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सीहोर में 2,938 मीट्रिक टन गेहूं खराब, उमंग सिंघार ने पूछा “गरीबों के राशन की बर्बादी का जिम्मेदार कौन”

मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीहोर में 2,938 मीट्रिक टन गेहूं खराब होने पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं बर्बाद होने से लगभग 5 लाख 87 हजार गरीबों का एक महीने का राशन प्रभावित हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया कि अन्नदाता का अनाज और गरीबों का निवाला बर्बाद होने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि तीन साल तक गरीबों के हक का अनाज गोदामों में पड़ा रहा और जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे पाए। बीजेपी को घेरते हुए उन्होंने कहा कि ये घटना सरकार के ‘सुशासन’ की असली तस्वीर सामने लाती है।

सीहोर में हजारों मीट्रिक टन गेहूं सड़ा

सीहोर जिले के अलग-अलग गोदामों में रखा लगभग 2,938 मीट्रिक टन गेहूं खराब होकर बर्बाद हो गया है। इसमें पुराना स्टॉक भी शामिल है, जो लंबे समय तक गोदामों में पड़ा रहा। खराब हुए गेहूं की मात्रा इतनी बताई जा रही है कि इससे लगभग 5 लाख 87 हजार 600 लोगों का एक महीने का राशन पूरा हो सकता था

सीहोर में गेहूं खराब होने का मामला हाल के स्टॉक तक सीमित नहीं है। जिले के अलग-अलग वेयरहाउस में लंबे समय से इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं। इस बार भी लंबे समय तक गोदामों में पड़े गेहूं पर घुन और अन्य कारणों से नुकसान हुआ। ऐसे स्टॉक का समय पर उठाव कर उसे राशन व्यवस्था या अन्य उपयोग में लाया जा सकता था। लेकिन लंबे समय तक पड़े रहने से अनाज इस्तेमाल के लायक नहीं बचा।

कांग्रेस ने सरकार को घेरा

ये पूरा मामला सरकारी खरीद के बाद अनाज के भंडारण और प्रबंधन से जुड़ा है। एक तरफ किसान से समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदा जाता है, वहीं दूसरी तरफ उसका सुरक्षित भंडारण और समय पर उपयोग नहीं होने पर सरकारी स्टॉक खराब हो जाता है। सीहोर के मामले में अब उमंग सिंघार ने सरकार से जवाब मांगा है और सवाल किया है कि जब यह अनाज गरीबों के राशन में इस्तेमाल हो सकता था तो इसे खराब होने से बचाने के लिए समय पर कदम क्यों नहीं उठाए गए।

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मथुरा-वृंदावन के बीच बनेगी फोरलेन सड़क, 11.80 किमी पुराने रेल ट्रैक का होगा इस्तेमाल

मथुरा और वृंदावन के बीच सफर करने वाले लोगों को आने वाले समय में बड़ी राहत मिल सकती है. दोनों शहरों के बीच पुराने और अब इस्तेमाल में नहीं आ रहे रेलवे ट्रैक पर फोरलेन सड़क बनाने की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है. प्रदेश सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए लोक निर्माण विभाग से इसकी कार्ययोजना तैयार करने को कहा है.

मंगलवार को उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव सोमनाथ ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष को पत्र भेजकर परियोजना की कार्ययोजना जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. शासन ने इसे अति महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है.

मथुरा-वृंदावन मार्ग पर जाम से मिलेगी राहत

मथुरा और वृंदावन के बीच फिलहाल सड़क संपर्क के लिए मुख्य रूप से एक ही मार्ग पर काफी दबाव रहता है. यातायात बढ़ने के कारण स्टेट बैंक चौराहे से भूतेश्वर तक अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है. इसी समस्या को देखते हुए मथुरा विजन-2030 में पुराने रेलवे ट्रैक की जमीन का इस्तेमाल कर नया सड़क मार्ग विकसित करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है. इससे दोनों धार्मिक शहरों के बीच आवाजाही आसान होने की उम्मीद है.

