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बैलेट पेपर से चुनाव की मांग कर रही कांग्रेस, विपक्ष के प्रदर्शन पर BJP ने किया पलटवार

Protest against CEC Gyanesh Kumar: एसआईआर और चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन का हल्ला बोल जारी है. आज एक बार फिर से दिल्ली में विपक्षी सांसद लंच पर मिल रहे हैं. जिसके बाद प्रदर्शन हो सकता है. विपक्षी गठबंधन ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं. साथ ही ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव की मांग कर रहे हैं.

बीजेपी सवाल उठा रही है कि जिस पार्टी ने खुद बैलेट पेपर की जगह ईवीएम से चुनाव कराने की शुरुआत की. अब वह फिर बैलेट की मांग क्यों कर रही है? नरेंद्र मोदी ने अमित शाह ने देश को हाईजैक कर दिया है और हम संविधान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लोकतंत्र को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लड़ते रहेंगे. जब तक हमको बैलेट पेपर पर अधिकार नहीं मिलेगा. ये लड़ते ही रहेंगे. वास्तविकता में कांग्रेस सदा सर्वदा से तभी चुनाव जीतती थी जब सब कुछ अवैध होता था. देखें ये रिपोर्ट...

ये भी पढ़ें: Explainer: CJP का आंदोलन और कांग्रेस का प्रदर्शन, दोनों की रणनीति एक दूसरे से कितनी है अलग?

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बीच अमेरिकी मसाला उद्योग ने की भारतीय मसालों पर टैरिफ छूट जारी रखने की मांग

वॉशिंगटन, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत के बीच अमेरिकी मसाला उद्योग ने भारतीय मसालों पर दी जा रही टैरिफ छूट को जारी रखने और उसे स्थायी स्वरूप देने की मांग की है। उद्योग का तर्क है कि कई मसाले ऐसे हैं जिन्हें अमेरिका में व्यावसायिक स्तर पर उगाना संभव नहीं है और उनकी आपूर्ति के लिए भारत पर निर्भरता बनी रहेगी।

अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन (एएसटीए) के अध्यक्ष डोनाल्ड प्रैट ने बुधवार को कहा कि उनकी प्राथमिकता उन कृषि उत्पादों के लिए टैरिफ छूट बनाए रखना है जो अमेरिका में नहीं उगाए जा सकते लेकिन अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास और व्यापार वार्ता में शामिल अन्य पक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठा रहे हैं। प्रैट ने उम्मीद जताई कि आगामी व्यापार समझौते में मसालों को दी जा रही मौजूदा छूट जारी रहेगी और भविष्य में इसे स्थायी रूप से संरक्षित किया जाएगा।

प्रैट ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) द्वारा मान्यता प्राप्त 109 मसालों में से आधे से अधिक का उत्पादन करता है और अमेरिकी मसाला उद्योग के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका भारतीय मसालों का सबसे बड़ा बाजार है और पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत से लगभग 70 करोड़ डॉलर (700 मिलियन डॉलर) मूल्य के मसालों का आयात किया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने उपयोग के लिए आवश्यक मसालों का केवल एक छोटा हिस्सा ही स्वयं पैदा करता है। अधिकांश मसाले ऐसे हैं जिन्हें अमेरिका में बड़े पैमाने पर उगाया ही नहीं जा सकता। इसी वजह से भारतीय मसाले अमेरिकी खाद्य उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

प्रैट ने आगे कहा कि अमेरिका जीरा, सौंफ, मिर्च और दर्जनों अन्य मसालों के लिए भारत पर निर्भर है। यही मसाले रोजमर्रा के अमेरिकी भोजन का स्वाद बढ़ाते हैं।

प्रैट ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, भारत एक ऐसा देश है जिसके साथ हम, हमारा उद्योग, कई वर्षों से व्यापार कर रहे हैं। वास्तव में, जिस कंपनी में मैं काम करता हूं, वह भी कई वर्षों से भारत के साथ व्यापार कर रही है।

उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 18 महीनों से एएसटीए भारतीय दूतावास के साथ टैरिफ संबंधी मुद्दों पर लगातार संवाद कर रहा है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत व्यावहारिक और सहयोगात्मक रही है।

एएसटीए ने मसालों को नए टैरिफ प्रतिबंधों से बाहर रखने के लिए सक्रिय अभियान भी चलाया। प्रैट के अनुसार, इस प्रयास का परिणाम यह रहा कि अधिकांश मसालों को अमेरिकी टैरिफ छूट सूची में शामिल किया गया क्योंकि उन्हें ऐसे प्राकृतिक संसाधन माना गया जिनका पर्याप्त घरेलू उत्पादन अमेरिका में उपलब्ध नहीं है।

एएसटीए की विज्ञान एवं नियामक समिति के अध्यक्ष रॉबर्टो फानी ने भी कहा कि मसालों को छूट इसलिए दी गई क्योंकि अमेरिका इन उत्पादों का प्रमुख उत्पादक नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि मसालों पर टैरिफ लगाया भी जाए तो इससे किसी घरेलू अमेरिकी उद्योग को विशेष लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि वहां उनका पर्याप्त उत्पादन ही नहीं होता।

फानी ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मसाला व्यापार लगातार रणनीतिक महत्व हासिल कर रहा है। भारतीय उत्पादक अब अमेरिकी खाद्य सुरक्षा और अनुपालन मानकों को बेहतर ढंग से समझ रहे हैं, जिससे व्यापार को और गति मिलने की संभावना है।

एएसटीए की कार्यकारी निदेशक लौरा शूमर ने भारत को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण मसाला व्यापार साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि मात्रा, विविधता और मूल्य के लिहाज से भारतीय मसालों पर अमेरिकी उद्योग की निर्भरता सबसे अधिक है।

उनके अनुसार, एएसटीए लगभग 100 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है जो अमेरिका में मसालों का आयात, प्रसंस्करण, विनिर्माण और विपणन करती हैं।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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