जरूरत की खबर- 1200 किलो मिलावटी काली मिर्च जब्त:मैदा, गोंद और तेल से बन रहा ब्लैक पेपर, घर पर ऐसे करें असली–नकली की पहचान
काली मिर्च को ‘मसालों का राजा’ कहा जाता है। गरम मसाले से लेकर सूप, सलाद, काढ़े और घरेलू नुस्खों तक, इसका इस्तेमाल लगभग हर भारतीय रसोई में होता है। लेकिन क्या हो, जब आपकी रसोई में मौजूद काली मिर्च असली ही न हो? हाल ही में गाजियाबाद में फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की छापेमारी में करीब 13 लाख रुपए से ज्यादा की नकली काली मिर्च जब्त की गई। जांच में सामने आया कि घटिया क्वालिटी वाले दानों को मैदा, गोंद और रिफाइंड तेल से बनाया जा रहा था। छापेमारी के दौरान 1200 किलो मिलावटी काली मिर्च और 975 किलो तैयार माल बरामद हुआ। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में मिलावटी काली मिर्च पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली डॉ. उमेश कुमार, फूड एनालिस्ट, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश सवाल- भारत में काली मिर्च की खेती कहां होती है? जवाब- भारत में काली मिर्च की सबसे ज्यादा पैदावार केरल में होती है। इसलिए इसे ‘काली मिर्च का केंद्र’ माना जाता है। इसके अलावा कर्नाटक और तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में भी इसकी खेती की जाती है। सवाल- काली मिर्च खेत से रसोई तक पहुंचने में कितने चरणों से गुजरती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- काली मिर्च में मिलावट क्यों की जाती है? जवाब- इसका मुख्य कारण ज्यादा मुनाफा कमाना है। काली मिर्च की कीमत अन्य मसालों की तुलना में ज्यादा होती है। ऐसे में मिलावटखोर इसमें सस्ते पदार्थ मिलाकर उसका वजन बढ़ा देते हैं। इससे कम लागत में ज्यादा माल तैयार हो जाता है। कई बार दानों को बेहतर क्वालिटी का दिखाने के लिए उन पर कोटिंग भी की जाती है। सवाल- काली मिर्च में किस तरह की मिलावट हो सकती है? जवाब- इसमें सबसे ज्यादा मिलावट पपीते के सूखे बीजों की होती है, क्योंकि उनका आकार और रंग काली मिर्च से मिलता-जुलता होता है। काली मिर्च को अपेक्षाकृत बड़ा, भारी और चमकदार दिखाने के लिए उस पर अलग-अलग पदार्थों की कोटिंग भी की जाती है। काली मिर्च में किन चीजों की मिलावट हो सकती है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- इन चीजों की मिलावट सेहत के लिए कितनी खतरनाक है? जवाब- मिलावटी काली मिर्च से एलर्जी और फूड पॉइजनिंग जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या पिसी हुई काली मिर्च भी मिलावटी हो सकती है? जवाब- हां, कई मामलों में इसकी पहचान करना साबुत काली मिर्च की तुलना में ज्यादा मुश्किल होता है। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या ऑर्गेनिक लिखकर बेचे जा रहे काली मिर्च में भी मिलावट हो सकती है? जवाब- हां, यह अपने-आप में प्रोडक्ट के पूरी तरह शुद्ध होने की गारंटी नहीं है। खेती के बाद प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, डिस्ट्रीब्यूशन के किसी भी स्टेज में मिलावट हो सकती है। सवाल- अच्छी क्वालिटी की काली मिर्च की पहचान क्या है? जवाब- इसकी पहचान काली मिर्च की बनावट, वजन, सुगंध और स्वाद से की जा सकती है। इसके दाने आमतौर पर सख्त और समान आकार के होते हैं। ग्राफिक में असली काली मिर्च पहचान के संकेत देखिए- सवाल- घर पर असली-नकली काली मिर्च कैसे पहचानें? जवाब- कुछ आसान तरीकों से घर पर इसकी पहचान की जा सकती है। इसे नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए- वाटर टेस्ट फ्रेगरेंस टेस्ट दबाकर देखें पीसकर चेक करें रंग चेक करें सवाल- अगर गलती से मिलावटी काली मिर्च खा ली तो क्या करें? जवाब- इसे खाने के बाद पेट दर्द, गैस, उल्टी, दस्त, एलर्जी, गले में जलन या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही संभव हो तो उसका पैकेट या सैंपल सेफ रखें। सवाल- काली मिर्च खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- सही प्रोडक्ट चुनने के लिए उसकी क्वालिटी, सोर्स और पैकेजिंग पर ध्यान देना जरूरी है। काली मिर्च खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें, ग्राफिक में देखिए- सवाल- मसाले खरीदते समय लेबल पर कौन-सी 5 चीजें जरूर देखनी चाहिए? जवाब- पैक्ड मसाले खरीदते समय केवल ब्रांड का नाम देखना काफी नहीं है। लेबल पर दी गई जानकारी प्रोडक्ट की क्वालिटी, सुरक्षा और ट्रेसबिलिटी के बारे में अहम संकेत देती है। इसलिए खरीदने से पहले कुछ जरूरी बातें जरूर चेक करें, जैसेकि- सवाल- काली मिर्च के अलावा आपकी रसोई में कौन-से 5 मसालों में सबसे ज्यादा मिलावट की आशंका है? जवाब- काली मिर्च ही नहीं, रसोई में इस्तेमाल होने वाले कई अन्य मसालों में भी मिलावट की आशंका रहती है, जैसेकि- ध्यान रहे, पाउडर मसालों में मिलावट पहचानना साबुत मसालों की तुलना में ज्यादा मुश्किल होता है। इसलिए साबुत मसाले खरीदकर घर पर पीसना बेहतर ऑप्शन है। सवाल- मसालों में मिलावट का संदेह हो तो कहां शिकायत करें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- ……………………… ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………….. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- पेपर कप में चाय-कॉफी, सूप न पिएं:उसमें छिपे माइक्रोप्लास्टिक से 7 गंभीर हेल्थ रिस्क, कांच या स्टील का कप ही बेहतर फर्ज करिए, आप किसी दुकान पर चाय पीने के लिए रुकते हैं और आपको गर्म चाय डिस्पोजेबल पेपर कप में दी जाती है। आपको लगता है कि पेपर कप तो सेफ और इकोफ्रेंडली है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसे कप में गर्म चाय-कॉफी पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? ये खबर भी पढ़ें…
फिजिकल हेल्थ- पेट दर्द को सिर्फ गैस न समझें:ये ‘पैंक्रियाटाइटिस’ हो सकता है, डॉक्टर से जानें इसका कारण, लक्षण, बचाव व सावधानियां
पेट दर्द, मतली और उल्टी को लोग अक्सर गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार इसके पीछे ‘पैंक्रियाटाइटिस’ जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। यह पैंक्रियाज (अग्न्याशय) में होने वाली सूजन है। पैंक्रियाज भोजन को पचाने और ब्लड शुगर कंट्रोल रखने में अहम भूमिका निभाता है। जब इसमें सूजन आ जाती है, तो कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज’ (GBD) के मुताबिक, भारत में पैंक्रियाटाइटिस के मरीजों की संख्या 1990 में करीब 2.3 लाख थी, जो 2021 में बढ़कर 5.2 लाख हो गई। यानी 31 साल में मामलों में करीब 126% की बढ़ोतरी हुई है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में पैंक्रियाटाइटिस पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट– डॉ. अशोक कुमार, सीनियर कंसल्टेंट, HOD, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपर स्पेशलिटी, हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- पैंक्रियाज क्या है? इसका शरीर में क्या काम है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस क्या होता है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस कितने प्रकार का होता है? जवाब- पैंक्रियाटाइटिस मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- 1. एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस 2. क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस सवाल- पैंक्रियाटाइटिस क्यों होता हैं? जवाब- इसकी सबसे कॉमन वजहें गॉलस्टोन (पित्ताशय की पथरी) और ज्यादा शराब पीना हैं। गॉलस्टोन पैंक्रियाटिक डक्ट को ब्लॉक कर सकती है। इससे पाचन एंजाइम बाहर नहीं निकल पाते और पैंक्रियाज में ही एक्टिव होकर उसे नुकसान पहुंचाने लगते हैं। ग्राफिक में पैंक्रियाटाइटिस के सभी कारण देखिए- सवाल- इसके लिए लोगों की लाइफस्टाइल और आदतें कितनी जिम्मेदार हैं? जवाब- कई मामलों में खराब लाइफस्टाइल इसका रिस्क बढ़ाती