आने वाले दिनों में भी ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं, RBI गर्वनर ने बताई वजह
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को स्पष्ट किया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है. केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख बदलते हुए 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' यानी 'संतुलित सख्ती' अपनाने का फैसला किया है.
आगे भी हो सकती है रेपो रेट में बढ़ोतरी
तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आगे की नीतिगत कार्रवाई या तो रेपो रेट में बढ़ोतरी हो सकती है या फिर यथास्थिति बनाए रखी जा सकती है. दरों में कटौती फिलहाल विकल्पों में शामिल नहीं है.
मल्होत्रा ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र कितना लंबा चलेगा और इसकी सीमा क्या होगी, यह आने वाले समय में वृद्धि और महंगाई के वास्तविक आंकड़ों, अंतर्निहित मुद्रास्फीति, मूल्य दबावों के विस्तार तथा आपूर्ति झटकों के प्रभाव पर निर्भर करेगा.
औसत सीपीआई मुद्रास्फीति के 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान
उन्होंने बताया कि आरबीआई को उम्मीद है कि अगली तीन तिमाहियों में औसत सीपीआई मुद्रास्फीति लगभग 5.8 प्रतिशत रहेगी. इसके अलावा चालू वित्त वर्ष के लिए कोर मुद्रास्फीति करीब 4.94 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. आरबीआई ने मौद्रिक नीति में बदलाव के तहत स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर को 5.25 प्रतिशत तथा मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत कर दिया है.
वैश्विक चुनौतियों के बाद भी मजबूत भारत की अर्थव्यवस्था- आरबीआई
गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत बनी हुई है. उनके अनुसार निजी खपत में मजबूती बरकरार है और विवेकाधीन खर्च इसका समर्थन कर रहे हैं. वहीं स्थायी निवेश भी कई आर्थिक संकेतकों के आधार पर मजबूत दिखाई दे रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं और घरेलू हवाई यात्री यातायात जैसे कुछ क्षेत्रों में कमजोरी के संकेत देखने को मिले हैं.
आरबीआई के अनुसार, सेवा क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और घरेलू तथा वैश्विक मांग से इसे समर्थन मिल रहा है. दूसरी तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और सर्विसेज पीएमआई दोनों विस्तार क्षेत्र में बने रहे, जिससे आर्थिक गतिविधियों की निरंतर मजबूती का संकेत मिलता है. मौद्रिक नीति समिति ने व्यापक आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों की समीक्षा के बाद सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 आधार अंकों की वृद्धि करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत करने का फैसला किया.
स्रोत- आईएएनएस
Navratri 2026: मां दुर्गा के 9 रूपों में कौन सबसे शक्तिशाली? जानें शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक की पूरी कहानी
Navratri 2026: नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा मां के ये सभी स्वरूप आदिशक्ति के अलग-अलग माने जाते हैं, जिनमें शक्ति, तपस्या, साहस, मातृत्व, सृजन, संहार और सिद्धि जैसे गुण समाहित होते हैं. नवरात्रि का प्रथम दिन मां शैलपुत्री का होता है. उनकी पूजा से शुरुआत होती है और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ समाप्त होती है.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मां दुर्गा के इन 9 स्वरूपों में सबसे शक्तिशाली देवी कौन हैं? क्या उग्र स्वरूप वाली मां कालरात्रि को सबसे शक्तिशाली माना जाता है या फिर महिषासुर का संहार करने वाली मां कात्यायनी को? वहीं, मां सिद्धिदात्री को सभी सिद्धियां को प्रदान करने वाली शक्ति माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नौ दुर्गाओं में किस स्वरूप की शक्ति सबसे अधिक होती है. आइए जानते हैं शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूरी कथा.
शारदीय नवरात्रि 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 11 अक्टूबर 2026 को होने वाला है. इस दिन कलश स्थापना होगी और 20 अक्टूबर को नवरात्रि का समापन होगा. इस दिन महानवमी के साथ-साथ दशहरा का त्यौहार भी मनाया जाता है. इस वर्ष नवरात्रि का पर्व पूरे दस दिनों का रहेगा क्योंकि इस बार सप्तमी नवरात्रि दो दिन पड़ रही है.
मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का महत्व क्या है?
सनातन धर्म में, देवी दुर्गा को सिर्फ शक्ति और रक्षा की प्रतीक नहीं माना जाता है बल्कि जीवन में प्रत्येक व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा का भी प्रतिनिधित्व करने वाली शक्ति माना जाता है. नवरात्रि, उनके नौ रूपों का उत्सव, जीवन के इन चरणों पर चिंतन करने और यह समझने का समय होता है कि प्रत्येक चरण अपने साथ अलग-अलग सबक लेकर आता है. चाहे आप बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग, देवी दुर्गा के नौ रूप हम सभी को कुछ न कुछ सिखाते हैं.
