केरल एम्स विवाद: केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और राज्य मंत्री मुरलीधरन के बीच तीखी बहस
तिरुवनंतपुरम, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। केरल में अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एम्स) के लिए एक दशक से चल रहा इंतजार एक बार फिर राजनीतिक टकराव में बदल गया है। केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन के बीच इस बात पर तीखी बहस छिड़ गई है कि मंजूरी मिलने पर यह संस्थान कहां बनाया जाना चाहिए।
केरल से भाजपा के पहले लोकसभा विजेता और त्रिशूर से सांसद गोपी ने अपने गृह क्षेत्र का समर्थन करते हुए जोर देकर कहा है कि त्रिशूर एम्स के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।
मुरलीधरन ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्थान के मामले में खुले दिमाग से विचार कर रही है।
उन्होंने कहा कि सुरेश गोपी खुद दिखा दें कि जमीन कहां है।
इस बहस ने केरल में एक दशक से अधिक समय से चल रहे इस मुद्दे को एक नया राजनीतिक रंग दे दिया है।
एम्स की मांग ओमान चांडी की पिछली सरकार के समय से चली आ रही है, जिसने 2014 में केंद्र सरकार के अनुरोध पर चार संभावित स्थानों की पहचान की थी।
इसके बाद केंद्र ने केरल सरकार से उपयुक्त स्थलों की पहचान करने को कहा, लेकिन देश के अन्य हिस्सों में नए एम्स की घोषणा होने के कारण केरल सरकार को इस परियोजना में जगह नहीं मिली।
केंद्रीय बजट की पूर्व संध्या पर हर साल यह मुद्दा और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि केरल सरकार बार-बार उम्मीद करती है कि अंततः इस परियोजना को केंद्र सरकार की योजनाओं में जगह मिलेगी, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है।
यह ताजा टकराव राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर हो रहा है।
त्रिशूर गोपी का राजनीतिक गढ़ है और वह निर्वाचन क्षेत्र है जिसे उन्होंने 2024 के चुनावों में कांग्रेस से छीन लिया था। इस दौरान मुरलीधरन तीसरे स्थान पर रहे थे।
मुरलीधरन पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण के पुत्र हैं।
गोपी ने स्वयं करुणाकरण को अपना राजनीतिक गुरु बताया है और करुणाकरण परिवार के साथ अपने घनिष्ठ संबंधों का जिक्र किया है।
वहीं, दूसरी ओर मुरलीधरन ने कहा है कि केरल सरकार किसी विशेष जिले पर जोर नहीं दे रही है और कोट्टायम में वेल्लूर न्यूजप्रिंट फैक्ट्री की जमीन पर भी विचार किया जाएगा।
गोपी ने कहा है कि हालांकि अलाप्पुझा आर्थिक दृष्टि से अधिक उपयुक्त हो सकता है, लेकिन त्रिशूर इस तरह के संस्थान के लिए आवश्यक शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है।
दो दिग्गज राजनेताओं के स्थान को लेकर खुलेआम टकराव के साथ, केरल में एक दशक से लंबित एम्स के इंतजार ने एक नया राजनीतिक आयाम ले लिया है।
--आईएएनएस
एमएस/
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डबरा में पानी की कमी से धान की फसल पर संकट, किसान मोर्चा ने उठाई D-15 नहर में पानी छोड़ने की मांग, SDM को सौंपा ज्ञापन
डबरा: ग्वालियर के डबरा क्षेत्र में खेतों में लगी धान की फसल पर अब पानी का संकट मंडराने लगा है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है और फसल बचाने की चुनौती सामने खड़ी हो गई है। इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा ग्वालियर ग्रामीण जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह ओलख ने किसानों के साथ मिलकर एसडीएम, डबरा को ज्ञापन सौंपा है। साथ ही प्रशासन से तत्काल D-15 नहर में पानी छोड़े जाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के किसानों की धान की फसल इस समय पानी की कमी के कारण सूखने की स्थिति में है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है। धान की फसल के लिए वर्तमान समय में पर्याप्त सिंचाई जल की आवश्यकता पढ़ रही है क्योंकि धान की फसल को इस समय का पानी लगा अति आवश्यक है, अगर D-15 नहर में पानी छोड़ा जाता है तो किसान उस पानी से धान के खेतों में सिंचाई कर सकते हैं।
किसान मोर्चा ने D-15 नहर में पानी छोड़ने की मांग उठाई
किसान मोर्चा ने किसान हित में तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए D-15 नहर में पानी छोड़े जाने की व्यवस्था करने की मांग की है। मोर्चा ने कहा कि किसानों के सामने यह समस्या हर साल बनी रहती है लेकिन इस बार किसानों को परेशानी न हो, इसके लिए किसान मोर्चा किसान भाइयों के साथ खड़ा है और उनके हित में हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं।
वहीं, किसान मोर्चा ने प्रशासन से मांग की है कि किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुये बैरक हेड से D-15 नहर में तत्काल ही पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाए , जिससे किसानों को समय पर सिंचाई के लिये आवश्यक पानी मिल सके और फसल को सूखने से बचाया जा सके। ज्ञापन के अनुसार खेरी-पाराशर, चौमूं सुनवाई, अकबई, ठेठयापुरा, राजीपुर, खड़बई, महाराजपुर, चितावनी एवं सलवाई सहित आसपास के गांवों के किसानों को इस पानी का लाभ मिलेगा।
7 दिन बाद नहर में छोड़ा जाएगा पानी: ज्योति शर्मा
इस संबंध में सिंचाई विभाग की अधिकारी ज्योति शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने इस बार पहले ही किसानों से अधिक मात्रा में धान की फसल नहीं लगाने की अपील की थी। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में धान की रोपाई होने के कारण पानी की समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि करीब 7 दिन बाद D-15 नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा।
वहीं, क्षेत्र में मॉनिटरिंग को लेकर अधिकारी ने बताया कि विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है। लेकिन अभी 5 से 6 कर्मचारी समय-समय पर क्षेत्र में पहुंचकर नहर और पानी की व्यवस्था की निगरानी करते हैं। उन्होंने बताया कि.. कुछ किसान जगह-जगह कुलावे बनाकर अपने खेतों में पानी ले लेते हैं। खेत में पर्याप्त पानी पहुंचने के बाद भी कई किसान कुलावे खुले छोड़ देते हैं जिससे पानी की समस्या और बढ़ जाती है। साथ ही.. अधिकारी ने किसानों से भी सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि यदि किसान पानी की जरूरत पूरी होने के बाद कुलावे बंद कर दें, तो इस तरह की परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डबरा से अरुण रजक की रिपोर्ट
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