फ्लाईदुबई हमले की साजिश से हटा पर्दा! शिन बेट की पूछताछ में क्या सामने आया?
flydubai की दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में हुए कथित हमले की जांत अब एक नए और गंबीर मोड़ पर पहुंच गई है. इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के पूछताछ अधिकारी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंच गए हैं. वे फ्लाइट के ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी से पूछताछ में शामिल हो रहे हैं.
अल-हम्मामी पर विमान के कप्तान पर हमला करने औऱ विमान को संभावित रूप से क्रैश कराने की कोशिश करने का आरोप है. जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, पूछताछ में अल-हम्मामी ने कथित तौर पर बताया कि उसके मन में इजरायल जाने वाली फ्लाइट को क्रैश करने का विचार फ्लाईदुबई में नौकरी
मिलने से पहले ही आ चुका था. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने यह योजना अकेले बनाई थी या उसे किसी संगठन या व्यक्ति से मदद मिली थी.
गाजा का बदला लेने की बात क्यों कही?
इजरायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पूछताछ के दौरान अल-हम्मामी ने कथित तौर पर अपने मकसद को गाजा युद्ध से जोड़ा. रिपोर्टों में दावा है कि उसने जांचकर्ताओं से कहा कि वह गाजा का बदला लेना चाहता था और वह 'शहीद' होकर मरना चाहता था.
अगर जांच में यह बयान पुष्ट होता है, तो इससे घटना की कथित विचारधारा और मकसद को समझने में जांच एजेंसियों को अहम सुराग मिल सकता है. हालांकि किसी आरोपी के पूछताछ में दिए गए बयान को अंतिम तथ्य मानने से पहले उसकी स्वतंत्र पुष्टि और दूसरे सबूतों से मिलान जूरूरी होता है.
यही वजह है कि जांच एजेंसियां फिलहाल उसके मोबाइल फोन, यात्राओं, संपर्कों और ऑनलाइन गतिविधियों समेत कई पहलुओं की जांच कर रही हैं.
नौकरी मिलने से पहले ही बनाई थी योजना?
‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने दावा किया कि अल-हम्मामी ने यूएई के जांचकर्ताओं को बताया कि उसने फ्लाईदुबई में नौकरी हासिल करने से पहले ही बेन गुरियन एयरपोर्ट को निशाना बनाने की योजना पर विचार किया था.
वहीं एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, उसने इस साल की शुरुआत में तेल अवीव के लिए उड़ान भी भरी थी और कथित तौर पर उस विमान को हाईजैक करके क्रैश करने के विकल्प पर विचार किया था, लेकिन उस समय उसने ऐसा नहीं किया. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उस यात्रा के दौरान उसने क्या जानकारी जुटाई थी और क्या उसी दौरान किसी हमले की तैयारी की गई थी.
फ्लाईदुबई को ही क्यों चुना?
जांच सु जुड़े सूत्रों के मुताबिक अल-हम्मामी ने तेल अवीव जाने वाली एयरलाइंस के बारे में जानकारी जुटाई और इसके बाद फ्लाईदुबई में नौकरी के लिए आवेदन किया. इजरायली अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया है कि उसने पिछले कुछ वर्षों में ऐसे देशों की छोटी यात्राएं की थीं जिन्हें इजरायल का विरोधी माना जाता है.
अब जांच का एक महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या ये यात्राएं महज व्यक्तिगत यात्राएं थीं या इनके पीछे कोई दूसरा मकसद था. इजरायली सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यह भी जांचा जा रहा है कि इन यात्राओं के दौरान किसी संगठन या वय्क्ति ने उसे प्रभावित, भर्ती या निर्देशित तो नहीं किया.
विमान में आखिर हुआ क्या था?
30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट दुबई से तेल अवीव जा रही थी. उड़ान के दौरान कॉकपिट में कप्तान स्मित मच्छर पर को-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने हमला किया. UAE अधिकारियों ने घटना को आतंकवादी हमले के प्रयास के रूप में बताया है.