देवी दुर्गा के नौ रूप
मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री.
1.मां शैलपुत्री
शैलपुत्री माता को बचपन की मासूमियत से संबंधित है. शैलपुत्री माता पर्वत की पुत्री कहलाती है. शक्तिशाली हिमालय की पुत्री शैलपुत्री, जीवन के प्रथम चरण को दर्शाती है. वह बचपन का प्रतिनिधित्व करती है, जहां मासूमियत और संभावनाएं स्पष्ट रूप से चमकती हैं. अपने दोनों हाथों में उन्होंने त्रिशूल और कमल पुष्प धारण किए हुए हैं. ये प्रतीक भले ही शक्तिशाली प्रतीत हों, लेकिन ये हमे हर बच्चे के अंदर छिपी पवित्रता और कोमलता की याद दिलाता है. एक नन्हे बच्चे की भांति, जो आशाओं से भरा होता है.
2.मां ब्रह्मचारिणी
आदिशक्ति का दूसरा स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी हैं, जो ज्ञान की साधक मानी जाती है. ब्रह्मचारिणी एक विद्यार्थी की तरह है, जो विद्यालय जाती है और संसार की हर चीजों को सीखने के लिए उत्सुक रहती है. ब्रह्मचारिणी माता हमें परिश्रम, अनुशासन और एकाग्रता का महत्व सिखाती हैं. वह सफेद रंग वस्त्र धारण करती है, हाथों में जलपात्र और माला धारण किए हुए हैं. उन्हें बौद्धिक विकास के प्रति समर्पित माना जाता है.
3.मां चंद्रघंटा
चंद्रघंटा माता को शक्ति स्वरूप की तीसरी देवी मानी जाती है. उन्हें जागृति की योद्धा माना जाता है. इस अवस्था तक, कभी मासूम दिखने वाला यह बच्चा एक आत्मविश्वासी और बहादुर योद्धा बन चुका है, जो दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है. चंद्रघंटा की दस भुजाएं हैं, जिनमें से प्रत्येक में अलग-अलग हथियार है और उनके माथे के मध्य में एक तीसरी आंख हैं. उन्हें सतर्कता और किसी भी बाधा का सामना करने की तत्परता का प्रतीक माना जाता है. वहीं, देवी चंद्रघंटा एक युवा, ऊर्जा और उत्साह से भरपूर, जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने वाली है. उनका स्वरूप हमें याद दिलाता है कि जीवन हमेशा आसान नहीं होता लेकिन आंतरिक शक्ति से हम सबसे कठिन परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं.
4.मां कुष्मांडा
शक्ति का चौथा स्वरूप माता कुष्मांडा का होता है. इस रूप में दुर्गा उस सृजनात्मक शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है. उन्हें ब्रह्मांड का निर्माता माना जाता है. उनकी कथा हमें बताती है कि जब कुछ भी अस्तित्व में नहीं था, तब कुष्मांडा की तेजस्वी मुस्कान ने ब्रह्मांड की रचना की. देवी का यह रूप एक ऐसी मां के समान है, जो गर्भ धारण किए हुए है और नए जीवन को जन्म देने के लिए तैयार है. उनके गर्भ में पल रहे जीवन का पोषण करती है, उसी प्रकार कुष्मांडा ब्रह्मांड के पोषण और जीवनदायी पहलू का प्रतिनिधित्व करती हैं.
5.मां स्कंदमाता
स्कंदमाता देवी को शक्ति की पांचवी शक्ति स्वरूप मानी जाती है. उन्हें रक्षा करने वाली माता कहा जाता है. इस समय तक देवी एक पालन-पोषण करने वाली और रक्षा करने वाली मां की भूमिका निभा चुकी होती है. स्कंदमाता माता-पिता और बच्चे के बीच गहरे संबंध का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहां मां का प्रेम और देखभाल निशर्त होती है. जैसे-जैसे हम बड़े होते गए और जिम्मेदारियां संभालते हैं, स्कंदमाता हमें निस्वार्थ प्रेम का महत्व सिखाती हैं. वह अपने बच्चे को अपनी गोद में लिए हुए हैं और पूरी तरह से उसकी भलाई पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं. ठीक इसी तरह, हम सीखते हैं कि सच्चा प्रेम दूसरों को प्राथमिकता देने, उनका पालन-पोषण करने और उनकी खुशी सुनिश्चित करने में निहित होता है.