है, जैसेकि- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- इसका शुरुआती लक्षण पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द है। यह दर्द अचानक शुरू हो सकता है और कई बार पीठ तक फैल सकता है। ग्राफिक में सभी शुरूआती लक्षण देखिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस के गंभीर लक्षण क्या हैं? जवाब- पैंक्रियाज में लगातार सूजन बढ़ने पर कुछ ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जो मेडिकल इमरजेंसी होते हैं। ग्राफिक में पैंक्रियाटाइटिस के गंभीर लक्षण देखिए- सवाल- क्या पैंक्रियाटाइटिस एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है? जवाब- हां, अगर सूजन ज्यादा बढ़ जाए तो कई तरह के कॉम्पलिकेशंस हो सकते हैं- सवाल- किन लोगों को पैंक्रियाटाइटिस का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों में इसका रिस्क दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस का डाइग्नोसिस कैसे होता है? जवाब- डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर शारीरिक जांच करते हैं। पैंक्रियाटाइटिस की आशंका होने पर पुष्टि के लिए कुछ ब्लड और इमेजिंग टेस्ट कराते हैं। बीमारी की गंभीरता समझने के लिए अन्य जांचें भी करा सकते हैं, जैसेकि- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस का इलाज कैसे होता है? जवाब- यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी कितनी गंभीर है और इसकी वजह क्या है। सवाल- इस बीमारी में कौन-सी चीजें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए और क्या खा सकते हैं? जवाब- इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- पैंक्रियाटाइटिस का डायबिटीज से क्या संबंध है? जवाब- अगर सूजन लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार हो तो पैंक्रियाज की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इससे शरीर में ब्लड शुगर का संतुलन बिगड़ता है और डायबिटीज का रिस्क बढ़ता है। सवाल- पैंक्रियाटाइटिस से बचाव के लिए क्या करें? जवाब- कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर पैंक्रियाटाइटिस का रिस्क काफी हद तक कम कर सकते हैं, जैसेकि- पैंक्रियाटाइटिस से जुड़े कॉमन मिथ और फैक्ट मिथ 1- हर पेट दर्द पैंक्रियाटाइटिस हो सकता है। फैक्ट- पेट दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जैसे गैस, अपच, अल्सर या गॉलस्टोन। इसलिए सिर्फ पेट दर्द के आधार पर पैंक्रियाटाइटिस की पहचान नहीं की जा सकती। मिथ 2- सिर्फ शराब पीने वालों को ही पैंक्रियाटाइटिस होता है। फैक्ट - गॉलस्टोन, हाई ट्राइग्लिसराइड्स, कुछ दवाएं, संक्रमण और जेनेटिक फैक्टर्स भी पैंक्रियाटाइटिस का कारण बन सकते हैं। मिथ 3- दुबले-पतले लोगों को पैंक्रियाटाइटिस नहीं हो सकता। फैक्ट- यह बीमारी किसी भी उम्र और वजन के व्यक्ति को हो सकती है। मिथ 4- पैंक्रियाटाइटिस हमेशा अचानक और तेज दर्द के साथ ही होता है। फैक्ट- एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस में दर्द अचानक हो सकता है। लेकिन क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस में लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं और दर्द बार-बार या लंबे समय तक बना रह सकता है। मिथ 5- घरेलू नुस्खों से पैंक्रियाटाइटिस ठीक किया जा सकता है। फैक्ट- घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। ****************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ………………… फिजिकल हेल्थ- 14 करोड़ लोगों की किडनी खराब: सरकार की सिफारिश- साल में दो बार कराएं KFT, डॉक्टर से जानें हर जरूरी सवाल का जवाब पिछले दिनों स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) को लेकर एक सिफारिश की। इसमें 20 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को हर 6 महीने में KFT कराने की बात कही गई है। पूरी खबर पढ़ें..
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