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उत्तराखंड में पीपल बना दूल्हा, वट बनी दुल्हन:मंत्रोच्चार के साथ वैदिक रीति-रिवाजों से हुई अनोखी शादी; ढोल-दमाऊं की थाप पर नाचे बाराती
उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पीपल और वट (बरगद) वृक्ष सात जन्मों के साथी बने। 15 साल पूरे होने पर दोनों वृक्षों को दूल्हा-दुल्हन के रूप में सजाकर वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह कराया गया। मंत्रोच्चार, मंगलगीत और ढोल-दमाऊं की थाप के बीच आयोजित इस अनोखे समारोह में पूरा गांव बाराती बना। लमगड़ा विकासखंड की ग्राम पंचायत सैनोली में जब बैंड की धुन गूंजी और बारात निकली तो माहौल बिल्कुल पारंपरिक शादी जैसा हो गया। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां दूल्हा-दुल्हन कोई इंसान नहीं, बल्कि दो वृक्ष थे। पीपल को दूल्हा और वट को दुल्हन की तरह सजाया गया था। विवाह से पहले मेहंदी और हल्दी की रस्में निभाई गईं, समधी मिलन हुआ और जयमाला के बाद पुष्पवर्षा की गई। पहले 4 तस्वीरों में देखिए विवाह… प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका ने लगाए थे पौधे इन दोनों पौधों को वर्ष 2011 में हरेला पर्व पर प्राइमरी स्कूल सैनोली की शिक्षिका कला बिष्ट ने लगाया था। 15 वर्ष पूरे होने पर ग्रामीणों ने परंपराओं के अनुसार उनका विवाह कराने का निर्णय लिया। वैवाहिक कार्यक्रम में बहादुर सिंह और चंपा देवी ने कन्यादान की रस्म निभाई, जबकि वर पक्ष की ओर से पान सिंह और शांति देवी बारात लेकर पहुंचे। पुरोहित देवी दत्त जोशी और गिरीश चंद्र जोशी ने विधि-विधान से विवाह संस्कार संपन्न कराया और फेरे कराए। डीजे की धुन पर बारातियों ने किया डांस शादी को उत्सव का रूप देते हुए छलिया नृत्य और झोड़ा गायन की प्रस्तुतियां दी गईं। बैंड और डीजे की धुन पर बारातियों और घरातियों ने जमकर नृत्य किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस अनोखे विवाह का साक्षी बना। मेहमानों के लिए पूड़ी, चावल, रायता समेत विभिन्न व्यंजन भी तैयार किए गए थे। नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने की पहल ग्रामीणों ने इस परंपरा को ‘हरिशंकरी विवाह’ बताया। ग्राम सैनोली की बिमला बिष्ट के अनुसार, ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को प्रकृति और परंपराओं से जोड़ते हैं। जनहित में सक्रिय जगदीश सिंह ने कहा कि पीपल और वट का विवाह धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। ऐसे प्रयास समाज में पेड़ों के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाने का काम करते हैं। ---------------- ये खबर भी पढ़ें : मदरसा बोर्ड खत्म करने वाला पहला राज्य बना उत्तराखंड: CM बोले- देवभूमि में संकीर्ण मजहबी शिक्षा नहीं मिलेगी; कांग्रेस ने किया था बोर्ड का गठन उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ऐलान के बाद राज्य में अब “मदरसा बोर्ड” नाम से कोई बोर्ड नहीं होगा। आगामी जुलाई सत्र से इसे खत्म कर सभी मदरसों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अंडर लाया जाएगा। ऐसा कदम उठाने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य है। (पढ़ें पूरी खबर)
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