मानसून का मौसम सुहावना होता है। इस मौसम में समोसे, चाय-पकौड़े और दूसरी तली-भुनी चीजों को खाने की इच्छा बढ़ जाती है। लेकिन रोजाना ऑफिस जाने वालों के लिए हर दिन ऑयली स्नैक्स खाना अच्छी आदत नहीं है। खासतौर पर बारिश के मौसम में बाहर का खाना साफ-सफाई और ताजगी के लिहाज से भी यह आदत भरोसेमंद नहीं होता है। ऐसे में ऑफिस बैग में घर से तैयार हेल्दी स्नैक्स ले जाना एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। वहीं यह स्नैक्स आपके पेट को लंबे समय तक भरा रखने में सहायता कर सकते हैं। बार-बार अनहेल्दी चीजों को खाने की इच्छा भी कम कर सकते हैं।
सबसे अच्छी बात यह है कि इन हेल्दी स्नैक्स को सुबह जल्दी तैयार किया जा सकता है और ऑफिस में आसानी से खाया जा सकता है। ऐसे में अगर आप भी मानसून में अपने खाने को थोड़ा हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो इन 5 आसान स्नैक्स आइडियाज को अपने ऑफिस मील प्लान में शामिल कर सकती हैं।
मानसून में ऑफिस ले जाने के लिए 5 हेल्दी स्नैक्स
रोस्टेड मखाना
मखाने को हल्के घी में रोस्ट करके इसमें चाट मसाला, काली मिर्च और अपनी पसंद के हल्के मसाले डालें। एयरटाइट डिब्बे में पैक करके इसको भी आप ऑफिस ले सकता हैं।
भुना चना
आप आसानी से भुना चना बैग में रखकर ऑफिस ले जा सकते हैं।
आप चाहें तो इसको सादा खा सकते हैं या फिर थोड़े से मसाले और सूखे नारियल को मिलाकर हेल्दी स्नैक बना सकते हैं।
वेजिटेबल सैंडविच
इसके अलावा वेजिटेबल सैंडविच भी अच्छा ऑप्शन है। ब्राउन या मल्टीग्रेन ब्रेड में खीरा, टमाटर, गाजर और पनीर जैसी चीजों को डालकर हेल्दी और पौष्टिक सैंडविच बना सकती हैं।
वेजिटेबल सैंडविच में ज्यादा सॉस डालने से बचना चाहिए।
स्प्राउट्स चाट
ऑफिस ले जाने के लिए मूंग स्प्राउट्स चाट भी बेस्ट ऑप्शन है। आप सुबह कम समय में टमाटर, प्याज, धनिया और नींबू मिलाकर चटपटी चाट बनाकर तैयार कर सकती हैं।
इसको ऑफिस पहुंचने पर ठंडी जगह पर रखना चाहिए और ताजगी बनाए रखें।
पोहा या उपमा
आप ऑफिस ले जाने के लिए पोहा या फिर वेजिटेबल उपमा भी अच्छा ऑप्शन है और यह सुबह जल्दी बन भी जाता है।
पोहा या फिर वेजिटेबल उपमा में आप मटर, सब्जियां और मूंगफली मिलाकर इसको अधिक स्वादिष्ट बना सकती हैं।
मानसून में स्नैक्स पैक करते समय रखें इन बातों का ध्यान
हमेशा घर का बना ताजा खाना ही पैक करें।
कमरे के तापमान पर खराब होने वाली चीजों को लंबे समय तक न रखें।
ऑफिस पहुंचने के बाद खाने को सही से स्टोर करें।
अधिक तला-भुना और मसालेदार खाने से बचें।
जरूरत के हिसाब से ही अपना पोर्शन रखें।
पर्याप्त पानी पीते रहें।
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सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ या नए कार्य के आरंभ से पहले भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा है। वे बुद्धि, विवेक, शुभारंभ और विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजनीय हैं। गणेश चतुर्थी भगवान श्रीगणेश के जन्मोत्सव का पावन पर्व है, जिसे पूरे भारत में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जाती है, पूजा-अर्चना होती है और भजन-कीर्तन के साथ उत्सव मनाया जाता है।
गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि
वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। हालांकि, पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने शहर या क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित करना चाहिए।
गणेश चतुर्थी का महत्व
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी नए कार्य को आरंभ करने से पहले उनका स्मरण करने की परंपरा है, ताकि कार्य में आने वाली बाधाएं दूर हों और सफलता प्राप्त हो। गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी पर्व है। सार्वजनिक गणेशोत्सव के माध्यम से लोग एक साथ आते हैं, पूजा करते हैं और विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।
गणेश चतुर्थी की पूजन विधि
गणेश चतुर्थी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर और पूजा स्थल की सफाई करने के बाद भगवान गणेश का स्मरण करते हुए पूजा और व्रत का संकल्प लें।
गणपति स्थापना
पूजा स्थल पर स्वच्छ चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा स्थापित करते समय श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश का ध्यान करें। प्रतिमा स्थापित करने के बाद गणपति का आवाहन कर पूजा प्रारंभ की जाती है।
पूजन सामग्री
पूजा में सामान्यतः निम्न सामग्री का उपयोग किया जाता है—
भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र
रोली और चंदन
अक्षत
दूर्वा घास
लाल या पीले पुष्प
धूप और दीप
फल
मोदक और लड्डू
नारियल
पान और सुपारी
पंचामृत एवं स्वच्छ जल
पूजा की विधि
सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद उन्हें जल से स्नान कराएं अथवा श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। फिर चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प और दूर्वा अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक और लड्डू का भोग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। उन्हें फल और अन्य सात्त्विक नैवेद्य भी अर्पित किया जा सकता है। पूजा के दौरान श्रद्धालु “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जप कर सकते हैं। इसके पश्चात गणेश चतुर्थी की व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है और अंत में भगवान गणेश की आरती की जाती है।
गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व
गणेश चतुर्थी के दिन कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं। व्रत की विधि और नियम परिवार तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोग दिनभर फलाहार करते हैं और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा, आत्मसंयम और सकारात्मक संकल्प की भावना रखना है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।
गणेश चतुर्थी की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने एक दिन स्नान करने से पहले अपने शरीर के उबटन से एक बालक की प्रतिमा बनाई और उसमें प्राण प्रतिष्ठित कर दिए। उन्होंने उस बालक को अपना पुत्र बनाया और उसे द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया। माता पार्वती ने बालक से कहा कि जब तक वे भीतर से बाहर न आएं, किसी को भी अंदर प्रवेश न करने देना।
कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे और भीतर जाने लगे। बालक गणेश ने उन्हें रोक दिया। भगवान शिव ने स्वयं को माता पार्वती का पति बताते हुए प्रवेश करने की अनुमति मांगी, लेकिन गणेश जी ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। इससे भगवान शिव और गणेश जी के बीच संघर्ष हुआ। पौराणिक कथा के अनुसार संघर्ष के दौरान भगवान शिव ने क्रोधित होकर गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब माता पार्वती को इस घटना का पता चला, तो वे अत्यंत दुखी और क्रोधित हुईं। उन्होंने भगवान शिव से अपने पुत्र को पुनः जीवित करने का आग्रह किया।
तब भगवान शिव ने अपने गणों को आदेश दिया कि वे उत्तर दिशा की ओर जाएं और जो भी प्राणी सबसे पहले दिखाई दे, उसका सिर लेकर आएं। गणों को एक हाथी दिखाई दिया और वे उसका सिर लेकर आए। भगवान शिव ने हाथी का सिर गणेश जी के शरीर पर स्थापित कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया। इसके बाद भगवान शिव ने उन्हें अपना पुत्र स्वीकार किया और वरदान दिया कि संसार में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। तभी से भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है।
गणेश चतुर्थी और चंद्र दर्शन की मान्यता
गणेश चतुर्थी से जुड़ी एक प्रचलित मान्यता के अनुसार इस दिन चंद्रमा के दर्शन से बचने की परंपरा भी है। इसके पीछे भगवान गणेश और चंद्रमा से संबंधित एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार एक बार भगवान गणेश को मोदक और अन्य प्रिय व्यंजनों का भोग लगाया गया। अधिक भोजन करने के बाद वे अपने वाहन मूषक पर सवार होकर जा रहे थे। मार्ग में मूषक के अचानक डर जाने से भगवान गणेश नीचे गिर पड़े। यह देखकर चंद्रमा हंसने लगा। चंद्रमा के इस उपहास से भगवान गणेश क्रोधित हुए और उन्होंने चंद्रमा को श्राप दिया कि जो व्यक्ति चतुर्थी के दिन उसका दर्शन करेगा, उस पर झूठे आरोप लग सकते हैं। बाद में चंद्रमा ने क्षमा मांगी, तब भगवान गणेश ने श्राप को पूर्ण रूप से समाप्त न करते हुए उसमें परिवर्तन कर दिया। इसी कारण कुछ परंपराओं में गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता प्रचलित है।
इस प्रकार, गणेश चतुर्थी आस्था, बुद्धि, शुभारंभ और सामाजिक एकता का पर्व है। भगवान गणेश का स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में बुद्धि, धैर्य, विवेक और विनम्रता का विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु भगवान गणेश की स्थापना और पूजा कर सुख, समृद्धि, बुद्धि और जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना कर सकते हैं।
- शुभा दुबे
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