वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति से की मुलाकात, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने पर हुई चर्चा
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और स्विट्जरलैंड ने निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अपने सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया है। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को नई दिल्ली में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से मुलाकात की और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं के बीच भारत और स्विट्जरलैंड के साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में विशेष रूप से द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर जारी बातचीत को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। दोनों देशों का मानना है कि इस समझौते से निवेश प्रवाह बढ़ेगा और आर्थिक साझेदारी को नई गति मिलेगी।
इससे पहले, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन के बीच भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। दोनों पक्षों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में लंबे समय से जारी सहयोग को अधिक संरचित और दीर्घकालिक स्वरूप देने पर सहमति जताई।
बैठक में उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को रणनीतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से अंतरविषयक और मिशन मोड दृष्टिकोण अपना रहा है। उन्होंने बताया कि कई राष्ट्रीय कार्यक्रम विभिन्न मंत्रालयों और विषयों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को भारत एक अलग विषय के रूप में नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक के रूप में देख रहा है जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनेक क्षेत्रों में बदलाव ला सकती है। इसके अलावा उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी, वैक्सीन विकास, जीनोम सीक्वेंसिंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और गहरे समुद्री अनुसंधान में भारत की प्रगति की जानकारी भी साझा की।
बैठक के दौरान ब्लू इकोनॉमी और बायो-इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देना चाहता है।
उन्होंने इंडो-स्विस रिसर्च फ्रेमवर्क (आईएसआरएफ) और इंडो-स्विस जॉइंट साइंटिफिक बोर्ड की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक आधार मिलेगा।
वहीं, स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत को तेजी से उभरती हुई वैश्विक अनुसंधान एवं विकास शक्ति के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि उनका देश शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्रों में भारत का दीर्घकालिक साझेदार बनना चाहता है।
उन्होंने बताया कि स्विट्जरलैंड ने इस साझेदारी को और मजबूत करने के लिए 45 मिलियन स्विस फ्रैंक (सीएचएफ) की अतिरिक्त राशि निर्धारित की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत भी इसी प्रकार की प्रतिबद्धता दिखाएगा, जिससे दोनों देशों के संयुक्त अनुसंधान ढांचे को और मजबूती मिल सकेगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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MSME के लिए मोदी सरकार ने जारी किया 10 हजार करोड़ रुपये का फंड, ITLA के गठन को दी मंजूरी
Cabinet Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार, 6 अक्टूबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और छोटे-मध्यम उद्योगों से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए. सरकार ने इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (ITLA) के गठन को मंजूरी दी है. इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों यानी SME के लिए ₹10,000 करोड़ के ग्रोथ फंड को भी मंजूरी दी गई.
ITLA क्या काम करेगी?
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, ITLA को ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की एकीकृत योजना, रिसर्च, प्रोजेक्ट मूल्यांकन, निगरानी और डेटा विश्लेषण के लिए प्रमुख संस्था के तौर पर तैयार किया जाएगा. इसका मकसद अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है. यह अथॉरिटी सड़क, रेलवे, बंदरगाह, शिपिंग, एयरपोर्ट, इनलैंड वाटरवे और शहरी परिवहन जैसे अलग-अलग माध्यमों को एक साथ जोड़कर भविष्य की जरूरतों के हिसाब से योजना बनाने में मदद करेगी.
ITLA कम से कम 10 साल के लिए नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान तैयार करेगी. इसके अलावा ₹500 करोड़ या उससे ज्यादा लागत वाली केंद्र सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन और निगरानी भी इसके काम का हिस्सा होगा.
बनेगा नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी
ITLA के जरिए एक नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी भी तैयार की जाएगी. इसमें FASTag, GSTN ई-वे बिल, वाहन, GPS और शहरी ट्रैफिक सिस्टम जैसे अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे माल और यात्रियों की आवाजाही को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी.
MSME के लिए ₹10,000 करोड़ का फंड
कैबिनेट ने SME Growth Fund के लिए सरकार की ओर से ₹10,000 करोड़ देने को भी मंजूरी दी है. इस फंड का उद्देश्य ऐसे छोटे और मध्यम उद्योगों को लंबे समय के लिए इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराना है, जिनमें कारोबार को बढ़ाने और बड़े स्तर पर पहुंचने की क्षमता है.
फंड का बड़ा हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों के लिए रखा जाएगा. इसके अलावा सर्विस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से जुड़े उद्योगों को भी इससे फायदा मिल सकता है. Tier-II और Tier-III शहरों के औद्योगिक क्लस्टर में काम करने वाले SMEs को भी फंड के दायरे में रखा गया है. सरकार के मुताबिक, इस फंड से कंपनियों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने, विदेशी बाजारों में विस्तार करने और ग्लोबल वैल्यू चेन से जुड़ने में मदद मिल सकती है.
PM मोदी के 25 साल पूरे होने पर बधाई प्रस्ताव
कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे करने पर बधाई प्रस्ताव भी पारित किया गया. मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और मई 2014 से प्रधानमंत्री के पद पर हैं.
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