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खंडवा में कांग्रेस का निगम घेराव, पानी, सड़क और सफाई की समस्या को लेकर करेगी प्रदर्शन

विदिशा में कांग्रेस द्वारा नगर निगम का घेराव करने का ऐलान किया गया है। शहर में मूलभूत सुविधाओं और निगम के कार्य प्रणाली को लेकर नाराज चल रही कांग्रेस ने घेराव कर विरोध जताने का फैसला लिया है। निगम का घेराव करने के साथ-साथ मार्च भी निकाला जाएगा।

शहर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में किए जाने वाले इस घेराव के लिए कांग्रेस द्वारा 25 साल से भाजपा का महापौर फिर भी खंडवा बेहाल नारा दिया गया है। सभी का कहना है कि नगर निगम की बागडोर लंबे समय से भाजपा के पास है। लेकिन इसके बावजूद भी शहर के कई इलाकों में पानी, सीवरेज, सड़क की सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की परेशानी है। यही वजह है कि विरोध करने का फैसला लिया गया।

निकाला जाएगा पैदल मार्च

शहर कांग्रेस की तरफ से दोपहर 12:15 बजे गांधी भवन से कांग्रेस के नेता कार्यकर्ता नगर निगम की तरफ प्रस्थान करेंगे। पैदल मार्च के जरिए निगम कार्यालय तक पहुंचने के बाद में यहां घेराव दिया जाएगा। इसके बाद खराब सड़क, पेयजल व्यवस्था, सफाई से जुड़ी समस्याएं उठाई जाएगी। कांग्रेस ने आम जनता से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। यह कहा गया है कि लोग अपने-अपने क्षेत्र की समस्याएं नगर निगम के अधिकारियों जनप्रतिनिधियों के सामने रख सकते हैं।

जन समस्या का समाधान है उद्देश्य

कांग्रेस का कहना है कि इस घेराव का उद्देश्य शहर की सारी समस्याओं को नगर निगम तक पहुंचाना है। घेराव को लेकर पार्टी ने सभी वरिष्ठ नेताओं, पार्षदों, पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को गांधी भवन पहुंचने की अपील की है। यहां एकत्रित होने के बाद सभी निगम कार्यालय जाएंगे।

क्या है कांग्रेस का मुद्दा

इस घेराव के बारे में कांग्रेस का यह कहना है कि लंबे समय से शहर में महापौर पद पर भाजपा के नेता काबिज रहे हैं। इसके बावजूद भी सड़क खराब है और सीवरेज से जुड़ी शिकायत लगातार सामने आती है। कईं क्षेत्रों में पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। कांग्रेस का कहना है कि नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इन समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है। इतने वर्षों के बाद भी शहर की बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी तरह से ठीक क्यों नहीं है, इसका जवाब देना चाहिए।

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Explainer: 20, 30 या 50 लाख का होम लोन है? RBI के फैसले के बाद हर महीने जेब से निकलेंगे इतने ज्यादा रुपये

भारतीय रिजर्व बैंक ने आखिरकार वह फैसला सुना दिया है, जिसका डर लोन लेने वालों को पिछले कई दिनों से सता रहा था. बुधवार को RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है. जिससे अब होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन, सभी महंगे होने जा रहे हैं. आइए आपको डिटेल में बताते हैं कि अगर आपने 20, 30 या 50 लाख का होम लोन ले रखा है तो अब RBI के नए फैसले के बाद हर महीने आपकी जेब से कितने रुपये ज्यादा निकलेंगे.

RBI ने आखिर कितनी बढ़ोतरी की है?

तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति MPC की बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. इस इजाफे के बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत पर पहुंच गया है.

यह बढ़ोतरी इतनी बड़ी खबर क्यों बन गई है?

