पीयूष गोयल ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश और कारोबार बढ़ाने के लिए दिया न्योता
नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर भारत में निवेश बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की। वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि इन बैठकों का उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक एवं वाणिज्यिक सहयोग को नई गति देना था।
मंत्रालय के बयान के मुताबिक, गोयल ने ब्लैकस्टोन, न्यूबर्गर बरमन, एस्टी लॉडर कंपनीज, आईबीएम, मेटलाइफ, जनरल अटलांटिक और एआईए ग्रुप के शीर्ष अधिकारियों से अलग-अलग बैठकें कीं।
ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) जोनाथन ग्रे और कंपनी के अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट इक्विटी कारोबार के चेयरमैन प्रकाश मेलवानी के साथ हुई बैठक में भारत में निवेश और साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई। विशेष रूप से विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
गोयल ने न्यूबर्गर बरमन के चेयरमैन एवं सीईओ जॉर्ज वॉकर और उनकी नेतृत्व टीम से भी मुलाकात की। इस दौरान वित्तीय सेवाओं और वेल्थ मैनेजमेंट क्षेत्र में निवेश सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा हुई।
एस्टी लॉडर कंपनीज के अध्यक्ष एवं सीईओ स्टेफान डी फावेरी के साथ बैठक में भारत के तेजी से बढ़ते ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने भारत में विनिर्माण और स्थानीय सोर्सिंग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार किया।
आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ अरविंद कृष्णा के साथ बातचीत में भारत में कंपनी की भागीदारी को और मजबूत करने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
गोयल ने मेटलाइफ के अध्यक्ष एवं सीईओ मिशेल ए. खलाफ से भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत में बीमा और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों तथा कंपनी के संभावित विस्तार पर चर्चा की गई।
इसके अलावा, उन्होंने जनरल अटलांटिक के चेयरमैन एवं सीईओ विलियम ई. फोर्ड के साथ निवेश और व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर विचार-विमर्श किया।
एआईए ग्रुप के गैर-कार्यकारी चेयरमैन मार्क टकर के साथ हुई बैठक में भारत के बीमा क्षेत्र और वित्तीय सेवाओं में अवसरों पर चर्चा हुई। इस दौरान भारत के 2047 तक सभी के लिए बीमा लक्ष्य को भी रेखांकित किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में बताया कि इन बैठकों में वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और निवेश से जुड़े अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई। साथ ही भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
--आईएएनएस
डीबीपी
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आने वाले दिनों में भी ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं, RBI गर्वनर ने बताई वजह
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को स्पष्ट किया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है. केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख बदलते हुए 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' यानी 'संतुलित सख्ती' अपनाने का फैसला किया है.
आगे भी हो सकती है रेपो रेट में बढ़ोतरी
तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आगे की नीतिगत कार्रवाई या तो रेपो रेट में बढ़ोतरी हो सकती है या फिर यथास्थिति बनाए रखी जा सकती है. दरों में कटौती फिलहाल विकल्पों में शामिल नहीं है.
मल्होत्रा ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र कितना लंबा चलेगा और इसकी सीमा क्या होगी, यह आने वाले समय में वृद्धि और महंगाई के वास्तविक आंकड़ों, अंतर्निहित मुद्रास्फीति, मूल्य दबावों के विस्तार तथा आपूर्ति झटकों के प्रभाव पर निर्भर करेगा.
औसत सीपीआई मुद्रास्फीति के 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान
उन्होंने बताया कि आरबीआई को उम्मीद है कि अगली तीन तिमाहियों में औसत सीपीआई मुद्रास्फीति लगभग 5.8 प्रतिशत रहेगी. इसके अलावा चालू वित्त वर्ष के लिए कोर मुद्रास्फीति करीब 4.94 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. आरबीआई ने मौद्रिक नीति में बदलाव के तहत स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर को 5.25 प्रतिशत तथा मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत कर दिया है.
वैश्विक चुनौतियों के बाद भी मजबूत भारत की अर्थव्यवस्था- आरबीआई
गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत बनी हुई है. उनके अनुसार निजी खपत में मजबूती बरकरार है और विवेकाधीन खर्च इसका समर्थन कर रहे हैं. वहीं स्थायी निवेश भी कई आर्थिक संकेतकों के आधार पर मजबूत दिखाई दे रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं और घरेलू हवाई यात्री यातायात जैसे कुछ क्षेत्रों में कमजोरी के संकेत देखने को मिले हैं.
आरबीआई के अनुसार, सेवा क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और घरेलू तथा वैश्विक मांग से इसे समर्थन मिल रहा है. दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और सर्विसेज पीएमआई दोनों विस्तार क्षेत्र में बने रहे, जिससे आर्थिक गतिविधियों की निरंतर मजबूती का संकेत मिलता है. मौद्रिक नीति समिति ने व्यापक आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों की समीक्षा के बाद सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत करने का फैसला किया.
स्रोत- आईएएनएस
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