रिपोर्टों के मुताबिक, हमले के दौरान विमान तेजी से नीचे जाने लगा. कप्तान ने गंभीर खतरे के बीच कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों को स्थिति का पता चला और उन्होंने हमलावर को काबू करने में मदद की. बाद में विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया.
इस घटना के दौरान यात्रियों और चालक दल की भूमिका भी जांच का हिस्सा है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यूएई की पूछताछ में फ्लाइट के अन्य क्रू सदस्यों की कथित संलिप्तता को लेकर फिलहाल कोई सबूत नहीं मिला है.
शिन बेट की एंट्री क्यों महत्वपूर्ण?
इस मामले में शिन बेट के अधिकारियों का यूएई जाकर पूछताछ में शामिल होना जांच की गंभीरता को दर्शाता है. इजरायल यह पता लगाना चाहता है कि हमला किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत कट्टरपंथी सोच का परिणाम था या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क था.
इजरायली अधिकारी कथित तौर पर यह भी जांच रहे हैं कि अल-हम्मामी किसी संगठन से जुड़ा था या नहीं. जांच का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू ईरान से संभावित संबंधों की जांच भी है, हालांकि अभी तक किसी संगठन या देश की जिम्मेदारी स्थापित नहीं हुई है.
मोबाइल फोन और विदेश यात्राओं से खुलेंगे राज?
जांच एजेंसियों के लिए अल-हम्मामी का मोबाइल फोन अहम सबूत माना जा रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक यूएई और सऊदी अरब में जांचकर्ता उसके फोन में मौजूद डेटा और संपर्कों की जांच कर रहे हैं. इसका मकसद हमले से पहले की उसकी गतिविधियों, संपर्कों और संभावित नेटवर्क का पता लगाना है.
इसके अलावा उसकी विदेश यात्राओं की भी जांच हो रही है. इजरायली अधिकारियों के अनुसार, इन यात्राओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या किसी जगह उसे कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया गया या किसी संगठन ने उससे संपर्क किया.
एयरलाइन सुरक्षा पर भी उठे सवाल
इस घटना ने सिर्फ आतंकवाद और खुफिया जांच से जुड़े सवाल नहीं उठाए हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सबसे पड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति पर कथित तौर पर पहले से सुरक्षा संबंधी चिंताएं थीं, वह अंतरराष्ट्रीय यात्री विमान के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा.
जांच में अब यह भी देखा जा रहा है कि अलग-अलग देशों और एयरलाइन अधिकारियों के बीच सुरक्षा जानकारी साझा करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी. एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना ने कई स्तरों पर सुरक्षा और इंटेलिजेंस से जुड़ी संभावित चूकों की ओर ध्यान खींचा है.
क्या अकेले किया था हमला?
फिलहाल यह सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल है. जांच एजेंसियां दो संभावनाओं पर काम कर रही हैं पहली, अल-हम्मामी ने खुद कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित होकर हमला करने की योजना बनाई; दूसरी, उसे किसी व्यक्ति या संगठन से निर्देश या मदद मिली.
इजरायली अधिकारियों ने भी अभी किसी एक निष्कर्ष को अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया है. इसलिए ईरान, किसी आतंकवादी संगठन या किसी दूसरे नेटवर्क से संबंध के बारे में सामने आ रही अटकलों को जांच पूरी होने तक दावे के रूप में नहीं देखा जा सकता.
हमले से ज्यादा बड़ी है इसके पीछे की साजिश
फ्लाईदुबई FZ1073 की घटना में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कॉकपिट में हमला कैसे हुआ, बल्कि यह है कि कथित हमले की योजना कितने समय पहले बनाई गई थी और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था.
