नौसेना जासूसी मामले में Andhra Pradesh Police ने दो आरोपियों को पकड़ा, हनी ट्रैप का खुलासा
अमरावती, सात अक्टूबर आंध्र प्रदेश पुलिस का दावा है कि महिला पाकिस्तानी खुफिया कार्यकर्ता (पीआईओ) वित्तीय प्रलोभन देकर, मोहपाश (हनी ट्रैप) में फंसाकर, अश्लील तस्वीरें साझा करके और झूठे वादों के जरिये संवेदनशील और गोपनीय जानकारी हासिल करने के लिए भारतीय सैन्य कर्मियों को निशाना बना रही हैं। आंध्र प्रदेश ‘काउंटर इंटेलिजेंस’ (सीआई) प्रकोष्ठ ने मंगलवार को खुलासा किया कि उसने पाकिस्तान के लिए कथित तौर पर जासूसी करने के आरोप में एक नौसेना कर्मी सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है। ‘ऑपरेशन फायरवॉल-2026’ के तहत, सीआई प्रकोष्ठ की पुलिस ने नौसेना और रक्षा प्रतिष्ठानों की जानकारी साझा करने के लिए विशाखापत्तनम नौसेना बेस के कर्मचारी प्रदीप मुखर्जी और नौसेना के अधिकारियों के लिए अनुबंध पर रखे गए वाहन चालक अन्नम साई वरप्रसाद को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने बताया कि 18 संदिग्धों में से 13 नौसेना कर्मी थे, जो कथित तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक जासूसी साजिश में संलिप्त थे। एक पुलिस प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘भारत में रक्षा प्रतिष्ठानों, रणनीतिक ठिकानों और नौसेना की संपत्तियों से संबंधित संवेदनशील/ गोपनीय जानकारी प्राप्त करने के इरादे से, कुछ महिला पीआईओ कथित तौर पर भारतीय रक्षा कर्मियों को निशाना बनाकर जासूसी अभियान चला रही हैं।’’ महिला पाकिस्तानी हैंडलर के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से बताते हुए, पुलिस ने देखा कि वे शुरू में फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे मंचों पर फर्जी सोशल-मीडिया प्रोफाइल के माध्यम से भारतीय सैन्य कर्मियों से संपर्क करती हैं। पुलिस ने बताया कि एक बार जब वे उनका भरोसा जीत लेती हैं, तो इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप से जुड़ जाती हैं, जहां चैट, वॉयस कॉल और वीडियो कॉल के माध्यम से लक्षित सैन्य कर्मियों को उलझाया जाता है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘इसके बाद महिला पीआईओ कर्मियों को मोहपाश में फंसाने का प्रयास करती हैं और उन्हें संवेदनशील रक्षा जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित करती हैं, जिसमें जहाजों और पनडुब्बियों की आवाजाही, उनकी संख्या, तस्वीरें, वीडियो और अन्य गोपनीय जानकारी शामिल है।’’ मौजूदा मामले में, पुलिस ने बताया कि ‘जोशिता पल्ल’ नामक एक पीआईओ ने शुरुआत में फेसबुक के माध्यम से संपर्क स्थापित किया और बाद में बातचीत को व्हाट्सऐप पर स्थानांतरित कर दिया। पुलिस ने बताया कि उसने खुद को मुंबई की एक शिप-बिल्डिंग कंपनी की कर्मचारी के रूप में पेश किया और जहाजों तथा पनडुब्बी की आवाजाही एवं संख्या से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ उनके कमांडिंग अधिकारियों की तस्वीरें और विवरण मांगे, और ऐसी जानकारी साझा करने के लिए मौद्रिक प्रलोभन भी दिए। इसी तरह, एक अन्य पीआईओ ‘अन्वी मेहता’ ने खुद को दिल्ली स्थित मनोवैज्ञानिक के रूप में पेश किया और वॉयस तथा वीडियो कॉल के माध्यम से नौसेना कर्मियों को ‘हनी ट्रैप’ में फंसाने का प्रयास किया।
