वाराणसी से निकली बाइर रैली वडनगर पहुंची:PM मोदी वर्चुअली जुड़कर बाइकर्स से बात करेंगे, तीन राज्यों के CM भी रहेंगे मौजूद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुरू किए गए 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित 'वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा' का समापन कार्यक्रम 7 अक्टूबर को मोदी के गृहनगर वडनगर में होने जा रहा है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और उनके गृह नगर वडनगर को जोड़ने वाली यात्रा है। समापन समारोह में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्य सरकार के मंत्री, सांसद और विधायक मौजूद रहेंगे। मुख्य कार्यक्रम शाम 4 बजे वडनगर में होगा। प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे। इससे पहले पीएम एक कार्यक्रम में सुबह 11.30 बजे भी वर्चुअली शामिल होंगे। वडनगर में कार्यक्रम की तैयारियों की तीन तस्वीरें… 500 बाइकर्स मंगलवार शाम को वडनगर पहुंचें सेवा यात्रा के तहत वाराणसी से रवाना हुए लगभग 500 बाइक सवार मंगलवार को वडनगर पहुंचें। इन बाइकर्स के स्वागत के लिए शहर में विशेष तैयारियां की गई हैं। शाम को ये सभी बाइकर्स वडनगर की ऐतिहासिक शर्मिष्ठा झील पर आयोजित भव्य महा आरती में शामिल हुए। इस अवसर पर गुजरात की विरासत और परंपराओं को दर्शाने वाले कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। हाटकेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे बुधवार की सुबह 8:00 बजे बाइकर्स वाराणसी से लाए गए पवित्र जल से वडनगर के प्राचीन हाटकेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद, वे स्थानीय लोगों के साथ प्रधानमंत्री की 'सेवा ज्योति यात्रा' कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखेंगे। दोपहर 12:30 बजे, सभी बाइकर्स वड़नगर साइंस कॉलेज में सामूहिक वृक्षारोपण के लिए जमा होंगे। वृक्षारोपण के बाद, वे 'अनुभवात्मक संग्रहालय' (अनंत अनादि वडनगर) का दौरा करेंगे। इस म्युजियम में वडनगर के गौरवशाली इतिहास और प्राचीन पहचान की झलकियां देखी जा सकती हैं। ------------------ ये खबर भी पढ़ें… सेवा यात्रा का स्वागत, बाइकर्स ने तोड़े ट्रैफिक रूल:वडनगर से वाराणसी जा रही यात्रा पर फूलों की बारिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के सेवा कार्य पूरे होने पर 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत वडनगर (गुजरात) से वाराणसी तक सेवा यात्रा निकाली गई। कैमूर जिले के खुरमाबाद बॉर्डर पर NH 19 पर जेसीबी से फूलों की बारिश, टीका, ढोल-नगाड़ों से इसका स्वागत हुआ। पूरी खबर पढ़ें…
2026 के केमिस्ट्री नोबेल का ऐलान आज:भारतीय मूल के शंकर बालासुब्रमण्यम का नाम चर्चा में; DNA सीक्वेंसिंग के लिए इसी साल वुल्फ केमिस्ट्री पुरस्कार मिला
2026 के केमिस्ट्री नोबेल का ऐलान आज होगा। इस बार पुरुस्कार के लिए भारतीय मूल के ब्रिटिश वैज्ञानिक शंकर बालासुब्रमण्यम का नाम भी चर्चा में है। उन्हें इसी साल डेविड क्लेनरमैन और पास्कल मेयर के साथ वुल्फ केमिस्ट्री पुरस्कार मिला है। तीनों को अगली पीढ़ी की DNA सीक्वेंसिंग को विकसित करने में अहम योगदान के लिए सम्मानित किया गया था। इसके अलावा प्रोटीन में इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर, खुद बनने वाली आणविक परत, पेरोव्स्काइट सोलर सेल और ग्लाइकोप्रोटीन बनाने जैसी खोजों के वैज्ञानिकों के नाम भी चर्चा में हैं। नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए है। शंकर बालासुब्रमण्यम ने DNA पढ़ने की रफ्तार बढ़ाई शंकर बालासुब्रमण्यम और डेविड क्लेनरमैन ने ऐसी तकनीक विकसित करने में अहम भूमिका निभाई, जिसमें एक साथ बड़ी संख्या में DNA की कॉपी को पढ़ा जा सकता है। इससे DNA सीक्वेंसिंग की रफ्तार करीब 10 लाख गुना बढ़ी और इसकी लागत भी काफी कम हुई। उनके काम से बनी सीक्वेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल अब दुनिया में होने वाली 90% से ज्यादा सीक्वेंसिंग में होता है। इससे जीन से जुड़ी बीमारियों को समझने, इलाज की योजना बनाने और प्रिसीजन मेडिसिन यानी मरीज के हिसाब से इलाज तय करने में मदद मिली है। पास्कल मेयर ने इस तकनीक को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने लायक बनाने में योगदान दिया। उन्होंने केमिस्ट्री, माइक्रोफ्लूडिक्स, ऑप्टिक्स और कंप्यूटर तकनीक को एक साथ जोड़कर हाई-थ्रूपुट सीक्वेंसिंग सिस्टम तैयार करने में मदद की। इससे इंसानी जीनोम की सीक्वेंसिंग की लागत 200 डॉलर से कम तक पहुंचने में मदद मिली। चेन्नई में जन्मे, एक साल की उम्र में ब्रिटेन चले गए शंकर बालासुब्रमण्यम का जन्म 1966 में मद्रास यानी आज के चेन्नई में हुआ था। अगले ही साल वे अपने माता-पिता के साथ ब्रिटेन चले गए। वे फिलहाल यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज में हर्शेल स्मिथ प्रोफेसर ऑफ मेडिसिनल केमिस्ट्री हैं। वे कैंसर रिसर्च यूके के कैम्ब्रिज इंस्टीट्यूट में सीनियर ग्रुप लीडर भी हैं। उन्होंने 1988 में कैम्ब्रिज से नेचुरल साइंसेज में BA और 1991 में एंजाइम केमिस्ट्री में PhD की। 1994 में वे कैम्ब्रिज की फैकल्टी से जुड़े। उन्हें 2017 में नाइटहुड से सम्मानित किया गया। उन्हें रॉयल मेडल, मिलेनियम टेक्नोलॉजी प्राइज और ब्रेकथ्रू प्राइज फॉर लाइफ साइंसेज भी मिल चुके हैं। प्रोटीन के अंदर इलेक्ट्रॉन कैसे जाते हैं, यह समझाने वाले वैज्ञानिक भी दावेदार केमिस्ट्री नोबेल के लिए हैरी बी. ग्रे और जे विंकलर के नाम भी चर्चा में हैं। दोनों ने यह समझाने में अहम काम किया कि प्रोटीन के अंदर इलेक्ट्रॉन एक जगह से दूसरी जगह कैसे जाते हैं। हमारे शरीर में ऊर्जा बनाने वाली कई प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन का एक जगह से दूसरी जगह जाना जरूरी होता है। दोनों वैज्ञानिकों के काम से यह समझने में मदद मिली कि इलेक्ट्रॉन प्रोटीन के अंदर लंबी दूरी कैसे तय करते हैं और इसमें प्रोटीन की बनावट की क्या भूमिका होती है। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… 2026 का फिजिक्स नोबेल फ्रांसिस हाल्जेन को मिला:अंतरिक्ष से आने वाले रहस्यमयी कणों को पकड़ने का तरीका खोजा; ब्रह्मांड को समझने में मदद मिली बेल्जियम के वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें यह पुरस्कार अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनके बारे में पता लगाने में अहम काम के लिए दिया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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