UP News: सीएम का बड़ा ऐलान, लखनऊ में बनेगा ग्रीन तटबंध; पीड़ितों को 4 लाख की मदद और पक्का मकान
Flood in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को हर साल बरसात के दिनों में बाढ़ के पानी से जूझना पड़ता है. गोमती नदी के उफान पर आने से आसपास के कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं. इस गंभीर परेशानी को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ी योजना को हरी झंडी दे दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद बाढ़ से घिरे इलाकों का दौरा किया और घोषणा की कि फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक करीब 40 किलोमीटर लंबा एक सुरक्षा तटबंध बनाया जाएगा. इस बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है और जैसे ही इस साल का मानसून खत्म होगा, तुरंत धन जारी करके जमीन पर काम शुरू करा दिया जाएगा. इस बांध के बनने से लखनऊ के साथ ही आसपास के कई गांवों को जलभराव से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाएगा.
ग्रीन कॉरिडोर की तरह बनेगी पक्की सड़क
यह तटबंध केवल मिट्टी का ढेर नहीं होगा, बल्कि इसे आधुनिक ग्रीन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा. तटबंध के ऊपरी हिस्से पर एक पक्की और चौड़ी सड़क बनाई जाएगी, जिससे लोगों को आने-जाने के लिए एक नया और सीधा रास्ता मिल सकेगा. मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के बड़े अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे गोमती नदी के पूरे किनारे का तकनीकी सर्वे करें और एक मजबूत प्रस्ताव बनाकर शासन को सौंपें.
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी ने आज लखनऊ के बक्शी का तालाब तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हरदा में बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की तथा राहत सामग्री वितरित की।
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) October 5, 2026
इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने लखनऊ के कुछ क्षेत्रों में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से उत्पन्न जलभराव एवं बाढ़ की… pic.twitter.com/GDaCwS6bQ7
तटबंध बनने के बाद बारिश का पानी रिहायशी बस्तियों में न भरे, इसके लिए खास इंतजाम किए जाएंगे. आबादी वाले इलाकों में भारी क्षमता वाले पंपिंग सेट लगाए जाएंगे. जब भी नदी का पानी ऊपर चढ़ेगा, तो मोहल्लों में जमा होने वाले बरसाती पानी को इन पंपों के जरिए तुरंत बाहर निकाल दिया जाएगा, जिससे घरों में सीलन और जलभराव का खतरा नहीं रहेगा.
हवाई सर्वे के बाद पीड़ितों के बीच पहुंचे सीएम
मुख्यमंत्री ने फैजुल्लागंज से लेकर नैमिष तक के पूरे बाढ़ प्रभावित इलाके का हवाई सर्वे करके हालात का जायजा लिया. इसके बाद वे सीधे बीकेटी इलाके में पहुंचे और पानी से घिरे परिवारों से मिले. मुख्यमंत्री ने वहां खड़े होकर खुद लोगों को राहत सामग्री बांटी और उनका हालचाल जाना. उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि जिन घरों में पानी घुस चुका है, उन सभी परिवारों को तुरंत राहत शिविरों में पहुंचाया जाए.
इन शिविरों को पास के स्कूलों और मैरिज हॉल में बनाया गया है. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि शिविरों में रहने वाले हर व्यक्ति को सुबह और शाम दोनों समय ताजा और गर्म खाना मिलना चाहिए. बच्चों के पीने के लिए दूध, गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार और मवेशियों के लिए सूखे भूसे और चोकर की पूरी व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं.
मुआवजे और पक्के मकान का किया ऐलान
संकट के इस समय में सरकार ने पीड़ितों को हर तरह की मदद देने का भरोसा दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के पानी में डूबने से या आकाशीय बिजली गिरने से अगर किसी व्यक्ति की जान जाती है, तो उसके परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. जिन गरीब परिवारों के कच्चे मकान पानी के बहाव में पूरी तरह टूट गए हैं, उन्हें सरकारी आवास योजना के तहत नया पक्का मकान बना कर दिया जाएगा.
इसके अलावा जिन किसानों के खेतों में पानी भरने से फसलें चौपट हो गई हैं, उनके नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे शुरू कर दिया गया है. रिपोर्ट मिलते ही किसानों के बैंक खातों में मुआवजा भेजा जाएगा. मवेशियों की हानि होने पर भी पशुपालकों को तय नियमों के आधार पर भरपाई की जाएगी.
खाली घरों की पहरेदारी और स्वास्थ्य सुविधाएं
जब लोग अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में जाते हैं, तो उन्हें चोरी का डर सताता है. इस बात को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने खाली पड़े मकानों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. उन्होंने निर्देश दिए हैं कि पुलिस बल, होमगार्ड, पीआरडी जवान और चौकीदार रात के समय इन बस्तियों में लगातार गश्त करेंगे, ताकि किसी का सामान चोरी न हो सके.
दूसरी तरफ बीमारियों से बचाव के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं. पानी वाले इलाकों में जहरीले कीड़े और सांप निकलने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम दवा का पूरा प्रबंध रखने को कहा गया है. आवारा जानवरों के काटने पर लगने वाले इंजेक्शन भी पर्याप्त संख्या में मौजूद रहेंगे. प्रभावित बस्तियों में डॉक्टरों और पशु चिकित्सकों की टीमें लगातार कैंप लगाकर जांच करेंगी.