11.80 किलोमीटर लंबा है पुराना रेल ट्रैक

मथुरा और वृंदावन के बीच इस्तेमाल में नहीं आ रहे रेलवे ट्रैक की लंबाई करीब 11.80 किलोमीटर बताई गई है. इस परियोजना के लिए उपलब्ध रेलवे भूमि का क्षेत्रफल लगभग 35.57 हेक्टेयर है. पुराने रेल मार्ग की जमीन को सड़क परियोजना के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. इससे नई सड़क के लिए अलग से बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण की जरूरत कम हो सकती है. परियोजना से जुड़ी जमीन के लिए करीब 407.16 करोड़ रुपये का अनुमान सामने आया है. इस संबंध में प्रस्ताव वरिष्ठ मंडल अभियंता (प्रथम), उत्तर मध्य रेलवे और मंडल रेल प्रबंधक (कार्य), आगरा को भेजा जा चुका है. योजना के अनुसार, जमीन की लागत का खर्च लोक निर्माण विभाग उठाएगा, जबकि सड़क के निर्माण की लागत मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा वहन किए जाने की बात कही गई है.

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पहले चलती थी रेल बस सेवा

मथुरा और वृंदावन के बीच कुछ साल पहले तक रेल बस सेवा संचालित होती थी, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया. इसके बाद इस मार्ग पर यातायात को आसान बनाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया गया. सांसद हेमा मालिनी के प्रयासों से इस मार्ग पर एलीवेटेड ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भी सामने आया था. परियोजना पर काम शुरू हुआ, लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध के बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका.

अब पुराने ट्रैक पर सड़क बनाने की तैयारी

एलीवेटेड ट्रेन परियोजना के बाद पुराने रेलवे ट्रैक की जमीन पर फोरलेन सड़क बनाने की मांग उठी. मुख्यमंत्री की ओर से भी इस योजना की घोषणा की जा चुकी है. अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए रेलवे की जमीन प्रदेश सरकार को हस्तांतरित किया जाना जरूरी है. स्थानीय प्रशासन की ओर से इस संबंध में रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की जानकारी है.

10 अक्टूबर को चार ट्रेनें रहेंगी रद्द

इधर, मथुरा जंक्शन के चरण-2 और भूतेश्वर स्टेशन पर री-मॉडलिंग का काम भी चल रहा है. इसके चलते 10 अक्टूबर को रेल यातायात प्रभावित रहेगा. रेलवे के अनुसार, 10 अक्टूबर को 55333 कासगंज-आगरा फोर्ट, 55334 आगरा फोर्ट-कासगंज, 55331 कासगंज-अछनेरा और 55332 अछनेरा-कासगंज सवारी ट्रेनें रद्द रहेंगी.

मथुरा कैंट तक ही जाएगी एक ट्रेन

रेलवे के मुताबिक, 55335 कासगंज-मथुरा जंक्शन ट्रेन को 9 अक्टूबर तक उत्तर-मध्य रेलवे क्षेत्र में करीब 10 मिनट नियंत्रित गति से चलाया जाएगा. 10 अक्टूबर को यह ट्रेन मथुरा जंक्शन के बजाय मथुरा कैंट तक जाएगी और वहीं अपनी यात्रा समाप्त करेगी. इसके अलावा 55336 मथुरा जंक्शन-कासगंज ट्रेन 10 अक्टूबर को मथुरा जंक्शन की जगह मथुरा कैंट से रवाना होगी.

यात्रियों से पहले जानकारी लेने की अपील

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि 10 अक्टूबर को यात्रा करने से पहले ट्रेन के संचालन और मार्ग की स्थिति की जानकारी जरूर ले लें. री-मॉडलिंग कार्य के कारण ट्रेनों के समय और संचालन में बदलाव हो सकता है. आने वाले समय में यदि मथुरा-वृंदावन के बीच प्रस्तावित फोरलेन सड़क परियोजना जमीन पर उतरती है, तो इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ वृंदावन और मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं को भी आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

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