6.मां कात्यायनी
कात्यायनी माता को नवदुर्गा का छठा स्वरूप माना जाता है. उन्हें अपने प्रियजनों की रक्षा करने योद्धा की शक्ति का प्रतीक होता है. मां बनने के बाद एक स्त्री को अपार शक्ति प्राप्त हो जाती है और कात्यायनी इसी सुरक्षात्मक शक्ति का प्रतीक है. जब दुर्गा यह रूप धारण करती हैं, तो वे उग्र और शक्तिशाली हो उठती हैं, अपने बच्चों या अपनी प्रजा को धमकाने वाले किसी भी शत्रु को पराजित करने के लिए तैयार रहते हैं. यह रूप विशेष रूप से राक्षस महिषासुर पर विजय के लिए जाना जाता है. कात्यायनी माता हमें सिखाती हैं कि जीवन में हमें न सिर्फ अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी मजबूत होना आवश्यक है.
7.मां कालरात्रि
कालरात्रि माता को शक्ति स्वरूप का सातवां रूप माना जाता है. उनके सबसे उग्र रूपों में से एक है. वह बुराई की शक्तियों के नाश और संसार से अज्ञान और अंधकार के निवारण का प्रतीक है. इस रूप में दुर्गा काली और भयानक दिखाई देते हैं, फिर भी उनके इरादे शुद्ध हैं. वह बुराई का नाश करके अच्छाई की रक्षा करने के लिए यहां हैं. उन्हें न्याय की प्रबल रक्षक मानी जाती है. उन्होंने रक्तबीज का रक्त पीकर उसे पुनर्जीवित होने से रोका और इस प्रकार संसार को उसकी बुराई से बचाया था. कभी-कभी जीवन में नकारात्मकता को दूर करने और न्याय दिलाने के लिए हमें साहसी और कठिन कदम उठाने पड़ते हैं.
8.मां महागौरी
महागौरी माता को नवदुर्गा का आठवां रूप माना जाता है. उन्हें शांति की देवी कहा जाता है. मां महागौरी भयंकर युद्ध के बाद, देवी दुर्गा के आठवें रूप महागौरी के आगमन से शांति लौट आती है. उनके नाम का अर्थ है महान श्वेत, जो पवित्रता, शांति और स्थिरता का प्रतीक है. महागौरी देवी का वह रूप है, जो हमें उथल-पुथल के बाद शांति और सुकून की सुंदरता का दर्शन कराता है. इस रूप में वह एक शांत मां की तरह हैं, जो परिवार में उथल-पुथल के बाद सामंजस्य स्थापित करती हैं. महागौरी का संदेश स्पष्ट है, हर संघर्ष के बाद शांति और सुकून का क्षण आता है.
9.मां सिद्धिदात्री
सिद्धिदात्री माता को नवदुर्गा की नौवीं देवी हैं. उन्हें बुद्धिमान और दयालु माना जाता है. यह अंतिम स्परूप होता है. अब तक देवी को पूर्ण ज्ञान और बुद्धि प्राप्त हो चुकी है. वे एक ऐसे बुद्धिमान बुजुर्ग की तरह हैं, जिन्होंने जीवन में सब कुछ अनुभव कर लिया है और अब अपने ज्ञान का उपयोग दूसरों का मार्गदर्शन करने के लिए करती हैं. सिद्धिदात्री को अक्सर भक्तों से घिरा हुआ देखा जाता है, जो उन पर आशीर्वाद और आध्यात्मिक ज्ञान की देवी मानी जाती हैं. उनका स्वरूप जीवन भर सीखे गए सभी पाठों की परिणति का प्रतीक है. बच्चों के लिए सिद्धिदात्री बड़ों की बात सुनने और उनके अनुभवों से सीखने का महत्व दर्शाती है.
इन सभी देवियों में सबसे शक्तिशाली कौन सी देवी हैं?
ज्योतिषाचार्य हरी गोपाल शर्मा के अनुसार, वह बताते हैं कि नवदुर्गा के नौ स्वरूपों की सभी देवियां शक्तिशाली हैं. इनमें से किसी को भी कम शक्ति या अधिक शक्ति वाली नहीं मानी जा सकती है. सभी स्वरूपों के पास अपनी अलग-अलग दिव्य शक्तियां और गुण है. हालांकि शक्ति के स्वरूप के आधार पर मां कालरात्रि को सबसे प्रचंड देवी माना जाता है, जबकि मां कात्यायनी को असुर संहार और मां सिद्धिदात्री को सिद्धि एवं पूर्णता से जोड़ा जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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