गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा क्यों है खास, भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति से जुड़ा है विधान
हम सभी देवी-देवताओं की पूजा के साथ ही घर में लगे कुछ पवित्र पौधों की पूजा भी करते हैं। असल में इन पौधों खास ऊर्जा होती है जो पूजा करने वाले व्यक्ति के ऊपर जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर ग्रह का एक अलग रंग है और इसका अलग प्रभाव देखने को मिलता है।
इतना ही नहीं, ग्रहों के साथ कुछ पवित्र पेड़-पौधों को भी जोड़ा जाता है। हिंदू धर्म में पूजने वाले पौधों में से एक पवित्र पौधा केले का माना जाता है। हर किसी के मन में सवाल आता है कि तुलसी और पीपल की पूजा, तो हम सभी करते हैं, लेकिन केले के पौधे की पूजा क्यों की जाती है?
केले का बृहस्पति ग्रह से संबंध
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, केले का संबंध बृहस्तपति ग्रह से संबंधित है। शुभ कार्यों में केले के पौधे का मंडप बनता है और केले के पत्तों से तोरण और पूजा का आसान तैयार होता है। इतना ही नहीं, देवताओं के भोग के लिए केले के पत्ते में ही भोजन रखा जाता है।
ऐसे में किसी जातक का बृहस्पति कमजोर है, तो उसे गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करने की सलाह दी जाती है और केले में हल्दी चढ़ाएं। बृहस्पति व्रत कथा में भी केले के पौधे के माहात्मय को बताया गया है और इसकी पूजा से बृहस्पति देव के साथ विष्णु जी आशीर्वाद भी बना रहता है।
भगवान विष्णु को क्यों प्रिय है केले का पौधा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केले के वृक्ष को कदली फल कहा जाता है। केला के वृक्ष को भगवान विष्णु का ही स्वरुप माना जाता है। इसके अलावा, गुरुवार का संबंध भी भगवान विष्णु से ही होता है और यह दिन गुरु बृहस्पति को भी समर्पित होता है।
इसी कारण से गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करने से विशेष लाभ होते हैं। अगर कोई व्यक्ति इस दिन केले पेड़ की पूजा करता है, तो यह विष्णु जी की पूजा के बराबर फल देता है। गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करने के साथ ही घी का दीपक जलाने से देव गुरु बृहस्पति के साथ ही भगवान विष्णु जी की कृपा प्राप्त होती है।
केले का पौधा लगाने के फायदे क्या हैं?
अगर आप अपने घर में केले का पौधे लगाते हैं, तो बृहस्पति से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी। केले का पौधा लगाना और उसकी देखभाल करना सुखी दांपत्य जीवन का सूत्र माना जाता है। केले के पौधा लगाने से और उसकी देखभाल करने सुखी दांपत्य जीवन का सूत्र माना जाता है।
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