CEC विरोध पर CM Devendra Fadnavis बोले, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की है साजिश
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को दिल्ली में हुए एक विरोध प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने इसे संवैधानिक संस्थाओं को बेकार दिखाने की कोशिश बताया और आरोप लगाया कि बेहद कट्टरपंथी वामपंथी तत्व लोकतंत्र को खत्म करना चाहते हैं। फडणवीस ने कहा कि यह लोगों के मन में यह धारणा बनाने की कोशिश है कि संविधान से बनी संस्थाएं बेकार हैं। यह कार्यक्रम संविधान को नकारने के इरादे से किया जा रहा है। यह बेहद कट्टरपंथी वामपंथी तत्वों की लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश है।
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मुंबई कांग्रेस की ओर से पुलिस पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने इन दावों को पूरी तरह से झूठा बताया और मुंबई पुलिस की कार्यशैली का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस पेशेवर है और वे किसी को नहीं रोकते। उन्होंने आगे कहा कि छात्रों ने इस मामले पर उनसे फोन पर बात की थी और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) के पदाधिकारियों पर आंदोलन को लंबा खींचने की कोशिश करने का आरोप लगाया। फडणवीस ने कहा कि छात्रों की समस्याएं जायज़ हैं और सरकार उन्हें हल करने को लेकर सकारात्मक है। अगर कोई अपने नेता के लिए राजनीति कर रहा है, तो उन्हें राजनीतिक रूप से जवाब दिया जाएगा।
चल रही बातचीत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम पुणे में किसी सहमति पर नहीं पहुँच सके, इसलिए आगे और बातचीत की जाएगी। दिल्ली में हो रहा यह विरोध प्रदर्शन, विपक्षी दलों के "लोकतंत्र बचाओ" अभियान का हिस्सा है। इन दलों के नेता चुनाव आयोग को लेकर अपनी चिंताएं ज़ाहिर करने के लिए प्रदर्शन और जन-सभाएं आयोजित कर रहे हैं। इस मार्च में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के कई दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया है।
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यह विवाद 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी - ने 'सेंसिटिव आइडेंटिफिकेशन रजिस्टर' (SIR) प्रक्रिया के दौरान 14 आपत्तियां उठाई थीं। वहीं, भारत के चुनाव आयोग का कहना है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
Delhi Court ने 17 प्रदर्शनकारियों को दी Bail, पुलिस हिरासत में यातना के आरोपों पर मांगी रिपोर्ट
नयी दिल्ली, छह अक्टूबर यहां की एक अदालत ने सोमवार को गिरफ्तार किए गए दो प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए “हिरासत में यातना” के आरोपों पर दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी, जबकि गैरकानूनी जमावड़े और सार्वजनिक स्थान को बाधित करने के आरोपी 17 लोगों को यह कहते हुए जमानत दे दी कि वे युवा हैं और उनका पूरा करियर उनके आगे है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर हमला करना गंभीर चिंता का विषय है, जिसकी शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में अनुमति नहीं दी जा सकती। सोमवार रात ड्यूटी न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने यह आदेश पारित किया।
संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन करने के दौरान 17 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था। वे एसआईआर विवाद को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से कथित तौर पर छेड़छाड़ करने वाले एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग कर रहे थे। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) के अनुसार, आरोपियों को इसलिए गिरफ्तार किया गया था क्योंकि वे एक गैरकानूनी सभा का हिस्सा थे और उन्होंने उस सार्वजनिक स्थान को बाधित या अवरुद्ध किया था, जहां निषेधाज्ञा लागू थी, और इसके अलावा, जब उन्हें हिरासत में लिया जा रहा था, तो उन्होंने महिला पुलिस अधिकारी सहित पुलिस अधिकारियों के साथ हाथापाई की।
पुलिस ने आरोप लगाया कि उन्होंने उस बस की खिड़की के शीशे और पीछे के शीशे भी तोड़ दिए, जिसमें उन्हें बैठाया जा रहा था, और उन्होंने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया। अदालत ने कहा कि आरोपियों के वकील ने दलील दी कि कथित तौर पर प्रदर्शन कर रहे करीब 50 लोगों में से केवल 17 को गिरफ्तार किया गया था और कथित घटना की कोई सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई। अदालत ने कहा, “यह भी तर्क दिया गया है कि आरोपी व्यक्ति बहुत कम उम्र के हैं और उनमें से अधिकांश छात्र हैं जो असहमति व्यक्त करने और विरोध करने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर रहे थे।” अपने आदेश में अदालत ने कहा, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि आरोपियों के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
आईओ द्वारा पेश किए गए मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी को कथित तौर पर चोटें आई हैं।” उसने कहा कि किसी भी व्यक्ति को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है, ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर हमला करना गंभीर चिंता का विषय है, जिसकी शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में अनुमति नहीं दी जा सकती। उसने कहा कि आरोपी युवा हैं और ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वे आदतन अपराधी हैं। अदालत ने कहा, “उनका पूरा करियर उनके सामने है।
इसलिए, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, आरोपियों को 15,000 रुपये के जमानत बांड और इतनी ही राशि की एक जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत दी जाती है।” अदालत ने कहा कि पूछताछ के दौरान, धर्मेंद्र और समर्थ नाम के आरोपियों ने बताया कि हिरासत में लिए जाने के बाद संसद मार्ग थाने के अंदर उनकी पिटाई की गई, जिसके कारण उन्हें चोटें आईं, जबकि शेख यूनुस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान धक्का दिए जाने से उन्हें चोटें आईं। उसने कहा, “चूंकि आरोपी धर्मेंद्र और समर्थ ने हिरासत में यातना दिए जाने के आरोप लगाए हैं, इसलिए इस संबंध में डीसीपी नई दिल्ली से रिपोर्ट मंगाई जाए। थाना संसद मार्ग की संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित रखी जाए।
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