CEC Gyanesh Kumar ने Form 6 में किया अवैध बदलाव, Congress का आरोप
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संविधान के साथ ‘‘विश्वासघात’’ किया और मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में ‘‘अवैध और एकतरफा’’ बदलाव भी किया। मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग के प्रति जनता का विश्वास बहाल करने का उच्चतम न्यायालय के पास यह ‘‘महत्वपूर्ण अवसर’’ है। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उन याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिनमें आरोप लगाया गया है कि आयोग ने दोनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए।
शीर्ष अदालत ने कहा कि जो भी फैसला कानून के अनुरूप नहीं पाया जाएगा, उसे रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, अदालत ने अंतिम फैसला आने तक सीईसी ज्ञानेश कुमार को कोई भी फैसला लेने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में ‘‘अवैध और एकतरफा’’ तरीके से बदलाव किए और यह भाजपा को मदद पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग का ‘‘एक और सबूत’’ है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करना तथा मतपत्र के जरिए चुनाव कराना, ये तीन ऐसी प्रमुख मांगें हैं जिनसे उनकी पार्टी समझौता नहीं करेगी। खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगी दल इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सीईसी ने न केवल ‘‘झूठ बोला’’ बल्कि कानून का उल्लंघन किया और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री के इशारे पर ‘‘संविधान के साथ विश्वासघात’’ किया।
उन्होंने फॉर्म-6 में कथित बदलाव को पूरी तरह बचाव योग्य न होने वाला आचरण करार दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उच्चतम न्यायालय ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। जबकि निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर के अपने प्रेस नोट में कहा था कि फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा-पत्र को उच्चतम न्यायालय ने सही ठहराया है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि यह स्पष्ट है कि मतदाता सूची से हटाए गए नाम संविधान और हमारी चुनाव प्रक्रिया के सभी मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मुझे लगता है कि अब जनता को समझ आ गया है कि चुनावों में हेरफेर किया गया है और हम अपना विरोध जारी रखेंगे।
उत्तर प्रदेश Rajya Sabha चुनाव: BJP ने जारी की 8 प्रत्याशियों की सूची
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए मंत्री धर्मपाल सिंह समेत आठ उम्मीदवारों के नामों की सोमवार को घोषणा की। भाजपा के एक बयान के अनुसार, अन्य सात उम्मीदवार राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार हैं। बयान में कहा गया कि इन आठ उम्मीदवारों के नामों को भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने मंजूरी दी है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम इस सूची में नहीं है। वह भाजपा के उन सदस्यों में शामिल हैं जिनका राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने वाला है। भाजपा के सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने सामाजिक, क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों में संतुलन को ध्यान में रखते हुए इन आठ उम्मीदवारों के नामों को मंजूरी दी है।
भाजपा के एक नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सूची में तीन उम्मीदवार सवर्ण समुदायों से हैं, जिनमें राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय शामिल हैं और दोनों ब्राह्मण हैं। दो उम्मीदवार महिलाएं हैं, तीन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से और दो अनुसूचित जाति से हैं।’’ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की 12 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होंगे। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 सीट और उत्तराखंड की एक सीट शामिल है।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल की एक सीट पर उपचुनाव होगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें भाजपा नेता हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बी. एल. वर्मा, सीमा द्विवेदी, समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रामजी गौतम शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की राज्यसभा सीट भी 11 सितंबर से रिक्त है। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद 11 सितंबर को इस्तीफा दिया था, जो उसी दिन प्रभावी हुआ।
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