बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सदन को संबोधित करने से कुछ ही मिनट पहले लोकसभा स्थगित कर दी गई। यह घटनाक्रम विपक्षी सांसदों के जोरदार विरोध प्रदर्शन के सत्ता पक्ष के पास झड़प में तब्दील होने के बाद हुआ, जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दावा किया कि कई विपक्षी महिला सांसद सदन के वेल में घुस गईं, प्रधानमंत्री की कुर्सी की ओर बढ़ीं और वरिष्ठ मंत्रियों की बार-बार की गई अपील को अनसुना कर दिया।
तिवारी के अनुसार, स्थिति नियंत्रण से बाहर होने के कारण प्रधानमंत्री सदन में प्रवेश नहीं कर सके। मनोज तिवारी ने कहा कि आज जो कुछ हुआ, उसकी तस्वीरें देखकर आप दंग रह जाएंगे। यह स्थिति दर्शाती है कि चूंकि जनता उन्हें (कांग्रेस को) हरा रही है, इसलिए वे हमें (भाजपा को) संसद में बोलने नहीं देंगे। देश ने इतना बड़ा सम्मान हासिल किया है, फिर भी वे इसे मनाने नहीं देंगे, और वे प्रधानमंत्री मोदी को बोलने से रोकने के लिए ये सब कर रहे हैं। पूरा देश सब कुछ देख रहा है, और देश कांग्रेस से जवाब मांगेगा।
तिवारी ने आरोप लगाया कि वे प्रधानमंत्री के बैठने की जगह पर चढ़ गए। उन्होंने खूब हंगामा किया। उन्होंने आगे दावा किया कि विपक्षी सांसद आक्रामक हावभाव के साथ आगे बढ़े और उनके व्यवहार से सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा हुईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वे प्रधानमंत्री पर हमला भी कर सकते थे। विपक्षी सांसद नारे लगाते हुए सदन के वेल में घुस गए और उनके हाथों में एक बड़ा बैनर था जिस पर लिखा था, “जो उचित लगे वो करो।” तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सदस्य भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए और जैसे-जैसे विरोध तेज होता गया, उन्होंने हूटिंग शुरू कर दी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सदन में उपस्थित नहीं थे।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है... राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान इस तरह का हंगामा पहली बार हुआ है। ये लोग बच्चों जैसा व्यवहार कर रहे हैं... ये क्या सोचते हैं? क्या इन्हें लगता है कि यह नेहरू परिवार का साम्राज्य है, या कांग्रेस पार्टी का कार्यालय है, या सोनिया गांधी का घर है...? भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्र को संबोधित करना चाहते थे, लेकिन भारत-भारत गठबंधन के नेताओं ने उन्हें इससे वंचित कर दिया... इससे ज्यादा दुखद कुछ नहीं हो सकता... पूरा देश इसे देख रहा है और इसकी निंदा कर रहा है।
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अशोकनगर/गुना/भोपाल। केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज अपने भोपाल-अशोकनगर प्रवास के आखिरी दिन पिपरई में ₹32 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले ‘सांदीपनि सी.एम. राइज स्कूल’ का उद्घाटन किया। इससे पहले केंद्रीय मंत्री ने आज चंदेरी में शिशु मंदिर का भी उद्घाटन किया और माधव महाविद्यालय में अपने पिता स्व. माधवराव सिंधिया सिंधिया की प्रतिमा का अनावरण एवं नई माधव साइंस कॉलेज बिल्डिंग का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों, अभिभावकों और छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह विद्यालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि गाँव के बच्चों के सपनों, संभावनाओं और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
गाँव के बच्चों को समान अवसर
समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि पिपरई में स्थापित यह स्कूल यह सुनिश्चित करेगा कि गाँव का बच्चा भी वही संसाधन, वही गुणवत्ता और वही अवसर पाए जो देश के बड़े महानगरों के बच्चों को मिलते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी द्वारा इन स्कूलों का नाम ‘सांदीपनि’ रखने को अत्यंत सार्थक बताया, क्योंकि महर्षि सांदीपनि भगवान श्री कृष्ण के गुरु थे और ऐसे शिक्षालय बच्चों को ‘सर्व गुण सम्पन्न’ बनाने की प्रेरणा देंगे।
आधुनिक सुविधाएँ और व्यावसायिक शिक्षा का संगम
सिंधिया ने बताया कि ₹32 करोड़ की लागत से विकसित होने वाला यह परिसर अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। इसमें स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान, गणित और भाषा के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएँ, तथा नवीन शिक्षण संसाधन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि तकनीकी और व्यावहारिक कौशल भी प्राप्त करें और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में ‘रोजगार सृजन करने वाले’ बन सकें।
चंदेरी में शिक्षा और विरासत को समर्पित महत्वपूर्ण पहल
इससे पहले केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने आज चंदेरी में ₹30 लाख की लागत से निर्मित शिशु मंदिर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने माधव महाविद्यालय परिसर में अपने पिता स्व. माधवराव सिंधिया की प्रतिमा का अनावरण किया तथा नई माधव साइंस कॉलेज भवन का लोकार्पण भी किया। इन कार्यों के माध्यम से शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सशक्त करने के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत को सम्मान देने का संदेश दिया गया।
संस्कार, संस्कृति और जिम्मेदार नागरिकता
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार दिलाना नहीं, बल्कि संस्कारवान, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है। इस विद्यालय में बच्चों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ा जाएगा, ताकि वे ज्ञान के साथ-साथ चरित्र निर्माण की भी मजबूत नींव प्राप्त कर सकें।
नया भारत: ज्ञान और तकनीक का संगम
अपने संबोधन में सिंधिया ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लागू ‘नई शिक्षा नीति’ (NEP) विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसी स्कूल से भविष्य के डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, उद्यमी और देश का नेतृत्व करने वाले कर्णधार निकलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सरकार में प्रदेश में नौनिहालों की शिक्षा को लेकर बड़े कदम उठाये जा रहे हैं।
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