शेयर बाजार में लौटी तेजी: Sensex 473 अंक चढ़कर 72382 पर बंद, Nifty 22555 के पार
मुंबई, पांच अक्टूबर घरेलू शेयर बाजार के मानक सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए। अमेरिका में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक मौद्रिक सख्ती किए जाने की आशंका कम हुई है, जिससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने की धारणा को समर्थन मिला। बीएसई का 30 शेयर वाला सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत चढ़कर 72,382.47 अंक पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान यह एक समय 722.23 अंक यानी एक प्रतिशत तक बढ़कर 72,631.93 अंक पर पहुंच गया था। एनएसई का 50 शेयर वाला निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,555.75 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से आईटीसी, इटर्नल, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, अदाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर लाभ में रहे।
वहीं, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक, सन फार्मा, इन्फोसिस और एशियन पेंट्स के शेयर में गिरावट दर्ज की गई। रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘बाजार ने सोमवार को जोरदार वापसी की और हालिया गिरावट के रुख से राहत लेते हुए इनमें आधे प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। वैश्विक संकेतक अपेक्षाकृत अनुकूल रहे क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें हाल के ऊंचे स्तर से नीचे आई हैं।
ब्रेंट कच्चा तेल करीब 102 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है, जिससे मुद्रास्फीति के मोर्चे पर कुछ राहत मिली है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका में रोजगार के उम्मीद से कमजोर आंकड़ों ने भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक मौद्रिक सख्ती की आशंका कम की, जिससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने की धारणा को समर्थन मिला।’’ अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का वायदा भाव 0.19 प्रतिशत बढ़कर 102.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘अमेरिका में रोजगार के उम्मीद से कमजोर आंकड़ों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार में वापसी हुई।
इससे निकट अवधि में ब्याज दरों के परिदृश्य का आकलन कर रहे निवेशकों को कुछ राहत मिली। अब ध्यान भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत फैसले और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर है।’’ एशियाई बाजारों में जापान का निक्की 225 दो प्रतिशत से अधिक चढ़ा जबकि हांगकांग का हैंगसेंग मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का एसएसई कम्पोजिट अवकाश के कारण बंद रहे।
यूरोपीय बाजारों में दोपहर के कारोबार में मिला-जुला रुख रहा। वहीं अमेरिकी बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 9,484.22 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
सेंसेक्स बृहस्पतिवार को 242.65 अंक और निफ्टी 64.05 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ था। ‘गांधी जयंती’ के अवसर पर शुक्रवार को शेयर बाजार बंद रहे थे।
दलबदल पर आप का हमला, Pawan Khera बोले पार्टी BJP से दोगुनी बेशर्म
पणजी, पांच अक्टूबर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोमवार को कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से “दोगुनी बेशर्म” है। गोवा में कांग्रेस नेताओं के भाजपा में शामिल होने को लेकर ‘आप’ के हमले के जवाब में खेड़ा ने यह टिप्पणी की। खेड़ा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘जिस पार्टी के राज्यसभा में छह-सात सांसद पार्टी छोड़कर चले गए, वह हमें दलबदल पर उपदेश दे रही है।
‘आप’ के लोग कितने कमाल के हैं। मुझे लगता था कि मोदी के नेतृत्व वाली पार्टी बेशर्म है, लेकिन ‘आप’ उससे भी दोगुनी बेशर्म निकली।’’ इस साल अप्रैल में ‘आप’ के सात सांसद भाजपा में शामिल हो गए थे, जिनमें से छह सांसद पंजाब से थे। इससे पहले दिन में, ‘आप’ की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक ने कहा था कि गोवा की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच नेताओं का दलबदल बार-बार होने वाली बात बन गई है और 2027 के चुनाव में भी यह सिलसिला जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में कांग्रेस और भाजपा ने मिलकर राज्य को “बर्बाद” कर दिया है। खेड़ा ने ‘आप’ को लेकर आगे पूछे गए सवालों को टालते हुए कहा कि विजय सरदेसाई के नेतृत्व वाली गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने राज्य में भाजपा के खिलाफ सभी दलों के एकजुट होकर लड़ने की “अच्छी बात कही” है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बात से सहमत है कि एक महागठबंधन होना चाहिए और इस मुद्दे पर पार्टी गोवा की जनता की राय सुनेगी।
उन्होंने कहा कि गोवा में भाजपा की सरकार पिछले 15 वर्षों से राज्य के जंगल, नदियां, तट और रोजगार के अवसर “छीन रही” है। खेड़ा ने कहा, ‘‘भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार गोवा के लोगों के हितों की रक्षा करने में विफल रही है। सरकार ने गोवा से कई चीजें छीन ली हैं।
वन क्षेत्र कम हुआ है और लोगों से पर्याप्त सलाह-मशविरा किए बिना क्षेत्रीय योजना में बदलाव किए जा रहे हैं।
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