जरूरत की खबर- इन 10 फूड से पेट होगा खराब:पाचन चाहिए दुरुस्त तो अपनी ईटिंग हैबिट बदलें, थाली में ये 14 चीजें शामिल करें
"आज पेट ठीक नहीं लग रहा।" "कुछ भी खाता हूं तो गैस बन जाती है।" हमने अपने आसपास के कई लोगों को अक्सर ऐसा कहते हुए सुना होगा। कई बार इसकी वजह बिगड़ती गट हेल्थ होती है। हमारी आंतों में खरबों बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें ‘गट माइक्रोबायोम’ कहते हैं। ये सूक्ष्मजीव भोजन को पचाने, पोषक तत्वों को शरीर तक पहुंचाने, इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने और शरीर के कई जरूरी कामों में अहम भूमिका निभाते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हमारी लगभग 70% इम्यूनिटी का संबंध आंतों से है। हमारी रोज की थाली का गट हेल्थ पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। हम जो कुछ भी खाते हैं, वह आंतों में रहने वाले इन सूक्ष्मजीवों को भी प्रभावित करता है। कुछ फूड्स अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और गट माइक्रोबायोम को मजबूत बनाते हैं। वहीं कुछ फूड्स इनका संतुलन बिगाड़ सकते हैं। इससे पाचन संबंधी कई समस्याओं का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में पेट के लिए 10 बेस्ट और वर्स्ट फूड की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. हर्ष कपूर, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, मेट्रो इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड हेप्टोलॉजी, नोएडा सवाल- पेट की सेहत (गट हेल्थ) दुरुस्त रहने का क्या मतलब है? जवाब- इसका मतलब डाइजेस्टिव सिस्टम के सही तरीके से काम करने और आंतों में मौजूद गट माइक्रोबायोम के संतुलन से है। इसके संतुलन से- सवाल- कैसे पता चलता है कि पेट की सेहत खराब हो रही है? जवाब- जब आंतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ता है तो खाना पचाने और शरीर में पोषक तत्वों को पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। ग्राफिक में खराब गट हेल्थ के शुरुआती संकेत देखिए- सवाल- लंबे समय तक लगातार पेट खराब रहे तो इससे क्या नुकसान होता है? जवाब- लंबे समय तक पेट खराब रहने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इससे कमजोरी बढ़ सकती है और इम्यूनिटी पर भी असर पड़ सकता है। ग्राफिक में सभी नुकसान देखिए- सवाल- पेट दुरुस्त रखने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया को वैराइटी पसंद होती है। इसलिए रोज अलग-अलग तरह के फल-सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर रिच फूड खाने चाहिए। छोटी-छोटी स्वस्थ आदतें लंबे समय में गट हेल्थ को मजबूत बनाती हैं। सवाल- कौन-से फूड्स पेट में गुड बैक्टीरिया बढ़ाते हैं? जवाब- दही और छाछ जैसे फर्मेंटेड फूड्स अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने में मदद करते हैं, जबकि फल-सब्जियां, दालें और साबुत अनाज उन्हें पोषण देते हैं। इसलिए गट हेल्थ बेहतर रखने के लिए रोज अलग-अलग तरह की पौष्टिक चीजें खाना जरूरी है। ग्राफिक में गुड बैक्टीरिया बढ़ाने वाले फूड्स की लिस्ट देखिए- सवाल- कौन-से फूड्स गुड बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं? जवाब- कुछ फूड्स गुड और बैड बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकते हैं। खासकर ऐसे फूड्स, जिनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, एक्स्ट्रा शुगर, अनहेल्दी फैट और आर्टिफिशियल एडिटिव्स ज्यादा होते हैं। इन फूड्स की लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- चीनी गुड बैक्टीरिया को कैसे नुकसान पहुंचाती है? जवाब- डाइट में चीनी की मात्रा ज्यादा होने से आंतों में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने लगता है। इससे कुछ बैड बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं, जबकि गुड बैक्टीरिया की संख्या घट सकती है। समय के साथ यह बदलाव गट बैरियर को कमजोर करता है और शरीर में सूजन बढ़ा सकता है। यही वजह है कि लंबे समय तक ज्यादा चीनी खाने से गट हेल्थ खराब होती है। सवाल- क्या बार-बार एंटीबायोटिक लेने से पेट के