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Ram Temple Donation Row: राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा अपडेट, राज्य सरकार नहीं सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी चोरी पर SIT की रिपोर्ट!

अयोध्या में स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपेगी।

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Bhadli Navami 2026: भड़ली नवमी होती है सकारात्मक ऊर्जा एवं सौभाग्य का प्रतीक

आज भड़ली नवमी है, यह व्रत आषाढ़ मास की नवमी तिथि को रखा जाता है। इसे भड़रिया नवमी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि को अक्षय तृतीया के समान पुण्य फलदायी माना जाता है। इस तिथि पर किए गए शुभ कार्यों में सफलता, समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है। 

जानें भड़ली नवमी के बारे में रोचक बातें 

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी कहा जाता है। भड़ली नवमी को भड़रिया नवमी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में भड़रिया नवमी का विशेष महत्व बताया गया है। भड़ली नवमी को अक्षय तृतीया के समान ही पुण्य फलदायी माना गया है।  भड़ली नवमी का दिन इसलिए भी खास होता है क्योंकि इसके ठीक दो दिन बाद यानी 25 जुलाई 2026 से 'चातुर्मास' शुरू हो जाते हैं। इसके बाद चार महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। 

इसे भी पढ़ें: Bhadli Navami 2026: भडल्या नवमी पर बिना मुहूर्त देखे किए जाते हैं शुभ काम, गुरु अस्त होने के बाद भी होंगे विवाह

जानें भड़ली नवमी का शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 22 जुलाई को सुबह में 5 बजकर 16 मिनट पर होगा। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 23 जुलाई को सुबह 7 बजकर 3 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए भड़ली नवमी का व्रत 22 जुलाई को रखा जाएगा।

हिन्दू धर्म में भड़ली नवमी का है खास महत्व

धर्म शास्त्रों के अनुसार जिस लोगों के विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं निकलता है उनका विवाह इस दिन किया सकता है। भड़ली नवमी के बाद चातुमास लग जाता है जिसके बाद अगले 4-5 महीनें तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते है। ऐसा कहा जा सकता है कोई भी मांगलिक कार्य करने के लिए यह तीथि शुभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद जागृत होते हैं। तभी मांगलिक कार्य किए जाते है।

इसलिए खास है भड़ली नवमी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। 'अबूझ मुहूर्त' का अर्थ ऐसे शुभ समय से है, जिसमें पूरे दिन में कभी भी किसी भी मुहूर्त में शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इस दिन ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग अपने महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत इसी तिथि पर करना पसंद करते हैं। देवशयनी एकादशी से पहले आने वाली भडल्या नवमी को अबुझ मुहूर्त माना जाता है यानी इस दिन विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नए काम की शुरुआत जैसे शुभ काम बिना मुहूर्त देखे किया जा सकते हैं। अभी आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि चल रही है, इस नवरात्रि की अंतिम भड़ली नवमी रहती है। इस नवमी पर गणेश जी, शिव जी और देवी दुर्गा की विशेष पूजा करनी चाहिए। जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, छाता, जूते-चप्पल, कपड़े का दान करना चाहिए।

भड़ली नवमी से जुड़ी पौराणिक कथा भी है खास 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भड़ली नवमी का सम्बन्ध जगत के पालनकर्ता श्री विष्णु से है। भड़ली नवमी के ठीक दो दिन बाद यानी देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। सनातन धर्म में, विवाह जैसे मांगलिक कार्य भगवान विष्णु की साक्षी और आशीर्वाद के बिना पूर्ण नहीं माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी के बाद चातुर्मास शुरू होने पर देवता सो जाते हैं और अगले 4 महीनों तक (देवउठनी एकादशी तक) कोई भी शादी-ब्याह या शुभ संस्कार संपन्न नहीं होते हैं। भड़ली नवमी वह आखिरी दिन होती है, जब भगवान विष्णु के शयन में जाने से पहले भक्त उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन गुप्त नवरात्र का समापन भी होता है, इसलिए देवी दुर्गा और भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। यह दिन उन लोगों के लिए विशेष वरदान समान है जिनके विवाह में कोई अड़चन आ रही हो या कोई अन्य शुभ मुहूर्त न मिल रहा हो। 

