Explainer: 100 अरब डॉलर निवेश, 5 साल मल्टी एंट्री वीजा... स्विस राष्ट्रपति गाय परमेलिन के भारत दौरे पर क्या-क्या हुए समझौते?
India-Switzerland Agreement: स्विस राष्ट्रपति सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे. यह उनकी भारत की पहली राजकीय यात्रा है. इससे पहले वह फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने भारत आए थे. उनकी मौजूदा यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में भारत-स्विट्जरलैंड सहयोग को और मजबूत करना है.
भारत और स्विट्जरलैंड ने पांच साल तक वैध बहु-प्रवेश वीजा की सुविधा देने वाले प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते (MMP) पर हस्ताक्षर किए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय परमेलिन के बीच नई दिल्ली में हुई बातचीत के बाद यह समझौता हुआ. इसका मकसद दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही आसान करना और युवाओं के लिए रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है. स्विट्जरलैंड 2027 में जिनेवा में वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. पार्मेलिन ने कहा कि वह इस सम्मेलन में भारत की भागीदारी की उम्मीद कर रहे हैं.
#WATCH | Delhi: On ANI's question, MEA Secretary (West) Sibi George says, "On the investment projects, there was this agreement to have an investment to the tune of 100 billion dollars in the next 15 years. You know, this is a commitment. These commitments create an important… pic.twitter.com/VZH277G1bx
— ANI (@ANI) October 5, 2026
5 साल मल्टी एंट्री वीजा है खास
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते के तहत 5 साल तक के लिए मल्टीपल एंट्री वीजा की सुविधा मिलेगी. छात्रों के लिए एक साल का परमिट दिया जाएगा, जिसे जरूरत के अनुसार रिन्यू कराया जा सकेगा. इसके अलावा, रोजगार और युवाओं की बेहतर आवाजाही के लिए भी एक तय व्यवस्था बनाई जाएगी. भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुए 6 प्रमुख समझौतों में यह अहम समझौता है.
दोनों देशों का लक्ष्य आपसी संबंधों को मजबूत करने के साथ निवेश को बढ़ावा देना भी है. पात्र लोगों को एक बार वीजा मिलने के बाद यह 5 साल तक वैध रहेगा. इस दौरान वे बार-बार स्विट्जरलैंड और शेंगेन क्षेत्र की यात्रा कर सकेंगे. हर यात्रा से पहले नए वीजा के लिए आवेदन करने और फीस देने की जरूरत नहीं होगी.
15 साल में 100 अरब डॉलर का निवेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध सदियों पुराने हैं. उन्होंने कहा कि आज इन रिश्तों की नींव नवाचार, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों पर मजबूत हो रही है. प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश लाने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा है. मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं. दोनों देश वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करते रहेंगे. उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में शांति के प्रयासों का भी समर्थन किया. प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर चर्चा की है. इसमें सैन्य आदान-प्रदान, रक्षा निर्माण और सहयोग के साथ परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में संयुक्त प्रयास शामिल हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलना बेहद जरूरी, घटते तेल भंडार से बढ़ रहा वैश्विक ऊर्जा संकट का जोखिम: सऊदी अरामको सीईओ
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने सोमवार को चेतावनी दी कि वैश्विक तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों को आगे और आपूर्ति संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
लंदन में आयोजित एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम को संबोधित करते हुए नासिर ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तेल भंडार बाजार को झटकों से बचाने का काम करते हैं, लेकिन वर्तमान में ये भंडार काफी कम हो चुके हैं, जिससे किसी भी नए संकट का असर अधिक गंभीर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने का फैसला अल्पकालिक राहत जरूर दे सकता है, लेकिन इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूद मांग और आपूर्ति के मूल असंतुलन का समाधान नहीं होगा।
नासिर ने कहा कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और ईंधन की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं होती और बाजार का भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन बाजारों पर दबाव बना रह सकता है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने बढ़ती ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगभग 10 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल और डीजल भंडार जारी करने की योजना की घोषणा की है।
अरामको प्रमुख ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुल जाने के बाद भी वैश्विक तेल भंडार को दोबारा सामान्य स्तर पर पहुंचाने में करीब दो वर्ष तक का समय लग सकता है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान दबाव केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि मध्यम अवधि तक भी बने रह सकते हैं।
गौरतलब है कि इस वर्ष अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, को प्रभावित किया था। इसके चलते तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।
हालांकि, खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक देशों ने निर्यात बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। नतीजतन, कच्चे तेल की आपूर्ति संघर्ष से पहले के स्तरों के करीब पहुंचने लगी है।
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत ने तेल परिवहन बनाए रखने के लिए अपने स्वयं के टैंकर बेड़ों का उपयोग बढ़ाया है। वहीं सऊदी अरामको ने रास तनुरा टर्मिनल से निर्यात बढ़ाया है और हालिया हमले के बाद प्रभावित हुई ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को भी लगभग 80 प्रतिशत तक बहाल कर दिया है।
इसके बावजूद बाजार में खतरे की धारणा बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी और लाल सागर में जारी सुरक्षा जोखिमों के कारण तेल बाजार अभी भी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को कीमतों में शामिल कर रहा है।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड पिछले एक महीने से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह संकेत देता है कि निवेशक अभी भी संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर चिंतित हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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