देवनीमोरी बुद्ध अवशेषों की प्रदर्शनी भारत-श्रीलंका के आध्यात्मिक संबंधों को करेगी उजागर
नई दिल्ली, 4 फरवरी (आईएएनएस)। ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष बुधवार को भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान के जरिए श्रीलंका पहुंच गए।
यह अवसर भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण क्षण माना जा रहा है। इन पवित्र अवशेषों के श्रीलंका पहुंचने पर वहां धार्मिक श्रद्धा और सम्मान का विशेष वातावरण देखने को मिला।
श्रीलंका के हवाई अड्डे पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री डॉ. हिनिदुमा सुनील सेनेवी और लोक प्रशासन, प्रांतीय परिषदों एवं स्थानीय सरकार के मंत्री एएचएमएच अभयरत्ना ने कार्यवाहक उच्चायुक्त के साथ मिलकर देवनीमोरी अवशेषों का औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान बौद्ध भिक्षुओं, अधिकारियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया।
इन पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी 4 से 10 फरवरी तक श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित प्रसिद्ध गंगारामया मंदिर में आयोजित की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और आगंतुकों के मंदिर पहुंचने की उम्मीद है। गंगारामया मंदिर, जो श्रीलंका के प्रमुख बौद्ध स्थलों में से एक है, ने अवशेषों के सुरक्षित प्रदर्शन और सार्वजनिक दर्शन के लिए व्यापक और सुव्यवस्थित इंतजाम किए हैं।
श्रीलंका रवाना होने से पहले राजधानी स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में और उसके बाद हवाई अड्डे पर विशेष पवित्र मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इन समारोहों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने प्रार्थना कर अवशेषों के प्रति अपनी आस्था और सम्मान प्रकट किया। यह दृश्य बौद्ध धर्म की गहरी आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाने वाला रहा।
बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाने वाले देवनीमोरी अवशेष पहली बार अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए विदेश यात्रा पर गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस ऐतिहासिक आयोजन के जरिए न केवल श्रीलंका, बल्कि अन्य देशों से भी हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस प्रदर्शनी को देखने पहुंचेंगे, जिससे बौद्ध विरासत के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ेगी।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदर्शनी भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों का प्रतीक है। इसे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को सशक्त करने और पूरे क्षेत्र में बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों के रूप में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस पहल से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और संपर्क और अधिक प्रगाढ़ होंगे।
बता दें कि इस प्रदर्शनी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान की थी। यह कदम भारत की अपनी समृद्ध बौद्ध विरासत को दुनिया के साथ साझा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वैश्विक बौद्ध विरासत के एक जिम्मेदार संरक्षक के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करता है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और प्रधानमंत्री डॉ. हरिणी अमरसूर्या ने कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस पवित्र आयोजन को संभव बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित होगी।
--आईएएनएस
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पहली बार सदन में टला पीएम मोदी का भाषण? जानें पहले कब-कब प्रधानमंत्री कहां समय पर नहीं कर पाए संबोधन
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी अपनी समयबद्धता और निरंतरता के लिए जाने जाते हैं. 4 फरवरी 2026 को भी संसद के बजट सत्र के दौरान उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर संबोधन देना था. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. सदन में जोरदार हंगामे के चलते पीएम मोदी को अपना भाषण टालना पड़ा. बीते 12 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ जब पीएम मोदी अपना भाषण संसद में समय पर नहीं दे पाए. हालांकि 2014 में कुछ ऐसे दुर्लभ मौके आए हैं जब सुरक्षा कारणों, राष्ट्रीय शोक या तकनीकी खराबी की वजह से उनके भाषण या तो टालने पड़े, रद्द करने पड़े या बीच में रोकने पड़े. आइए जानते हैं सदन के बाहर ऐसे मौके कब-कब आए.
यहां उन प्रमुख घटनाओं का विवरण दिया गया है:
1. फिरोजपुर, पंजाब (5 जनवरी 2022) - सुरक्षा में चूक
यह पीएम मोदी के कार्यकाल की सबसे बड़ी घटना मानी जाती है. पंजाब के फिरोजपुर में एक रैली को संबोधित करने जा रहे प्रधानमंत्री का काफिला प्रदर्शनकारियों की वजह से एक फ्लाईओवर पर 15-20 मिनट तक फंसा रहा. सुरक्षा में इस बड़ी सेंध के कारण पीएम मोदी को अपनी रैली रद्द करनी पड़ी और वे बिना भाषण दिए ही बठिंडा एयरपोर्ट लौट गए. उन्होंने वहां के अधिकारियों से कहा था, "अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहना कि मैं बठिंडा हवाई अड्डे तक जीवित लौट पाया."
2. बिजनौर, उत्तर प्रदेश (7 फरवरी 2022) - खराब मौसम
यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान बिजनौर में प्रधानमंत्री की एक बड़ी भौतिक रैली (Physical Rally) होनी थी. लेकिन खराब मौसम और लो-विजिबिलिटी के कारण उनके हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिली. अंततः उस फिजिकल रैली और भाषण को टालना पड़ा और पीएम ने बाद में उसे 'वर्चुअल' माध्यम से संबोधित किया.
3. 'परीक्षा पे चर्चा' (2020) - मूसलाधार बारिश
जनवरी 2020 में दिल्ली में होने वाले 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम को भारी बारिश और ओलावृष्टि के कारण टालना पड़ा था. पहले यह कार्यक्रम 16 जनवरी को होना था, जिसे बाद में री-शेड्यूल करके 20 जनवरी को किया गया था.
4. राष्ट्रीय शोक के कारण रैलियां रद्द
पुलवामा हमला (2019): फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी ने अपनी कई राजनीतिक रैलियां और उद्घाटन कार्यक्रम तुरंत रद्द कर दिए थे.
लता मंगेशकर का निधन (2022): फरवरी 2022 में स्वर कोकिला लता मंगेशकर के निधन के बाद पीएम मोदी ने गोवा में अपनी चुनावी जनसभा और 'डिजिटल संसद' से जुड़े कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया था.
5. तकनीकी कारणों से बीच में रुका भाषण
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF 2022): दावोस शिखर सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते समय टेलीप्रॉम्प्टर (Teleprompter) में तकनीकी खराबी आ गई थी. इस वजह से पीएम को अपना भाषण कुछ मिनटों के लिए बीच में ही रोकना पड़ा था. इसे लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा भी हुई थी.
6. हालिया घटना (2025-26)
जनवरी 2026 में अजित पवार के विमान हादसे और देश में शोक की लहर के चलते भी पीएम मोदी के कुछ पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों और 'मन की बात' के विशेष खंडों में फेरबदल की खबरें आई हैं.
पीएम मोदी के भाषणों का टलना बहुत दुर्लभ होता है क्योंकि उनकी टीम 'प्लान-बी' हमेशा तैयार रखती है. ज्यादातर मामलों में भाषण रद्द होने के पीछे सुरक्षा या प्राकृतिक कारण ही रहे हैं.
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