Responsive Scrollable Menu

युद्ध अचानक दरवाजे पर आया तो ताकत ही हमें बचायेगी, सिर्फ 2% के रक्षा बजट से काम नहीं चलेगाः GD Bakshi

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7,84,678 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है जो पिछले वर्ष के आवंटन 6.81 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। मोदी सरकार का ध्यान खासकर चीन और पाकिस्तान से बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने पर है। लेकिन रक्षा क्षेत्र में किये गये बजटीय प्रावधान को लेकर पूर्व मेजर जनरल जीडी बख्शी ने जिस तेवर में अपनी बात रखी है उसने बहस को नई धार दे दी है। उन्होंने साफ कहा कि 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी स्वागत योग्य है, पर युद्ध इंतजार नहीं करता। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि संघर्ष अचानक दरवाजे पर आ सकता है और ताकत ही रक्षा करती है। उन्होंने कहा कि हमारा रक्षा व्यय सकल घरेलू उत्पाद के 1.9 प्रतिशत के आसपास अटका रहा है, जबकि कई यूरोपीय देश तीन प्रतिशत तक और रूस करीब पांच प्रतिशत तक खर्च कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को कम से कम ढाई से तीन प्रतिशत तक तुरंत पहुंचना ही होगा, क्योंकि देश साढ़े तीन मोर्चों की चुनौती झेल रहा है। जीडी बख्शी ने कहा कि युद्ध अचानक आ सकता है। केवल ताकत ही हमें बचा सकती है। गांधीवादी दृष्टिकोण को तत्काल छोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ''हमें बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और बांग्लादेश में मिलने वाले क्षणिक अवसरों का लाभ उठाने की स्थिति में होना चाहिए। हम दस साल की आरामदेह पुनः शस्त्रीकरण योजना पर काम करने का जोखिम नहीं उठा सकते।''

उधर, केंद्र सरकार का तर्क है कि रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई है क्योंकि चीन और पाकिस्तान से सुरक्षा चुनौती बनी हुई है और सेनाएं नए हथियार, विमान, युद्धपोत और अन्य साधन तेजी से जुटाना चाहती हैं। कुल आवंटन में से 2,19,306 करोड रुपये पूंजीगत व्यय के लिए रखे गए हैं, जो पिछले अनुमान से करीब 22 प्रतिशत अधिक हैं। इसी मद में 63,733 करोड़ रुपये विमान और वायु इंजन के लिए तथा 25,023 करोड़ रुपये नौसेना बेड़े के लिए तय किए गए हैं। चालू वर्ष के 1.80 लाख करोड़ रुपये के अनुमान की तुलना में यह पूंजीगत व्यय लगभग 39,000 करोड़ रुपये अधिक है, जबकि संशोधित अनुमान 1,86,454 करोड़ रुपये था।

इसे भी पढ़ें: Union Budget पर Karti Chidambaram का तीखा हमला, बोले- ये घोषणाएं कभी पूरी नहीं होंगी

रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि अगले वर्ष के लिए यह आवंटन सकल घरेलू उत्पाद के करीब दो प्रतिशत के बराबर है और कुल केंद्रीय नियोजित व्यय का लगभग 14.67 प्रतिशत रक्षा पर जाएगा, जो सभी मंत्रालयों में सबसे अधिक है। इसके अलावा, राजस्व व्यय 5,53,668 करोड़ रुपये रखा गया है, जिसमें 1,71,338 करोड़ रुपये पेंशन के लिए हैं। दिन प्रतिदिन संचालन, गोला बारूद, ईंधन, मरम्मत और सहयोगी कर्मियों के वेतन जैसे मदों के लिए राजस्व हिस्से में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है।

सबसे अहम बात यह है कि पूंजीगत खरीद बजट का लगभग 75 प्रतिशत, यानी 1.39 लाख करोड़ रुपये, देशी उद्योग से खरीद के लिए अलग रखा गया है। यही वह बिंदु है जहां आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य जमीन पर उतरता दिखता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विमान निर्माण तथा रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण के लिए काम आने वाले पुर्जों और कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क में छूट की घोषणा की है। इससे देश में विमानन तथा रक्षा निर्माण शृंखला को बल मिलने की उम्मीद है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सिंदूर अभियान की ऐतिहासिक सफलता के बाद यह बजट देश की रक्षा शक्ति को और सुदृढ़ करने के संकल्प को मजबूत करता है और सुरक्षा, विकास तथा आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन साधता है। देखा जाये तो ऑपरेशन सिंदूर को 1971 के बाद पाकिस्तान के साथ पहली बड़ी सैन्य टकराहट के रूप में देखा गया, इसलिए रक्षा व्यय में बढ़ोतरी की आशा पहले से थी। सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्रालय ने हालांकि बजट में बीस प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की थी।

