SC बोला-जाति गणना केवल सेल्फ डिक्लेरेशन से नहीं होनी चाहिए:सत्यापन जरूरी; केंद्र और जनगणना अधिकारियों से इसपर विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि 2027 की जनगणना में जाति गणना सिर्फ सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय इसे किसी भरोसेमंद तरीके से या सबूत के आधार पर करने पर विचार करें। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने आकाश गोयल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि केवल बिना जांच वाले सर्टिफिकेट के आधार पर किसी को शामिल या बाहर नहीं किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने कहा कि वे जाति जनगणना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे सत्यापित सामग्री के आधार पर किया जाना जरूरी है। यह डेटा कई सालों तक योजनाओं, आरक्षण और नीतियों का आधार बनेगा, इसलिए यह सिर्फ आत्म-घोषणा पर आधारित नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की चार बड़ी बातें… वकील बोलीं- जनगणना का सीधा असर आरक्षण पर पड़ेगा सीनियर वकील मुक्ता गुप्ता ने कहा कि हम प्रमाण पत्र की पूरी जांच की बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन कुछ न कुछ सामग्री होनी चाहिए। आज स्थिति यह है कि सब कुछ आत्म-घोषणा पर आधारित है। बिना सत्यापन की आत्म-घोषणा बेहद खतरनाक हो सकती है, क्योंकि कोई भी कुछ भी बता सकता है। जनगणना 2027 पर करीब ₹13,500 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है और इसका सीधा असर देश की सभी कल्याणकारी योजनाओं और आरक्षण नीतियों पर पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि अगर इस प्रक्रिया में गलत या अप्रमाणित डेटा दर्ज हो गया, तो उसे बाद में सुधारना लगभग असंभव होगा। जनगणना 2027 के दूसरे चरण जाति जनगणना होगी गृह मंत्रालय ने 27 जनवरी को स्पष्ट किया था कि जनगणना 2027 के दूसरे चरण में जाति जनगणना भी की जाएगी। सरकार ने कहा कि देश भर में फरवरी 2027 से जनगणना शुरू हो जाएगी। गृह मंत्रालय ने कहा कि जनगणना 2027 के बारे में पूरी जानकारी 12 दिसंबर, 2025 को एक प्रेस नोट के माध्यम से जारी की गई थी। फिर भी, कुछ लोग जानबूझकर जनगणना-2027 और विशेष रूप से जाति जनगणना के बारे में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय ने आगे बताया कि जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके क्षेत्रों और गैर-समकालिक क्षेत्रों सितंबर, 2026 में ही इसे पूरा किया जाएगा। 22 जनवरी: सरकार ने सवालों की लिस्ट जारी की थी इससे पहले सरकार ने 22 जनवरी को जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों की लिस्ट जारी की थी। सरकार ने बताया था कि इसमें मकान, परिवार, वाहन से जुड़े सवाल हैं। जनगणना के दौरान परिवार के मुखिया को ये जानकारियां देनी होंगी। जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… गृह मंत्रालय बोला-जनगणना 2027 के दूसरे चरण जाति जनगणना होगी:कुछ लोग सिर्फ भ्रम फैला रहे; अखिलेश यादव ने कहा था- BJP जाति जनगणना नहीं कराएगी गृह मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जनगणना 2027 के दूसरे चरण में जाति जनगणना भी की जाएगी। सरकार ने कहा कि देश भर में फरवरी 2027 से जनगणना शुरू हो जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
राजस्थान की युवा साध्वी की मौत के मामले में क्यों उठ रहे हैं सवाल?
राजस्थान में बीते सप्ताह एक युवा साध्वी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. साध्वी के पिता का दावा है कि ‘एक कंपाउंडर के ग़लत इंजेक्शन देने से’ उनकी बेटी की मौत हुई है. इस मामले में एक एसआईटी का गठन हो चुका है.
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