चंपावत को आदर्श जिला बनाने की दिशा में तेज हुआ काम, विकास के साथ विरासत संरक्षण पर भी जोर
Champawat News: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत को आदर्श जिला बनाने के राज्य सरकार के संकल्प को एक बार फिर दोहराया है. टनकपुर के गांधी मैदान में नवयुवक रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित दशहरा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर ऐसा जिला बनाया जा रहा है, जो विकास, पर्यटन, संस्कृति और जनसुविधाओं के मामले में नई मिसाल कायम करे. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बुनियादी ढांचे का विस्तार करना नहीं, बल्कि चंपावत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हुए स्थानीय लोगों के लिए बेहतर अवसर तैयार करना भी है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चंपावत समेत पूरे उत्तराखंड को विकास की नई गति देने के लिए लगातार काम कर रही है. चंपावत को आदर्श जिला बनाने की दिशा में अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जा रही हैं. सड़क, पुल, पर्यटन, धार्मिक स्थलों के विकास और जनसुविधाओं को मजबूत करने के साथ जिले की पहचान को नई ऊंचाई देने पर भी जोर है.
विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से भी है. इसलिए विकास की योजनाओं में विरासत संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है. अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन के महाकाल कॉरिडोर जैसे कार्यों से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली है.
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इसी क्रम में उत्तराखंड में भी केदारनाथ के विकास के बाद बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान पर तेजी से काम किया जा रहा है. सरकार का प्रयास है कि धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हों. चंपावत में भी धार्मिक और पर्यटन स्थलों के विकास को आदर्श जिला बनाने की योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है.
पूर्णागिरि मेले को सालभर चलाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने टनकपुर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मां पूर्णागिरि धाम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि मेले को वर्षभर संचालित करने के लिए स्थायी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं. इसके तहत पथ प्रकाश की स्थायी व्यवस्था पर काम किया जा रहा है. बाटनागाड़ में पुल का निर्माण भी जारी है.
इन परियोजनाओं से श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के साथ ही टनकपुर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. वर्षभर धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों, होटल-होमस्टे संचालकों, परिवहन कारोबारियों और अन्य छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिल सकता है.
हरिद्वार कुंभ से लेकर चंपावत तक पर्यटन पर फोकस
मुख्यमंत्री ने अगले वर्ष हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेले को भव्य और दिव्य तरीके से आयोजित करने की बात कही. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बड़े धार्मिक आयोजनों के माध्यम से उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है.
चंपावत के संदर्भ में यह रणनीति खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि जिले में धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं. पूर्णागिरि धाम के अलावा स्थानीय धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक क्षेत्रों को बेहतर सुविधाओं से जोड़कर जिले को पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है. सरकार का जोर इसी क्षमता को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने पर है.
जनहित और सुशासन को भी विकास का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास के साथ जनहित और सुशासन के मोर्चे पर भी लगातार फैसले ले रही है. नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून जैसे कदमों का उद्देश्य राज्य में बेहतर कानून-व्यवस्था और सुरक्षित वातावरण तैयार करना है. सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है.
उन्होंने कहा कि आदर्श जिले की परिकल्पना केवल सड़क और भवनों तक सीमित नहीं है. इसके लिए बेहतर प्रशासन, सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्यटन सुविधाएं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी जरूरी हैं. इसी व्यापक सोच के साथ चंपावत को आदर्श जिला बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है.
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