दूसरी ओर, उद्योग जगत ने इस बजट का स्वागत किया है। कई देशी विदेशी रक्षा कंपनियों ने इसे भू रणनैतिक यथार्थ के अनुरूप बताया। थेल्स से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अंकुर कनागलेकर ने कहा कि यह आवंटन सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है और मेक इन इंडिया, नवाचार तथा निर्यात की दिशा में बल देता है। रोल्स रॉयस इंडिया से जुड़े शशि मुकुंदन ने रखरखाव और मरम्मत सेवाओं से जुड़े पुर्जों पर शुल्क छूट को उपयोगी बताया। भारत फोर्ज लिमिटेड के बाबा कल्याणी ने इसे नीतिगत निरंतरता और दीर्घकालिक राष्ट्रीय क्षमता निर्माण का संकेत कहा। वहीं अनुसंधान मोर्चे पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के संयुक्त निदेशक बिनॉय कुमार दास ने कहा कि उनके लिए बजट कभी बाधा नहीं रहा। उनका कहना था कि सरकार से बिना शर्त सहयोग मिलता रहा है और अब उनसे ऐसी अगली पीढ़ी की तकनीक पर काम करने को कहा गया है जो दुनिया में किसी के पास न हो। उन्होंने साफ कहा कि बदलती भू-राजनीति में आयात का इंतजार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश ने गैलियम नाइट्राइड तकनीक में पकड़ बनाई है और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता की दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ दशक पहले भारत को तकनीक देने से मना किया जाता था, परन्तु आज भारत खुद आयात से मना करने की स्थिति में है।

देखा जाये तो रक्षा बजट की यह छलांग केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, यह मनोवृत्ति के बदलाव का संकेत है। जब दुनिया अस्थिर हो, सीमाएं संवेदनशील हों और तकनीक ही शक्ति का नया रूप बन रही हो, तब आधे मन से रक्षा नहीं होती। पर केवल धन बढ़ाना काफी नहीं; उस धन का तेज, पारदर्शी और देशी उद्योग केंद्रित उपयोग जरूरी है। यदि 75 प्रतिशत खरीद सच में देश के भीतर से होती है, अनुसंधान को खुला समर्थन मिलता है और सेनाओं तक समय पर साधन पहुंचते हैं, तभी आत्मनिर्भरता नारा नहीं, ढाल बनेगी।

बहरहाल, अंत में यही कहा जा सकता है कि जीडी बख्शी ने जो सवाल उठाए हैं, उन पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि बदलते सुरक्षा माहौल में तैयारी का कोई विकल्प नहीं होता। हालांकि यह भी उतना ही सच है कि मोदी सरकार के लिए देश की सीमाओं की रक्षा हमेशा सर्वोपरि रही है। जब जब सीमा पर संकट आया है, सरकार ने बजट की परवाह किए बिना सेनाओं को जरूरी संसाधन दिए हैं। सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए जिस तरह खजाने के द्वार खोले गए हैं और देशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है, वह काफी हद तक भरोसा जगाता है कि भारत अपनी सुरक्षा और सामरिक शक्ति को लेकर अब पहले से कहीं ज्यादा सजग और सक्षम है।

Continue reading on the app

Rahul Gandhi ने छेड़ा, सरकार ने रोका, नरवणे की किताब 'Four Stars of Destiny' पर क्यों है संग्राम?

भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' प्रकाशक द्वारा 2023 में किए गए पूर्व-आदेश घोषणाओं के अनुसार अप्रैल 2024 में प्रकाशित होनी थी। अमेज़न पर अभी भी इसकी लिस्टिंग है, लेकिन लिखा है: "वर्तमान में अनुपलब्ध। हमें नहीं पता कि यह आइटम कब या फिर स्टॉक में वापस आएगा या नहीं। फिर भी, 2026 में यह चर्चा में है क्योंकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोमवार को लोकसभा में एक पत्रिका की रिपोर्ट पढ़ने की कोशिश की, जिसमें आत्मकथा के कुछ अंश उद्धृत किए गए हैं। जनरल एमएम नरवणे से अक्टूबर में हिमाचल प्रदेश के कसौली में आयोजित एक साहित्य उत्सव में इस विषय पर सवाल पूछा गया था, जहां वे अपनी हाल ही में प्रकाशित उपन्यास 'द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी' पर चर्चा कर रहे थे।

इसे भी पढ़ें: पाकिस्तानी सेना के लिए काल बनी बलूच महिला फिदायीन, BLA ने जारी की तस्वीरें, बताया कैसे किया हमला

'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के बारे में उन्होंने कहा था, मुझे लगता है कि यह पुरानी शराब की तरह परिपक्व हो रही है। जितना अधिक समय इसे रखा जाता है, यह उतनी ही पुरानी और मूल्यवान होती जाती है। उन्होंने कथित तौर पर महोत्सव में एक अतिथि से कहा, “मेरा काम किताब लिखना और उसे प्रकाशकों को देना था। प्रकाशकों को रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेनी थी। उन्होंने आगे कहा, यह अभी भी एक साल से अधिक समय से समीक्षाधीन है। 

इसे भी पढ़ें: Budget का वो हिस्सा जो छिपा रहा! एक झटके में कैसे मोदी ने कर दिया पाक-चीन और ट्रंप का इलाज

उन्होंने आगे कहा कि लेकिन मुझे किताब लिखने में आनंद आया, चाहे अच्छा हो या बुरा। बस यही बात है। रक्षा मंत्रालय जब चाहे तब अनुमति दे सकता है। पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों द्वारा लिखी गई पुस्तकों की संवेदनशील सामग्री की जाँच के लिए समीक्षा करना एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन जनरल नरवणे की पुस्तक विवादों में घिर गई क्योंकि इसमें अग्निपथ योजना और गलवान संघर्ष जैसे मुद्दों पर चर्चा का खुलासा हुआ था, जिसमें चीनी सैनिकों के साथ झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। जनरल एमएम नरवणे ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारत के सेना प्रमुख के रूप में कार्य किया।

इसे भी पढ़ें: Defence Budget 2026: धड़ाधड़ बनेंगी मिसाइलें और फाइटर जेट, निर्मला सीतारमण ने खोला ₹7.8 लाख करोड़ का खजाना

जब राहुल गांधी ने 'द कारवां' पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट पर बोलने का प्रयास किया, जिसमें कथित तौर पर गलवान और "चीनी पक्ष से टैंकों के आने" के बारे में उनके संस्मरण के कुछ अंश उद्धृत किए गए थे, तो रक्षा और गृह मंत्री राजनाथ सिंह और अमित शाह ने आपत्ति जताई।
 

Continue reading on the app

  Sports

T20 World Cup: टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ नहीं खेलेगा पाकिस्तान; तो किसको होगा सबसे ज्यादा नुकसान, समझिए बदला हुआ समीकरण

T20 World Cup: सरकार के आदेश के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप में मैच खेलने से इनकार कर दिया है। ऐसे में अब सवाल उठता है कि भारत से पाकिस्तान के न खेलने से अंक के मामले में किसे फायदा होगा और किसे नुकसान। आइए समीकरण समझते हैं। Mon, 02 Feb 2026 23:31:50 +0530

  Videos
See all

Gold Rate News : सोना-चांदी क्यों हुआ क्रैश ? #goldsilver #goldrate #goldprice #silverprice #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-02T20:27:41+00:00

Gold-Silver Crash : बजट के बाद सोना-चांदी पस्त ! #silverprice #goldrate #marketnews #ytshorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-02T20:43:12+00:00

Anand Rangnathan | Sawal Public Ka: आनंद रंगनाथन का जवाब सुनकर कांग्रेस नेता के तोते उड़ गए ! #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-02T20:38:55+00:00

Iran America War Update: 2 बजते ही ईरान पर आई बहुत बड़ी खबर ! | N18G | Breaking News | Trump | TOP #tmktech #vivo #v29pro
2026-02-02T20:30:09+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers