1.70 करोड़ का फ्लैट, 7 लाख की पार्किंग और मिल रही 'हाइड्रोलिक' पार्किंग!, गौर अलारिस के खरीदार ने बिल्डर पर लगाया भेदभाव का आरोप
(रिपोर्ट: अक्षय पांडेय)
यमुना एक्सप्रेसवे के सेक्टर 22डी में बन रहे आवासीय प्रोजेक्ट 'गौर अलारिस (फेज-1)' के एक खरीदार ने बिल्डर गौरसंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर वादाखिलाफी और भेदभाव का आरोप लगाया है. खरीदार विजय माथुर का कहना है कि बुकिंग और आवंटन के वक्त उन्हें दो कार पार्किंग देने का भरोसा दिया गया था और इसके एवज में उनसे 7 लाख रुपये अतिरिक्त लिए गए, लेकिन अब जब बिल्डर-बायर एग्रीमेंट (BBA) सामने आया तो उसमें उन्हें सामान्य पार्किंग की जगह 'मैकेनिकल' यानी हाइड्रोलिक पार्किंग दी जा रही है. जबकि आवंटन से जुड़े जिन दस्तावेज़ों के आधार पर उन्होंने भुगतान किया, उनमें ऐसी किसी पार्किंग का कोई ज़िक्र नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
दस्तावेजों के मुताबिक, विजय माथुर ने गौर अलारिस (फेज-1) के 'गॉडियम' टावर में 19वीं मंजिल पर यूनिट नंबर 0419-सी बुक कराई. यह 3BHK + 3 टॉयलेट का फ्लैट है, जिसका सेलेबल एरिया 1565 वर्ग फुट और कार्पेट एरिया 834 वर्ग फुट दर्ज है. कॉस्ट शीट के अनुसार 8,499 रुपये प्रति वर्ग फुट की बेसिक दर, फ्लोर पीएलसी, कॉर्नर पीएलसी और लैंडस्केप चार्ज मिलाकर यूनिट की बेसिक कीमत 1 करोड़ 46 लाख 70 हजार 310 रुपये बनती है. इसमें अन्य चार्ज के तौर पर 13 लाख 70 हजार रुपये जोड़े गए हैं, जिसके बाद जीएसटी और पजेशन के समय लगने वाले मेंटेनेंस चार्ज समेत फ्लैट की कुल कीमत 1 करोड़ 70 लाख 3 हजार 678 रुपये तक पहुंच जाती है.
इसी कॉस्ट शीट में 'कार पार्किंग चार्जेज' के आगे गिनती के कॉलम में 2 दर्ज है और उसके सामने 7 लाख रुपये की रकम लिखी है. माथुर का कहना है कि यही वह रकम है जो उन्होंने दो पार्किंग के लिए फ्लैट की कीमत से अलग चुकाई. दस्तावेज़ पर 5 सितंबर 2026 की तारीख दर्ज है, जिसमें 10 लाख रुपये जमा कराने और बाकी बुकिंग रकम के तौर पर 6 लाख 84 हजार 233 रुपये का चेक सौंपने का ज़िक्र है.
'दस्तावेज में कहीं हाइड्रोलिक पार्किंग का ज़िक्र नहीं'
न्यूज नेशन से बातचीत में विजय माथुर ने कहा, "मैंने ईओआई देकर बुकिंग कराई थी और आवंटन के समय मुझे दो पार्किंग का कहा गया था, जो आवंटन पत्र में भी लिखा हुआ है. इसके लिए मैंने 7 लाख रुपये अतिरिक्त दिए. अब जब बिल्डर-बायर एग्रीमेंट आया है तो उसमें मैकेनिकल पार्किंग दी जा रही है, जिसे हाइड्रोलिक पार्किंग कहते हैं." उन्होंने आगे कहा, "हमारे आवंटन पत्र में साफ-साफ दो पार्किंग लिखी हैं, वहां मैकेनिकल या हाइड्रोलिक का कोई स्पेसिफिक ज़िक्र नहीं है. मेरी यही मांग है कि मुझे नॉर्मल पार्किंग दी जाए."
बता दें कि हाइड्रोलिक या मैकेनिकल पार्किंग उस व्यवस्था को कहा जाता है जिसमें एक गाड़ी नीचे खड़ी होती है और उसके ऊपर लोहे के फ्रेम पर दूसरी गाड़ी को लिफ्ट कर खड़ा किया जाता है. हाउसिंग सोसाइटियों में खरीदारों की आम शिकायत रहती है कि इसमें गाड़ी निकालने में वक्त लगता है और ऊपर वाली गाड़ी निकालने के लिए अक्सर नीचे खड़ी गाड़ी को हटाना पड़ता है. यही वजह है कि खरीदार सामान्य या ओपन पार्किंग को तरजीह देते हैं.
'पैसे बराबर लिए, पार्किंग अलग-अलग दी'–भेदभाव का आरोप
माथुर का सबसे बड़ा एतराज़ भेदभाव को लेकर है. उनका आरोप है कि इसी प्रोजेक्ट में करीब 1900 वर्ग फुट के फ्लैट लेने वाले खरीदारों को सामान्य पार्किंग दी गई है, जबकि पार्किंग के नाम पर वसूली गई रकम दोनों से एक जैसी है. "पैसे भी हमसे उतने ही लिए हैं, जितने दूसरों से लिए हैं. 1900 वर्ग फुट के फ्लैट वालों से भी उतने ही लिए, लेकिन उन्हें नॉर्मल पार्किंग दी और हमें हाइड्रोलिक," माथुर ने कहा. उनका कहना है कि जब चार्ज में कोई फर्क नहीं है तो सुविधा में फर्क क्यों किया जा रहा है, और यह बात आवंटन के समय उन्हें कभी नहीं बताई गई.
बिल्डर की ओर से कोई जवाब नहीं
इस पूरे मामले में बिल्डर का पक्ष जानने के लिए न्यूज़ नेशन ने गौरसंस की सीआरएम हेड पारुल सेठ से संपर्क करने की कोशिश की. उन्हें फोन किया गया, लेकिन उन्होंने न तो कॉल रिसीव की और न ही कोई जवाब दिया. कंपनी की ओर से मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. बिल्डर का पक्ष मिलते ही खबर को अपडेट किया जाएगा.
खरीदार की मांग
विजय माथुर का कहना है कि वह बिल्डर से कोई मुआवजा नहीं, बल्कि सिर्फ वही चाहते हैं जिसका वादा उनसे किया गया था आवंटन के दस्तावेज़ के मुताबिक दो सामान्य कार पार्किंग. उन्होंने कहा कि अगर कंपनी शुरू से मैकेनिकल पार्किंग देने की बात कहती तो वह उसी हिसाब से फैसला लेते, लेकिन पूरा भुगतान करने के बाद एग्रीमेंट के स्तर पर शर्त बदल देना सही नहीं है.
गौरतलब है कि ऐसे मामलों में खरीदारों के पास उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) में शिकायत दर्ज कराने का विकल्प होता है, जहां बुकिंग के समय किए गए वादों और एग्रीमेंट की शर्तों में अंतर को लेकर सुनवाई होती है.
डिस्क्लेमर: इस खबर में लगाए गए आरोप खरीदार के हैं. बिल्डर की ओर से प्रतिक्रिया आने पर खबर अपडेट की जाएगी.
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