दरअसल, RBI ने करीब चार साल बाद रेपो रेट में यह बढ़ोतरी की है. इससे पहले आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो रेट बढ़ाया गया था. इस साल हुई पिछली तीन बैठकों, यानी अप्रैल, जून और अगस्त में दर को लगातार 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया था, लेकिन त्योहारी सीजन से ठीक पहले केंद्रीय बैंक ने यह झटका दे दिया.

20 लाख के होम लोन पर कितना असर पड़ेगा?

मान लीजिए किसी ने 7.5 प्रतिशत ब्याज दर पर 20 साल के लिए 20 लाख रुपये का होम लोन लिया है तो उसकी मौजूदा EMI करीब 16,112 रुपये बैठती है. ब्याज दर 7.75 प्रतिशत होने के बाद यही EMI बढ़कर 16,419 रुपये हो जाएगी. यानी हर महीने 307 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

30 लाख के लोन पर कितनी जेब ढीली होगी?

30 लाख रुपये के होम लोन पर जो 7.50 प्रतिशत ब्याज दर और 20 साल की अवधि पर लिया गया है, अभी मासिक किस्त 24,168 रुपये है. नई ब्याज दर 7.75 प्रतिशत लागू होने के बाद यह बढ़कर 24,628 रुपये हो जाएगी यानी हर महीने 460 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे.

50 लाख के बड़े होम लोन का गणित क्या कहता है?

50 लाख रुपये के होम लोन पर जो 7.5 प्रतिशत ब्याज दर पर 20 साल के लिए लिया गया है, फिलहाल EMI करीब 40,280 रुपये है. ब्याज दर 7.75 प्रतिशत होने के बाद यह बढ़कर 41,047 रुपये हो जाएगी. यानी हर महीने 767 रुपये अतिरिक्त देने होंगे.

EMI का यह पूरा कैलकुलेशन किस फॉर्मूले पर आधारित है?

EMI निकालने का फॉर्मूला है- P गुणा R गुणा (1+R) की पावर N, भाग [(1+R) की पावर N माइनस 1]. इसमें P का मतलब लोन की रकम, N का मतलब महीनों में लोन की अवधि और R का मतलब मासिक ब्याज दर है, जिसे सालाना ब्याज दर को 12 और 100 से भाग देकर निकाला जाता है.

रेपो रेट बढ़ने का मतलब आम भाषा में क्या है?

रेपो रेट वह दर है, जिस पर RBI बैंकों को कम अवधि के लिए कर्ज देता है. जब यह दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए RBI से पैसा उधार लेना महंगा हो जाता है और बैंक इस बढ़े हुए बोझ को आगे अपने ग्राहकों पर डाल देते हैं, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन, सभी की ब्याज दरें बढ़ जाती हैं.

RBI ने यह सख्त कदम आखिर क्यों उठाया?

इसके पीछे मुख्य वजह बढ़ती महंगाई और लगातार ऊंची बनी कच्चे तेल की कीमतें बताई जा रही हैं. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ गया है. 

क्या बढ़ी हुई EMI तुरंत लागू हो जाएगी?

रेपो रेट बढ़ने का असर आपकी मौजूदा लोन EMI पर तुरंत नहीं पड़ता बल्कि यह आपके बैंक की तय की गई 'रीसेट डेट' पर ही प्रभावी होता है. अलग-अलग ग्राहकों के लिए यह बदलाव थोड़े समय बाद लागू हो सकता है.

क्या सिर्फ लोन लेने वालों को ही नुकसान होगा या किसी को फायदा भी है?

जहां एक तरफ कर्जदारों की जेब पर बोझ बढ़ेगा, वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD कराने वालों के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है. रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंक अक्सर FD की ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं जिससे नए निवेशकों को ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद बनती है.

रियल एस्टेट सेक्टर पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

होम लोन महंगा होने से घर खरीदने की कुल लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर रियल एस्टेट बाजार की मांग पर पड़ सकता है. त्योहारी सीजन में आमतौर पर घरों की बिक्री बढ़ती है, ऐसे में ऐन मौके पर आया यह फैसला खरीदारों के फैसले को प्रभावित कर सकता है.

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