गुड बैक्टीरिया खत्म हो सकते हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या पेट के बैक्टीरिया हमारी भूख और क्रेविंग्स को कंट्रोल कर सकते हैं? जवाब- हां, गट माइक्रोबायोम भूख और फूड चॉइस को प्रभावित कर सकते हैं। इसे ऐसे समझिए- सवाल- क्या स्ट्रेस भी गट हेल्थ को प्रभावित करता है? जवाब- हां, स्ट्रेस और गट हेल्थ का दो-तरफा रिलेशन है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- फूड के अलावा कौन-सी आदतें गट हेल्थ को खराब करती हैं? जवाब- हमारी रोजमर्रा की कई आदतें भी गट माइक्रोबायोम के संतुलन को प्रभावित करती हैं। खासकर- यही वजह है कि अच्छी गट हेल्थ के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल भी जरूरी है। सवाल- पेट को हेल्दी रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें? जवाब- आंतों में रहने वाले बैक्टीरिया एक नियमित दिनचर्या पसंद करते हैं। इसलिए खाने, सोने और एक्सरसाइज का समय जितना रेगुलर होगा, गट उतना बेहतर काम करेगा। ग्राफिक में देखिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें- सवाल- कब गट से जुड़ी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? जवाब- गैस, कब्ज या पेट खराब होने जैसी समस्याएं कभी-कभी होना सामान्य है। लेकिन अगर ये शिकायतें लंबे समय तक बनी रहें या बार-बार लौटकर आएं, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा- ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। ……………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- मुफ्त की धूप के 7 हेल्थ बेनिफिट्स: उम्र बढ़ेगी, बुढ़ापा देर से आएगा, डॉक्टर से समझें मॉर्निंग सनलाइट के 7 रूल्स हममें से ज्यादातर लोग सुबह आंख खुलते ही सनलाइट की बजाय मोबाइल स्क्रीन देखते हैं। दिन की शुरुआत नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया से होती है। जबकि सुबह की धूप बॉडी क्लॉक को सेट करने और शरीर को पूरे दिन के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है। पूरी खबर पढ़िए…
रिलेशनशिप एडवाइज- सास-ससुर बिना बताए आ जाते हैं:हफ्तों रुकते हैं, हसबैंड कुछ नहीं कहते, हमारी प्राइवेसी नहीं बची, कैसे डील करूं?
सवाल- मैं और मेरे हसबैंड, दोनों जॉब करते हैं। मेरा ससुराल गोरखपुर में है और हम लखनऊ में रहते हैं। प्रॉब्लम ये है कि मेरे ससुराल वाले अक्सर बिना बताए हमारे घर आ जाते हैं और हफ्तों रुकते हैं। उन्हें लगता है कि बेटा-बहू का घर उनका अपना घर है। इसलिए पूछने की जरूरत नहीं। कई बार मैं ऑफिस से थकी लौटती हूं और घर में मेहमान होते हैं। हसबैंड अपने घरवालों को कुछ बोल नहीं पाते। मैं सास-ससुर का अपमान नहीं करना चाहती, लेकिन लग रहा है कि मेरी प्राइवेसी और सुविधा की कोई अहमियत नहीं रह गई है। मैं हसबैंड को ये बात कैसे समझाऊं कि उन्हें ये न लगे कि मैं उनकी फैमिली के खिलाफ हूं? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी परेशानी का मतलब यह नहीं है कि आप सास-ससुर का सम्मान नहीं करतीं। आप सिर्फ इतना चाहती हैं कि आपके समय, सुविधा और निजी जिंदगी का भी ख्याल रखा जाए। आप और आपके पति दोनों नौकरी करते हैं। ऐसे में घर सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि दिनभर की भागदौड़ के बाद आराम करने की जगह भी होता है। जब कोई बिना बताए आ जाता है और कई दिनों तक रुकता है, तो दिनचर्या बदल जाती है। जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और अपने लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। मुझे लगता है कि आपकी तकलीफ सिर्फ अचानक मेहमान आने की नहीं, बल्कि बार-बार अपनी जरूरतों को पीछे रखने की है। इसलिए आपकी भावनाएं पूरी तरह जायज हैं। बात कहने में हिचक क्यों होती है? इस स्थिति में कई महिलाएं एक और दुविधा से गुजरती हैं। वे अपनी बात कहें तो डर लगता है कि कहीं लोग उन्हें स्वार्थी या परिवार के खिलाफ न समझ लें। वहीं चुप रहें तो मन में नाराजगी और थकान जमा होने लगती है। पति से कैसे करें बात आपके पति के लिए भी यह स्थिति उतनी आसान नहीं है। कई लोगों के लिए माता-पिता से सीमाएं तय करने वाली बातें करना भावनात्मक रूप से मुश्किल होता है। उन्हें डर रहता है कि कहीं माता-पिता को यह न लगे कि शादी के बाद बेटा बदल गया है या अब उनकी अहमियत कम हो गई है। मनोविज्ञान में इसे ‘लॉयल्टी कॉन्फ्लिक्ट’ कहते हैं। यानी व्यक्ति एक साथ दो अहम रिश्ते निभा रहा होता है- वह दोनों को खुश रखना चाहता है। लेकिन कई बार उसे लगता है कि एक की बात मानने पर दूसरा नाराज हो सकता है। यही दुविधा उसे खुलकर बात करने से रोकती है। इसलिए बातचीत की शुरुआत आरोप से नहीं, अपने अनुभव से करें। यह कहने से बचें- ‘तुम्हारे घरवाले हमेशा मेरे सिर पर आ जाते हैं।’ ऐसी बात सुनते ही ज्यादातर लोग समस्या की बजाय अपने परिवार का बचाव करने लगते हैं। इसके बजाय कहें- "मुझे आपके माता-पिता के आने से परेशानी नहीं है। लेकिन जब वे बिना बताए आते हैं, तो ऑफिस और घर की जिम्मेदारियां संभालना मेरे लिए मुश्किल हो जाता है। मैं चाहती हूं कि हम दोनों मिलकर इसका कोई तरीका निकालें।" याद रखें, लड़ाई लोगों से नहीं, स्थिति से है। ‘हम बनाम समस्या’ की लड़ाई रिश्तों पर लिखी चर्चित किताब ‘द सेवन प्रिंसिपल्स फॉर मेकिंग मैरिज वर्क’ में मनोवैज्ञानिक जॉन गॉटमैन लिखते हैं कि सफल दंपती समस्याओं को "तुम बनाम मैं" की तरह नहीं, बल्कि "हम बनाम समस्या" की तरह देखते हैं। यही सोच यहां भी मदद कर सकती है। आपसी समझ से निकलेगा रास्ता अक्सर ऐसी स्थितियों में समस्या लोगों से ज्यादा अनकही अपेक्षाओं की होती है। जब अपेक्षाएं स्पष्ट हो जाती हैं, तो तनाव भी कम होने लगता है। पति-पत्नी मिलकर कुछ बातों पर पहले से सहमति बना सकते हैं- याद रखें, सीमाएं तय करना दूरी बनाना नहीं है। जब परिवार में अपेक्षाएं स्पष्ट होती हैं और जिम्मेदारियां साझा होती हैं, तो रिश्तों में सहजता बनी रहती है और मन में शिकायतें भी कम जमा होती हैं। पति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण ऐसी स्थितियों में यह उतना ही महत्वपूर्ण होता है कि बात कौन कह रहा है, जितना कि क्या कहा जा रहा है। अक्सर माता-पिता अपने बेटे की बात को ज्यादा सहजता से स्वीकार करते हैं, इसलिए यह बातचीत पति के जरिए होना बेहतर रहता है। वे कह सकते हैं- "मम्मी-पापा, आपके आने से हमें हमेशा खुशी होती है। बस अगर पहले बता दिया करें, तो हम अपने काम और समय को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएंगे।" ध्यान दीजिए, यहां किसी की गलती नहीं निकाली जा रही। बात सिर्फ इतनी है कि अपनापन बना रहे और सभी की दिनचर्या का भी सम्मान हो। अगर पति फिर भी कुछ न कहें तो? अगर बातचीत के बाद भी कोई बदलाव न दिखे, तो एक बार फिर शांत तरीके से अपनी बात रखें। ध्यान रखें, आप उनसे किसी एक रिश्ते को चुनने के लिए नहीं कह रही हैं। आप सिर्फ इतना चाहती हैं कि आपके घर से जुड़े फैसलों में आपकी राय और सुविधा को भी महत्व मिले। कई बार तकलीफ समस्या से नहीं, बल्कि अपनी बात अनसुनी रह जाने से होती है। इसलिए अपनी असुविधा को दबाने के बजाय उस पर खुलकर बात करना जरूरी है। अंतिम बात कई बार परिवारों में टकराव बुरी नीयत से नहीं, बल्कि अलग-अलग अपेक्षाओं की वजह से पैदा होता है। ऐसे में सवाल यह नहीं कि कौन सही है और कौन गलत। सवाल यह है कि क्या सभी लोग एक-दूसरे की जरूरतों को समझने और उन्हें जगह देने के लिए तैयार हैं। रिश्ते वहीं सबसे सहज रहते हैं, जहां अपनापन और सम्मान दोनों साथ बने रहें। ……………………….. ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ……………………… ये खबर भी पढ़ें… रिलेशनशिप एडवाइज- मैं बेवकूफ था, गुस्से में ब्रेकअप कर लिया:अब गलती का एहसास है, एक्स से फिर दोस्ती करना चाहता हूं, क्या करूं सात साल गुजरने के बाद किसी पुराने रिश्ते को याद करने में कुछ भी असामान्य नहीं है। समय बीतने के साथ इंसान अपने पुराने व्यवहार को नए नजरिए से देख पाता है। उसे अपनी गलतियां भी समझ आती हैं। इसे ही हम ग्रोथ कहते हैं। जीवन में ग्रोथ होना बहुत अच्छी बात है। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। आपको अपनी गलतियों का एहसास हो गया है और अब आप चाहते हैं कि गुजररा वक्त फिर से लौट आए। पूरी खबर पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 









