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विदेशी पूंजी निकासी से फिसला Rupee, डॉलर के सामने पांच पैसे कमजोर होकर 96.30 पर हुआ बंद

मुंबई, पांच अक्टूबर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को पांच पैसे की गिरावट के साथ 96.30 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। कारोबार के दौरान भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 96 के अहम स्तर के आसपास सीमित दायरे में रही। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि जोखिम लेने की बढ़ती धारणा ने रुपये को सहारा दिया, हालांकि कारोबारी अब विदेशी पूंजी प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आगामी मौद्रिक नीति निर्णय पर नजर बनाए हुए हैं।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.20 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान फिसलकर 96.31 के निचले स्तर तक आ गया। रुपया कारोबार के अंत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.30 (अस्थायी) पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले पांच पैसे की गिरावट है। रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 96 के स्तर से नीचे लुढ़ककर 96.25 पर बंद हुआ था।

‘गांधी जयंती’ के अवसर पर शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार और शेयर बाजार बंद थे। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘‘जोखिम उठाने की बढ़ती धारणा ने घरेलू मुद्रा को अतिरिक्त समर्थन दिया, हालांकि, अब सभी की निगाहें आरबीआई के मौद्रिक नीति फैसले और विदेशी पूंजी प्रवाह पर टिकी होंगी। आने वाले वक्त में रुपये के अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.95 से 96.50 के बीच रहने की संभावना है।’’ रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन-दिन की बैठक सोमवार को शुरू हुई।

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष से घरेलू मुद्रास्फीति के लिए जोखिम पैदा होने के कारण केंद्रीय बैंक नीति दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.25 प्रतिशत बढ़कर 102.18 पर था। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 102.48 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 9,484.22 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

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शेयर बाजार में लौटी तेजी: Sensex 473 अंक चढ़कर 72382 पर बंद, Nifty 22555 के पार

मुंबई, पांच अक्टूबर घरेलू शेयर बाजार के मानक सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए। अमेरिका में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक मौद्रिक सख्ती किए जाने की आशंका कम हुई है, जिससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने की धारणा को समर्थन मिला। बीएसई का 30 शेयर वाला सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत चढ़कर 72,382.47 अंक पर बंद हुआ।

कारोबार के दौरान यह एक समय 722.23 अंक यानी एक प्रतिशत तक बढ़कर 72,631.93 अंक पर पहुंच गया था। एनएसई का 50 शेयर वाला निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,555.75 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से आईटीसी, इटर्नल, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, अदाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर लाभ में रहे।

वहीं, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक, सन फार्मा, इन्फोसिस और एशियन पेंट्स के शेयर में गिरावट दर्ज की गई। रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘बाजार ने सोमवार को जोरदार वापसी की और हालिया गिरावट के रुख से राहत लेते हुए इनमें आधे प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। वैश्विक संकेतक अपेक्षाकृत अनुकूल रहे क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें हाल के ऊंचे स्तर से नीचे आई हैं।

ब्रेंट कच्चा तेल करीब 102 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है, जिससे मुद्रास्फीति के मोर्चे पर कुछ राहत मिली है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका में रोजगार के उम्मीद से कमजोर आंकड़ों ने भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक मौद्रिक सख्ती की आशंका कम की, जिससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने की धारणा को समर्थन मिला।’’ अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का वायदा भाव 0.19 प्रतिशत बढ़कर 102.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘अमेरिका में रोजगार के उम्मीद से कमजोर आंकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार में वापसी हुई।

इससे निकट अवधि में ब्याज दरों के परिदृश्य का आकलन कर रहे निवेशकों को कुछ राहत मिली। अब ध्यान भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत फैसले और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर है।’’ एशियाई बाजारों में जापान का निक्की 225 दो प्रतिशत से अधिक चढ़ा जबकि हांगकांग का हैंगसेंग मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का एसएसई कम्पोजिट अवकाश के कारण बंद रहे।

यूरोपीय बाजारों में दोपहर के कारोबार में मिला-जुला रुख रहा। वहीं अमेरिकी बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 9,484.22 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

