ईरान के तेल मंत्री मोहसेन ने दिया इस्तीफा, हामिद बोवार्ड को मिला पद, अमेरिकी दबाव कैसे बना वजह?
Iranian Oil Minister: ईरान में बड़ा घटनाक्रम को देखने को मिला है. अमेरिका की ओर से ईरान के तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनकी जगह नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) के प्रमुख हामिद बोवार्ड को कार्यवाहक तेल मंत्री बनाया गया है.
सरकारी मीडिया आईआरआईबी के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पाकनेजाद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी नौसेना ईरान के तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की समुद्री सप्लाई पर दबाव बढ़ा रही है. सरकारी टीवी पर ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि मोहसेन पाकनेजाद ने पहले निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी. हालांकि, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने उनका पहला इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था.
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— Tehran Times (@TehranTimes79) October 4, 2026
Following Mohsen Paknejad’s resignation, Iranian President Masoud Pezeshkian has appointed Hamid Bovard to serve as the country’s acting oil minister. pic.twitter.com/2QwuzD3vab
राष्ट्रपति ने की थी पद पर रहने की अपील
राष्ट्रपति ने पाकनेजाद से पद पर बने रहने की अपील भी की, लेकिन जब वह अपने फैसले पर कायम रहे तो पेजेश्कियन ने आखिरकार उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया. राष्ट्रपति ने उनके कार्यकाल के दौरान किए गए काम और देश के लिए उनकी सेवाओं की सराहना भी की.
अमेरिकी प्रतिबंध से ईरान पर बड़ा दबाव
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव का बड़ा केंद्र बन गया है. फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से पहले, दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलएनजी के करीब 20 फीसदी शिपमेंट इसी समुद्री रास्ते से गुजरते थे.
ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर रोक लगानी शुरू कर दी और बिना अनुमति आने वाले कुछ जहाजों पर गोलीबारी भी की. इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी. अमेरिकी प्रतिबंधों और कार्रवाई से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है. इसके चलते राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिली हैं.
₹3.61 करोड़ के लोन घोटाले में पूर्व बैंक मैनेजर दोषी, 7 साल की सजा
Loan Scam: जयपुर में ₹3.61 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के तत्कालीन शाखा प्रबंधक को 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर ₹2.85 लाख का जुर्माना भी लगाया है। मामले में एक निजी व्यक्ति को भी दोषी ठहराते हुए 3 साल के कठोर कारावास और ₹25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई के मुताबिक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र की जयपुर स्थित जोनल ऑफिस की लिखित शिकायत के आधार पर 9 नवंबर 2016 को मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में तत्कालीन शाखा प्रबंधक राम भरोस मीणा पर अपने पद का दुरुपयोग कर नियमों के खिलाफ लोन स्वीकृत करने का आरोप लगाया गया था।
राम भरोस मीणा उस समय बैंक ऑफ महाराष्ट्र की गोपालपुरा बाईपास शाखा, जयपुर में शाखा प्रबंधक के पद पर तैनात थे। जांच में सामने आया कि उन्होंने 15 जनवरी 2015 से 6 मई 2015 के बीच 17 खातों में कथित तौर पर बिना वैध लोन आवेदन, जरूरी दस्तावेज और पर्याप्त सिक्योरिटी के ऋण स्वीकृत किए। सीबीआई के अनुसार, आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए धोखाधड़ी और जालसाजी का सहारा लिया। इस पूरी प्रक्रिया के चलते बैंक को करीब ₹3.61 करोड़ का गलत वित्तीय नुकसान हुआ।
2020 में दाखिल हुई चार्जशीट
मामले की जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 9 जुलाई 2020 को तत्कालीन शाखा प्रबंधक राम भरोस मीणा और निजी व्यक्ति माखन लाल मीणा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने 1 दिसंबर 2021 को दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। इसके बाद मामले में सुनवाई और ट्रायल चला।
अदालत ने सुनाई सजा
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सीबीआई कोर्ट, जयपुर ने 30 सितंबर 2026 को दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। राम भरोस मीणा, तत्कालीन शाखा प्रबंधक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र- 7 साल का कठोर कारावास और ₹2.85 लाख जुर्माना. माखन लाल मीणा, निजी व्यक्ति को 3 साल का कठोर कारावास और ₹25 हजार जुर्माना. अदालत के फैसले के बाद बैंक फ्रॉड से जुड़े इस मामले में दोषियों को सजा हो गई है।
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