दशकों के संघर्ष और ढीले शासन का नतीजा है पाकिस्तान की अवैध हथियार संस्कृति: रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 4 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान में अवैध हथियारों की संस्कृति कोई आकस्मिक स्थिति नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चली आ रही अस्थिरता, दशकों के संघर्ष, ढीले शासन और समाज में हथियारों से गहरे जुड़ाव का परिणाम है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
अफगान डायस्पोरा नेटवर्क में प्रकाशित रिपोर्ट में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की एक निजी यूनिवर्सिटी की लेक्चरर फातिमा चौधरी ने लिखा कि देश में अवैध हथियारों और तस्करी का मौजूदा तंत्र भू-राजनीति, आपराधिक नेटवर्क और सांस्कृतिक परंपराओं के मेल से बना है। इसमें राज्य की कमजोरियां और सामाजिक मान्यताएं एक-दूसरे को मजबूत करती हैं, जिससे छोटे हथियारों और हल्के शस्त्रों का अवैध कारोबार फलता-फूलता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में उग्रवाद, आत्मघाती हमलों और सुरक्षा बलों पर हमलों ने संगठित अपराध के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया। आतंकवाद से निपटने में सरकारी संसाधन व्यस्त रहने के कारण आपराधिक बाजारों का विस्तार हुआ। इसी दौरान हेरोइन की तस्करी और घरेलू नशे की समस्या बढ़ी और हथियारों की तस्करी भी उन्हीं रास्तों और नेटवर्क के जरिए होने लगी।
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में इंटरपोल के ‘ऑपरेशन ट्रिगर साल्वो-2’ के दौरान पाकिस्तान में सैकड़ों हथियार, उनके पुर्जे और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद जब्त किया गया, खासकर अफगानिस्तान से सटे इलाकों में। हालांकि, यह जब्ती क्षेत्र में मौजूद कुल हथियारों का केवल एक छोटा हिस्सा ही बताई गई है।
2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद स्थिति और बिगड़ी। तालिबान के कब्जे के बाद वहां अमेरिकी सेना द्वारा छोड़े गए भारी मात्रा में सैन्य उपकरण उनके हाथ लग गए। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें से कुछ हथियार तस्करी के जरिए पाकिस्तान पहुंचे, जबकि कुछ लंबे समय से सक्रिय कबायली नेटवर्क के जरिए बेचे गए।
हालांकि पाकिस्तान में हथियार रखने के लिए लाइसेंस जरूरी है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक लाखों गोला-बारूद बिना पंजीकरण के मौजूद हैं और अवैध हथियार खुले बाजारों, वर्कशॉप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आसानी से मिल जाते हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
तमिलनाडु : भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद तिरुपुर के निर्यातकों को निवेश और नौकरियों में बढ़ोतरी की उम्मीद
तिरुपुर, 4 फरवरी (आईएएनएस)। तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (टीईए) के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड एग्रीमेंट के बाद तमिलनाडु के तिरुपुर में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में बड़ी ग्रोथ होने वाली है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए, टीईए के महासचिव थिरु कुमारन ने कहा कि यह समझौता भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर को बहुत फायदा पहुंचाएगा, जिसमें तिरुपुर मुख्य लाभार्थियों में से एक बनकर उभरेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते ने भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में ग्लोबल विश्वास को मजबूत किया है और मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स के लिए नए अवसर खोले हैं।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित यूरोपियन यूनियन-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए), जिसके इस साल के आखिर में लागू होने की उम्मीद है, इस सेक्टर को और बढ़ावा देगा।
कुमारन ने कहा, दोनों समझौतों के लागू होने से, पूरे टेक्सटाइल इंडस्ट्री और खासकर तिरुपुर में आने वाले महीनों में जबरदस्त ग्रोथ देखने की उम्मीद है। हमें अगले साल अपनी कमाई दोगुनी होने का भरोसा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट लगभग 16 बिलियन डॉलर का है, जबकि अकेले तिरुपुर से एक्सपोर्ट लगभग 5.2 बिलियन डॉलर का है।
एसोसिएशन को उम्मीद है कि अगले तीन सालों में ये दोनों आंकड़े दोगुने हो जाएंगे, जिससे काफी निवेश के अवसर पैदा होंगे और पूरे सेक्टर में ज्यादा रोजगार मिलेंगे।
थिरु कुमारन ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को आसान बनाने और भारत-यूरोपीय संघ एफटीए को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भी आभार व्यक्त किया, जिन्हें उन्होंने विकास-उन्मुख केंद्रीय बजट पेश करने के लिए सराहा। केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए, उन्होंने कहा कि घोषित प्रोत्साहन टेक्सटाइल सेक्टर में नए निवेश को बढ़ावा देंगे और एक्सपोर्ट-आधारित विकास को गति देंगे।
उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर में ग्रोथ रोजगार पैदा करने के मामले में भी फायदेमंद होगी।
--आईएएनएस
एससीएच
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