सेंसेक्स बृहस्पतिवार को 242.65 अंक और निफ्टी 64.05 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ था। ‘गांधी जयंती’ के अवसर पर शुक्रवार को शेयर बाजार बंद रहे थे।

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  Sports

Dinesh Karthik बोले Mohammed Shami की Team India में वापसी पर विचार करने की जरूरत नहीं

मोहम्मद शमी की भारतीय टीम में वापसी को लेकर चल रही उम्मीदों को एक और झटका लगा है। भारत के पूर्व क्रिकेटर दिनेश कार्तिक का मानना है कि टीम अब शमी से आगे बढ़ चुकी है। उनके मुताबिक, शमी घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों, फिर भी उन्हें दोबारा भारतीय टीम में लाने का कोई खास मतलब नहीं है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, शमी ने आखिरी बार 2025 में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला था। इसके बाद चोट, फिटनेस और कुछ अन्य कारणों से वह लगातार राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर से बाहर रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी अच्छी रही है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय टीम में उनकी वापसी की संभावना हर गुजरते दिन के साथ कम होती दिखाई दे रही है।

दिनेश कार्तिक ने क्रिकेट बज से बातचीत के दौरान शमी को लेकर अपनी राय रखी। उनसे पूछा गया था कि क्या भारतीय टीम में शमी की वापसी होनी चाहिए। इस पर कार्तिक ने कहा कि टीम में शमी के अलावा कई तेज गेंदबाज मौजूद हैं। उन्होंने साफ कहा कि भारत शमी से आगे बढ़ चुका है और अब पीछे लौटने की जरूरत नहीं है।

कार्तिक ने यह भी माना कि शमी ने अच्छी गेंदबाजी की है। हालांकि, उनके मुताबिक भारतीय टीम के मौजूदा गेंदबाजी विकल्पों को देखते हुए शमी को वापस लाना सही फैसला नहीं होगा। यह राय ऐसे समय आई है जब भारत की एकदिवसीय टीम की गेंदबाजी पर सवाल उठ रहे हैं।

गौरतलब है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया एकदिवसीय सीरीज में भारत ने 2-1 से जीत दर्ज की, लेकिन गेंदबाजों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में रहा। पिच बल्लेबाजों के लिए मददगार थी, इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज कई मौकों पर उम्मीद के मुताबिक दबाव नहीं बना सके। इससे प्रशंसकों और पूर्व क्रिकेटरों के बीच भी टीम की गेंदबाजी को लेकर चिंता देखने को मिली।

भारतीय तेज गेंदबाजी में फिलहाल अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे खिलाड़ी प्रमुख विकल्प हैं। इनके अलावा गुरनूर बराड़, आकिब नबी और अंशुल कंबोज जैसे युवा गेंदबाजों को भी धीरे-धीरे मौके दिए जा रहे हैं। ऐसे में चयनकर्ताओं का ध्यान आने वाली पीढ़ी तैयार करने पर भी दिखाई दे रहा है।

शमी के उलट दिनेश कार्तिक रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को ज्यादा समय तक भारतीय टीम में देखना चाहते हैं। उनका मानना है कि इन दोनों खिलाड़ियों के संन्यास का असर केवल भारतीय क्रिकेट पर ही नहीं, बल्कि पूरी विश्व क्रिकेट व्यवस्था पर पड़ेगा।

बता दें कि रोहित शर्मा और विराट कोहली ने एकदिवसीय क्रिकेट को अलविदा नहीं कहा है, लेकिन अगले विश्व कप के बाद उनके भविष्य को लेकर सवाल बने हुए हैं। कार्तिक का मानना है कि अगर भारत के ये 2 बड़े नाम एक साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदा होते हैं तो इसका असर एकदिवसीय क्रिकेट पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व क्रिकेट के केंद्र में है और रोहित-विराट जैसे 2 महान खिलाड़ियों के जाने से इस प्रारूप पर असर पड़ना तय है। ऐसे में भारतीय क्रिकेट में अनुभव और युवा प्रतिभा के बीच संतुलन आने वाले समय की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Mon, 05 Oct 2026 21:07:00 +0530

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