अगर जांच में यह पुष्टि होती है कि हम्मामी ने नौकरी पाने से पहले ही विमान को निशाना बनाने की योजना बनाई थी, तो यह एयरलाइन भर्ती, सुरक्षा जांच और अंतरराष्ट्रीय खुफिया जानकारी साझा करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा.
फिलहाल शिन बेट, UAE और अन्य एजेंसियों की जांच का केंद्र हम्मामी की विचारधारा, संपर्कों, विदेश यात्राओं और डिजिटल गतिविधियों पर है. इस जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि FZ1073 की घटना एक व्यक्ति की साजिश थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था.
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भारत के सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियां सितंबर में तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर, 55.2 रहा PMI
भारत के सर्विसेज सेक्टर में गतिविधियां सितंबर में बीते महीनों में सबसे तेजी से बढ़ी हैं. इसकी वजह मजबूत घरेलू मांग और नए ऑर्डर्स का तेजी से बढ़ना था. यह जानकारी मंगलवार को जारी हुए एचएसबीसी इंडिया पीएमआई डेटा में दी गई.
एसएंडपी ग्लोबल की ओर से संकलित किए गए एचएसबीसी इंडिया पीएमआई डेटा में बताया गया कि सितंबर में पीएमआई बढ़कर 55.2 पर पहुंच गया है, जो कि अगस्त में 54.1 पर था. यह जून के बाद पीएमआई का सबसे उच्चतम स्तर है.
सितंबर में नए कारोबार में दर्ज की गई तेजी
सितंबर में नए बिजनेस में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और यह पिछले तीन महीनों में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा है. इस दौरान कंपनियों ने डिजिटल समाधान, खाने-पीने की चीजों, इंश्योरेंस, लोन, सॉफ्टवेयर, ट्रांसपोर्टेशन और टूर-एंड-ट्रैवल के लिए ज्यादा मांग देखी. एचएसबीसी इंडिया ने कहा कि फाइनेंस, इंश्योरेंस और कंज्यूमर सर्विस सेक्टर की बिक्री में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई.
घरेलू मांगे बढ़ने से सर्विस सेक्टर में आई तेजी
एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, "पीएमआई सर्वेक्षण से पता चलता है कि घरेलू मांग बढ़ने की वजह से भारत का सर्विस सेक्टर लगातार बेहतर हो रहा है." उन्होंने कहा, "साथ ही, निर्यात का कारोबार भी बढ़ता रहा, हालांकि ग्रोथ की रफ्तार धीमी हो गई." उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर में इनपुट लागत का दबाव कम होने से सर्विस प्रोवाइडर्स को अपनी बिक्री की कीमतें बढ़ाने की जरूरत कम पड़ी.
हालांकि, सर्वेक्षण से अनुसार सर्विसेज पीएमआई का औसत जुलाई-सितंबर तिमाही में पिछली तिमाही के मुकाबले कम रहा और इसने मार्च 2022 को खत्म हुई तिमाही के बाद से अपना सबसे कमजोर तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया.
वैश्विक मांग में भी आई तेजी
इसके अलावा, भारतीय सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग में भी सुधार हुआ. कंपनियों ने जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, यूके और अमेरिका से बेहतर कारोबार की सूचना दी. सितंबर में नए निर्यात बिजनेस में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ गई. हालांकि, बेहतर ऑर्डर बुक और पाइपलाइन में मौजूद प्रोजेक्ट्स ने सर्विस कंपनियों द्वारा और भर्तियां करने में मदद की.
रोजगार में ठीक-ठाक रफ्तार से बढ़ोतरी हुई, हालांकि नौकरी पैदा करने की दर अगस्त के मुकाबले थोड़ी कम हुई. इनपुट लागत का दबाव भी कम हुआ, क्योंकि इनपुट कीमतों में महंगाई नवंबर 2025 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई. इसके अलावा, एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स -- जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों शामिल हैं -- अगस्त के 54.3 से बढ़कर सितंबर में 55.9 हो गया है.
स्रोत- आईएएनएस
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