पुलिस ने बताया कि उसने नौसेना के जहाजों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की तस्वीरें मांगीं और वीडियो कॉल के दौरान कर्मियों को नौसेना प्रतिष्ठानों, जहाजों और पनडुब्बियों के संवेदनशील क्षेत्रों को दिखाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘पीआईओ भारतीय कर्मियों को क्रिप्टोकरेंसी या अन्य बिचौलियों के माध्यम से वित्तीय प्रोत्साहन की पेशकश करके व्हाट्सऐप ओटीपी साझा करने के लिए भी लुभाती हैं।’’ पुलिस ने कहा कि जांच संवेदनशील है और जारी है।
Smit Machchhar पर ट्रंप ने इधर किया बड़ा ऐलान, उधर ओमानी पायलट को मिलेगी बड़ी सजा, 9 लोग गोलियों से भूनेंगे? तैयारी शुरू
अमेरिकी संसद ने आतंकी हमले को नाकाम करने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मिथ मछार को बहादुर बोलते हुए उनके लिए अपनी संसद में सम्मान प्रस्ताव पारित कर दिया। वहीं दुबई से इजराइल जा रहे प्लेन को क्रैश करने की कोशिश करने वाले जिहादी पायलट पर एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे ही उसके नापाक मंसूबे दुनिया के सामने आ रहे हैं और दुनिया भर में उसकी हरकत को लेकर इतना भयंकर गुस्सा है कि उसे मौत की सजा देने की मांग की जा रही है। कट्टरपंथी पायलट अलमामी इस वक्त यूएई की हिरासत में है। जिस वक्त दुनिया भर के मुस्लिम देश ओमानी पायलट को आतंकी कहने से बच रहे थे तो उस दौरान यूएई ने यह साफ किया था कि वह आतंकी का धर्म देखकर उसे बचाने की कोशिश कतई नहीं करेगा। यूएई ने फ्लाई दुबई विमान में हुई घटना को आधिकारिक तौर पर खतरनाक आतंकवादी कृत बताया था। जबकि सऊदी उसे बचाने की भरपूर कोशिश कर रहा था। लेकिन अब खबर है कि यूएई में उसे मौत की सजा देने की तैयारी शुरू हो गई है और उसे ऐसी सजा मिलेगी सुनकर सभी चौंक जाएंगे।
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दरअसल ओमानी पायलट अलमामी ने बताया कि वह विमान को वेन गुरियन एयरपोर्ट से टकराना चाहता था। उसने इजराइल जाने वाली एयरलाइनों के बारे में जानकारी जुटाई। इसी वजह से फ्लाई दुबई में नौकरी हासिल करने की कोशिश की। पूछताछ में अंबानी ने बताया कि पिछले 8 महीने से उसका मकसद सिर्फ एक ही था इजराइल में 91 से भी बड़ा अटैक करना। ज्यादा से ज्यादा इजराइली लोगों को मारना और उसके पहले टारगेट पर 8000 से ज्यादा लोग थे जिन्हें वह मारना चाहता था। उसने बताया कि नौकरी मिलने से पहले ही उसने इस पूरे ऑपरेशन की प्लानिंग कर ली थी। जांच में यह भी बात सामने आई है कि वो हमला इतनी तेजी से करना चाहता था कि इजराइली सेना को लड़ाकू विमान हवा में भेजने का मौका ही ना मिले। लेकिन अब यूएई ने उस पर ऐसा शिकंजा कसा है कि उसे मौत की सजा से कोई भी नहीं रोक पाएगा। यूएई में फांसी या सऊदी अरब की तरह पब्लिक में गला काटने का रिवाज नहीं है।
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यहां नौ लोग एक कमरे में दोषी को गोली से मारते हैं। दरअसल यूएई में मौत की सजा का कानूनी तरीका फायरिंग स्क्वाड है। फांसी या सार्विक तौर पर सजा यहां नहीं दी जाती। मौत की सजा पर अमल से पहले अदालतों में अपील की प्रक्रिया पूरी होती है और इसके बाद अमीरात के शासक या संघीय मामलों में यूएई के राष्ट्रपति की लिखित मंजूरी जरूरी होती है। इसके बाद जेल के एक हिस्से में दोषियों को ले जाया जाता है। फायरिंग स्क्वाड में आमतौर पर नौ लोग होते हैं। इन सभी को बंदूक दी जाती है। ज्यादातर बंदूकों में असली गोलियां होती हैं। लेकिन कम से कम एक बंदूक या उससे ज्यादा ऐसी होती है जिसमें गोली नहीं होती। ऐसा इसलिए ताकि जब एक साथ गोली चले तो किसी को यह ना पता चल सके कि आखिर वो गोलियां किसने चलाई जिससे मौत की सजा मिली।
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