राहत किट में मिलेगा हर जरूरी सामान
बाढ़ से घिरे परिवारों को रोजमर्रा के जीवन में किसी तरह की तंगी न हो, इसके लिए प्रशासन 26 जरूरी सामानों से भरी एक खास किट बांट रहा है. इस राहत किट में 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 10 किलो आलू, 2 किलो अरहर की दाल, 1 लीटर तेल, नमक, मसाले और पानी से बचाव के लिए बरसाती शीट शामिल है. शिविरों में अगर बिजली की सप्लाई बाधित होती है, तो रोशनी के लिए पेट्रोमैक्स और सोलर लाइट की व्यवस्था की गई है.
राजधानी के हालात पर देश के रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह भी नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री से फोन पर बात करके पूरी स्थिति की जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर और पड़ोसी देश नेपाल में भारी बारिश होने के कारण गोमती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है. राज्य के 50 से अधिक जिलों में भारी बरसात हुई है, लेकिन प्रशासन मुस्तैदी से लोगों की मदद में जुटा हुआ है.
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नवी मुंबई एयरपोर्ट ने 'ताजएसएटीएस' के साथ इनफ्लाइट कैटरिंग क्षमता का किया विस्तार
मुंबई, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनएमआईए) ने मंगलवार को कहा कि एविएशन कैटरिंग कंपनी ताजएसएटीएस के साथ चल रही उसकी इन-फ्लाइट कैटरिंग सुविधा विंटर 2026-27 शेड्यूल (जो 25 अक्टूबर से 27 मार्च 2027 तक चलेगा) से पहले एयरलाइंस के बढ़ते ऑपरेशन्स में मदद करने के लिए तैयार है।
एयरपोर्ट परिसर में मौजूद यह फ्लाइट किचन अभी रोजाना 40 से ज्यादा उड़ानों के लिए खाना तैयार करता है और इसमें हर दिन 7,500 तक मील बनाने की क्षमता है।
इसके अलावा, एयरलाइन और यात्रियों की संख्या बढ़ने पर इस सुविधा को बढ़ाकर रोजाना 15,000 मील तैयार करने योग्य बनाया जा सकता है।
नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चीफ एयरपोर्ट ऑफिसर, सुभाष मुरिकेंचरी ने कहा, जैसे-जैसे एनएमआईए अपना एयरलाइन नेटवर्क बढ़ा रहा है, यह जरूरी है कि हमारा सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी उसके साथ-साथ बढ़े।
उन्होंने कहा, ताजएसएटीएस का फ्लाइट किचन एयरलाइंस को बढ़ती मांग को पूरा करने की सुविधा देता है और यात्रियों के लिए खाने-पीने के अनुभव को बेहतर बनाता है।
इस सुविधा में प्रोडक्शन इंफ्रास्ट्रक्चर, रेफ्रिजरेशन सिस्टम और ऑपरेशनल प्रोसेस शामिल हैं, जिन्हें एयरलाइन के शेड्यूल और मांग में होने वाले बदलावों के हिसाब से काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
एयरपोर्ट परिसर में इसकी लोकेशन का मकसद उड़ान भरने वाले विमानों तक खाना पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
एनएमएआई ने कहा कि यह सुविधा भारत से आने-जाने वाली इंटरनेशनल एयरलाइंस के लिए भोजन की व्यवस्था की सुविधा देती है, जिससे उन्हें उड़ान भरने की जगह के पास ही कैटरिंग का एक और विकल्प मिल जाता है।
एयरपोर्ट के अनुसार, भारत से उड़ान भरने वाली लगभग 40 प्रतिशत इंटरनेशनल एयरलाइंस अपने खुद के फ्लाइट किचन से कैटरिंग पर निर्भर रहती हैं। एनएमएआई का इन-फ्लाइट कैटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इसी जरूरत को पूरा करने के साथ-साथ घरेलू एयरलाइंस की कैटरिंग जरूरतों को भी ध्यान में रखकर बनाया गया है।
एनएमएआई में कैटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को घरेलू एयरलाइंस की जरूरतों के साथ-साथ इन जरूरतों को भी पूरा करने के लिए विकसित किया गया है।
इसके अलावा, यह सुविधा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की एयरलाइंस के लिए कैटरिंग सेवाएं देती है और इसमें खाने-पीने की कई तरह की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है, जैसे कि स्पेशल मील, एलर्जी-सेंसिटिव मेन्यू और हलाल मील।
एनएमएआई ने कहा कि किचन फूड सेफ्टी और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का पालन करता है, जिसमें हैजर्ड एनालिसिस एंड क्रिटिकल कंट्रोल पॉइंट्स (एचएसीसीपी), आईएसओ 22000 और भारत के फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी के नियम शामिल हैं।
ताजएसएटीएस चार दशकों से ज्यादा समय से एविएशन कैटरिंग सेक्टर में काम कर रही है और यह मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी फ्लाइट किचन चलाती है।
एयरपोर्ट ने कहा कि यह सुविधा पहले से ही चालू है और इसे एयरलाइन कनेक्टिविटी और यात्रियों की संख्या में भविष्य की बढ़ोतरी के हिसाब से बढ़ाया जा सकता है।
--आईएएनएस
एबीएस
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