दिल्ली के New Seemapuri में गिरी बहुमंजिला इमारत, मलबे से 7 लोगों को निकाला गया
बुधवार को दिल्ली के न्यू सीमापुरी में ईदगाह मछली मंडी के पास पांच मंज़िला रिहायशी इमारत के ढहने से कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। इस घटना के बाद, दिल्ली पुलिस, फायर ब्रिगेड और सिविल डिफेंस की इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें बचाव कार्य के लिए तुरंत मौके पर पहुँचीं। वे मलबे के नीचे से कुछ लोगों को निकालने में कामयाब रहे। घायलों को राजीव गांधी अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब दोपहर करीब 3:30 बजे यह घटना हुई, तब इमारत को पहले ही खाली कराया जा रहा था।
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शाहदरा के DCP राजेंद्र प्रसाद मीणा ने कहा कि हमें दोपहर 3:40 बजे सूचना मिली। यह चार मंज़िला इमारत है, जो 25 वर्ग गज में बनी है। अब तक 7 लोगों को बचाया जा चुका है। वे खतरे से बाहर हैं। बचाव अभियान चल रहा है... सभी एजेंसियां मौके पर मौजूद हैं, एम्बुलेंस और दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी तैनात हैं। MCD अधिकारी, DM, सभी मौके पर मौजूद हैं।
एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि यह हादसा दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ। यह पांच मंज़िला इमारत थी। सुबह आए भूकंप के बाद लोगों को बाहर निकाल लिया गया था और वे धीरे-धीरे बाहर निकल ही रहे थे कि तभी अचानक इमारत ढह गई। अधिकारियों के मुताबिक, इमारत के बगल की एक दीवार भी गिर गई, जिससे कूड़ा बीनने वाले लोग मलबे में दब गए। बताया जा रहा है कि उनमें से पांच लोगों को बचा लिया गया है, जबकि तीन अन्य के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है।
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यह घटना दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंज़िला PG बिल्डिंग के गिरने और उसमें सात लोगों की मौत के लगभग एक महीने बाद हुई है। इस घटना के बाद, दिल्ली सरकार ने राजधानी में जर्जर इमारतों का ऑडिट करने का आदेश दिया था। MCD ने कई पुरानी और जर्जर इमारतों को गिरा दिया था। हालांकि, सीमापुरी में बिल्डिंग गिरने की घटना सरकार के इस अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है।
Indian Coast Guard प्रमुख ने maritime search and rescue में तकनीक और तालमेल पर दिया जोर
भुवनेश्वर, सात अक्टूबर भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने बुधवार को कहा कि समुद्री खोज एवं बचाव (एसएआर) अभियानों का भविष्य उन्नत प्रौद्योगिकी के उपयोग, तुरंत सूचना साझा करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जैसे पहलुओं पर निर्भर करता है। शिवमणि ने यहां राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव (एनएमएसएआर) बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता की। वर्ष 2002 में गठित एनएमएसएआर बोर्ड, 46 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले भारतीय खोज एवं बचाव क्षेत्र में समुद्री अभियानों की तैयारियों की समीक्षा करने वाली देश की शीर्ष समिति है।
शिवमणि ने कहा, समुद्री खोज एवं बचाव (एसएआर) अभियानों का भविष्य उन्नत तकनीकी एकीकरण, तुरंत जानकारी साझा करने और अंतर-एजेंसी समन्वय पर टिका है। उन्होंने जहाजों की बेहतर निगरानी, आपातकालीन चेतावनी पर तुरंत कदम उठाने, आंकड़ों का विश्लेषण कर जमीनी फैसले करने और बचाव संसाधनों की जल्द से जल्द तैनाती पर जोर दिया। तटरक्षक बल प्रमुख ने इस बात पर भी जोर दिया कि पुराने अभियानों और बहु-एजेंसी अभ्यासों से मिले अनुभवों को सीधे तौर पर मिशन की तैयारियों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में बदला जाना चाहिए।
तटरक्षक बल द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बोर्ड की 24वीं बैठक में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खोज एवं बचाव ढांचे को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें यह माना गया कि समुद्री आपात स्थितियां किसी भौगोलिक सीमा में बंधी नहीं होतीं, इसलिए दुनिया भर के राहत एवं बचाव केंद्रों और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
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