हैं।” परिवार से जुड़े गर्मजोशी भरे रिश्ते बच्चे की भावनात्मक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण हैं। बच्चे की बोर्डिंग फाइनल करने से पहले खुद से कुछ सवाल जरूर पूछें- इन बातों का भी रखें ध्यान यहां पेरेंट्स को अपनी नौकरी की मजबूरी को भी ईमानदारी से देखना चाहिए। अगर अगले कुछ वर्षों में बच्चे के साथ घर पर रहने वाला कोई भरोसेमंद वयस्क नहीं होगा, तो बोर्डिंग स्कूल एक विकल्प हो सकता है। लेकिन उसके साथ दूसरे विकल्प भी देखें, जैसेकि- अंतिम बात आपका बेटा अभी 8 साल का है। इसलिए तुरंत बोर्डिंग भेजने की बजाय अगले 1-2 वर्षों में उसकी भावनात्मक तैयारी पर काम करें। इस दौरान उसे छोटे-छोटे काम खुद करने दें, थोड़े समय के लिए आपसे दूर रहने का अनुभव दें और उसके साथ बोर्डिंग स्कूल की चर्चा सकारात्मक लेकिन ईमानदार तरीके से करें। अगर वह इस विकल्प के लिए तैयार दिखता है तो बोर्डिंग पर विचार किया जा सकता है। ध्यान रखें, बोर्डिंग स्कूल को बच्चे को ‘सुधारने’ का साधन न बनाएं। इसे उसकी शिक्षा, व्यक्तित्व और पारिवारिक परिस्थितियों के बीच एक विकल्प की तरह देखें। सही फैसला वह होगा, जिसमें माता-पिता की सुविधा के साथ बच्चे की भावनात्मक जरूरत का भी ख्याल रखा जाए। **************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा ……………….. पेरेंटिंग- बेटा किताबें नहीं छूता: हर वक्त मोबाइल, लैपटॉप या टीवी, उसे सिर्फ स्क्रीन चाहिए, उसमें रीडिंग हैबिट कैसे डेवलप करें आज के समय में बच्चों की पढ़ाई के लिए डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल होता है। इस वजह से कई बच्चों का अटेंशन स्पैन (एकाग्रता) प्रभावित होता है। दरअसल, लगातार बदलने वाला कंटेंट उनके ब्रेन को तुरंत स्टिमुलेट करता है। पूरी खबर पढ़ें…
What did Israel know before October 7? | The Global Story podcast
Israel is marking three years since the 7 October attacks, in which around 1,200 people were killed by Hamas-led attackers and a further 251 hostages were taken back to Gaza. The commemorations come in the final weeks of a pivotal election campaign. Benjamin Netanyahu’s record on national security is coming under immense scrutiny, amid reports that the government failed to act on warnings in the months leading up to the 2023 attacks – allegations that the prime minister has strongly denied. Tristan Redman speaks to BBC correspondent Jon Donnison, who is in East Jerusalem. #Israel #October7 #Gaza #BBCNews 00:00 Introduction 01:08 What warnings came before October 7? 05:14 Netanyahu and the calls for an inquiry 06:01 How October 7 changed Israel 07:24 Why this election matters 08:41 Israel’s intelligence and security failures 11:40 The warnings Israel allegedly ignored 14:05 The warning signs in the days before October 7 15:44 Netanyahu’s policy towards Hamas 18:12 The Qatar money sent into Gaza 19:49 What happened on October 7? 21:32 Why was Israel’s response so slow? 22:40 How did Israeli intelligence miss the attack? 23:55 How Netanyahu’s opponents are using October 7
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