शुभ कार्यों के लिए इसलिए चुनी जाती है भड़ली नवमी 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भड़ली नवमी सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और मंगल का प्रतीक मानी जाती है। इसलिए इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय का शुभारंभ, संपत्ति खरीदना, धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य करना शुभ माना जाता है। पंडितों के अनुसार इस दिन शुरू किए गए कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और सफलता की संभावना बढ़ती है।

भड़ली नवमी पर रखें इन बातों का ध्यान 

पंडितों के अनुसार भड़ली नवमी का दिन बहुत खास होता है इसलिए इस दिन भगवान विष्‍णु और देवी दुर्गा की पूजा जरूरी करें। इस दिन परिवार में या दूर की रिश्‍तेदारी में भी शोक हो जाए, तो कोई भी शुभ काम टाल दें। भड़ली नवमी को अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है, फिर भी किसी बड़े धार्मिक या पारिवारिक आयोजन से पहले अपनी पारिवारिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं पर जरूर विचार कर लें।

- प्रज्ञा पाण्डेय

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  Sports

Jos Buttler ने T20 में रचा इतिहास, बोले - मेरा रिकॉर्ड Vaibhav Sooryavanshi ही तोड़ेंगे!

बुधवार को मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की मेन्स हंड्रेड में वेल्श फायर पर जीत के दौरान, इंग्लैंड के बल्लेबाज़ जोस बटलर ने वेस्टइंडीज़ के दिग्गज खिलाड़ी कीरोन पोलार्ड को पीछे छोड़कर T20 क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि पर बात करते हुए बटलर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह रिकॉर्ड एक दिन ज़रूर टूटेगा और उन्होंने भारत के 15 साल के प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी को वह खिलाड़ी बताया जो भविष्य में उनके इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकते हैं।
 

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क्रिकइन्फो के अनुसार, बटलर ने स्काई स्पोर्ट्स से कहा कि यह सोचना वाकई बहुत बढ़िया है कि आपके नाम सबसे ज़्यादा T20 रन हैं। कोई न कोई एक दिन इसे ज़रूर तोड़ेगा — और शायद वह वैभव सूर्यवंशी हों — लेकिन यह गर्व का पल है। इंग्लैंड के इस स्टार खिलाड़ी ने 'द हंड्रेड' टूर्नामेंट में मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की वेल्श फायर पर नौ विकेट से जीत के दौरान यह उपलब्धि हासिल की। ​​उन्होंने सिर्फ़ 20 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए। इस पारी के साथ ही 522 T20 मैचों में उनके कुल रनों की संख्या 14,833 हो गई, जिससे वह पोलार्ड (14,803) और क्रिस गेल (14,562) से आगे निकल गए।

वहीं, सिर्फ़ 15 साल की उम्र में सूर्यवंशी ने T20I क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ तीन मैचों में 151 रन बनाए और अपना पहला 'प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़' अवॉर्ड जीता, जबकि भारत ने सीरीज़ 3-0 से अपने नाम की। इससे पहले इस साल, उन्होंने ICC मेन्स अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप में अपनी ज़बरदस्त क्षमता दिखाई थी, जहाँ उन्होंने कुल 439 रन बनाए और 'प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट' चुने गए।
 

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चैलेंज लीग में कुल 12 टीमें हैं जिन्हें छह-छह टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया है। क्वालिफिकेशन साइकल के दौरान हर ग्रुप तीन राउंड-रॉबिन टूर्नामेंट खेलता है। हर ग्रुप की टॉप दो टीमें प्लेऑफ़ के लिए क्वालिफ़ाई करती हैं। बटलर ने कहा कि जब वे MI लंदन के खिलाफ खेल रहे थे, तो वे पोलार्ड से आगे निकलना पसंद करते, जबकि पोलार्ड हेड कोच के तौर पर उन्हें देख रहे थे। साथ ही, उन्होंने T20 के महान खिलाड़ियों की सूची में शामिल होने पर गर्व भी जताया।
 
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Thu, 06 Aug 2026 13:17:16 +0530

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