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US Visa पर नया फरमान, 50 मुल्कों के यात्रियों के लिए वीजा बांड हुआ अनिवार्य; जानिए भारतीयों पर क्या होगा असर

US Visa Bond: अमेरिका की यात्रा करने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए वीजा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव सामने आया है. अमेरिकी प्रशासन ने कुछ देशों के नागरिकों के लिए वीजा बॉन्ड की व्यवस्था लागू की है. इसके तहत पात्र आवेदकों को अमेरिका का बी1 या बी2 वीजा जारी होने से पहले 10 हजार डॉलर से 20 हजार डॉलर तक की वित्तीय गारंटी जमा करनी पड़ सकती है. भारतीय रुपये में यह रकम करीब 8.5 लाख से 17 लाख रुपये के आसपास बैठती है, हालांकि डॉलर-रुपये की विनिमय दर के हिसाब से राशि बदल सकती है.

इस नियम का मकसद उन यात्रियों पर आर्थिक गारंटी लगाना है जिनके वीजा ओवरस्टे करने या अमेरिका में तय अवधि से ज्यादा रुकने का जोखिम अमेरिकी अधिकारियों को अधिक लगता है. हालांकि, इस बॉन्ड को जमा करने का मतलब यह नहीं है कि आवेदक को अपने आप अमेरिकी वीजा मिल जाएगा. वीजा देने का अंतिम फैसला अमेरिकी कांसुलर अधिकारी ही करते हैं.

आखिर क्या होता है वीजा बॉन्ड?

वीजा बॉन्ड को आसान भाषा में एक तरह की सुरक्षा राशि या वित्तीय गारंटी समझ सकते हैं. अमेरिका में कुछ श्रेणियों के विदेशी यात्रियों के लिए यह व्यवस्था इस सोच पर आधारित है कि अगर कोई व्यक्ति अस्थायी यात्रा के लिए अमेरिका जा रहा है तो उसे तय अवधि के भीतर वापस लौटना चाहिए.

आमतौर पर बी1 वीजा कारोबार से जुड़ी यात्राओं के लिए और बी2 वीजा पर्यटन, इलाज या कुछ अन्य अस्थायी यात्राओं के लिए इस्तेमाल होता है. ऐसे वीजा पर अमेरिका जाने वाले लोगों को अपने प्रवास की तय शर्तों का पालन करना होता है.

नए नियम के तहत संबंधित देश के पात्र आवेदक से कांसुलर अधिकारी बॉन्ड की रकम जमा करने को कह सकता है. यह राशि 10 हजार, 15 हजार या 20 हजार डॉलर के स्तर पर तय की जा सकती है.

सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से वीजा ओवरस्टे को लेकर चिंता जताता रहा है. वीजा ओवरस्टे का मतलब है कि कोई विदेशी नागरिक अपने वीजा की अनुमति वाली अवधि खत्म होने के बाद भी अमेरिका में मौजूद रहे.

अमेरिका की नजर में ऐसे मामलों को नियंत्रित करना आव्रजन व्यवस्था और सीमा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. वीजा बॉन्ड इसी व्यापक नीति का हिस्सा है.

सरल शब्दों में समझें तो सरकार आवेदक से यह वित्तीय गारंटी लेती है कि वह अपने वीजा की शर्तों का पालन करेगा. अगर यात्री नियमों के अनुसार अमेरिका से बाहर चला जाता है तो बॉन्ड वापस मिलने की व्यवस्था हो सकती है. वहीं वीजा की शर्तों का उल्लंघन होने पर जमा राशि के जब्त होने का जोखिम रहता है.

कितनी रकम जमा करनी होगी?

बॉन्ड की राशि सभी लोगों के लिए एक जैसी नहीं होगी. पात्र आवेदक से 10 हजार डॉलर, 15 हजार डॉलर या 20 हजार डॉलर में से कोई राशि मांगी जा सकती है.

भारतीय मुद्रा में मोटे तौर पर इसे इस तरह समझ सकते हैं:

  • 10,000 डॉलर: करीब 8.5 लाख रुपये
  • 15,000 डॉलर: करीब 12.75 लाख रुपये
  • 20,000 डॉलर: करीब 17 लाख रुपये

हालांकि रुपये में वास्तविक रकम उस समय के डॉलर-रुपये विनिमय दर पर निर्भर करेगी.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सामान्य वीजा फीस से अलग राशि है. यानी जहां लागू हो, आवेदक को सामान्य वीजा आवेदन प्रक्रिया और फीस का पालन करना होगा और इसके अतिरिक्त बॉन्ड की शर्त भी पूरी करनी पड़ सकती है.

क्या बॉन्ड जमा करने से वीजा पक्का हो जाएगा?

अगर किसी आवेदक से वीजा बॉन्ड जमा करने को कहा जाता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसका वीजा अपने आप मंजूर हो जाएगा. वीजा आवेदन की बाकी सभी शर्तें भी पूरी करनी होंगी.

अमेरिकी कांसुलर अधिकारी आवेदक की यात्रा का उद्देश्य, दस्तावेज, आर्थिक स्थिति, अमेरिका में रहने की योजना और अन्य जरूरी पहलुओं की जांच कर सकते हैं. इसके बाद ही वीजा जारी करने का फैसला लिया जाता है. यानी बॉन्ड एक अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा है, वीजा की गारंटी नहीं.

पैसा वापस कैसे मिलेगा?

वीजा बॉन्ड का मूल उद्देश्य ही वित्तीय गारंटी देना है. इसलिए नियमों के तहत अगर यात्री अमेरिका में अपने वीजा की शर्तों का पालन करता है और निर्धारित समय के अनुसार देश से बाहर निकलता है, तो बॉन्ड की वापसी की व्यवस्था हो सकती है.

दूसरी तरफ अगर कोई व्यक्ति वीजा की शर्तों का उल्लंघन करता है या तय अवधि के बाद भी अमेरिका में रहता है, तो बॉन्ड की रकम जब्त होने का जोखिम हो सकता है.

इसलिए अमेरिका जाने वाले यात्रियों के लिए सिर्फ वीजा हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होगा. उन्हें अमेरिका में रहने के दौरान वीजा की सभी शर्तों का पालन करना भी जरूरी होगा.

यात्रा के तरीके को लेकर भी नियम

वीजा बॉन्ड व्यवस्था के तहत कुछ यात्रियों के लिए अमेरिका में प्रवेश और बाहर निकलने के तरीके से जुड़े नियम भी निर्धारित किए जा सकते हैं. इसका उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही का रिकॉर्ड स्पष्ट रखना और सीमा अधिकारियों को उनके प्रवेश तथा प्रस्थान की जानकारी उपलब्ध कराना है.

हालांकि, ऐसे नियमों को लेकर किसी भी यात्रा से पहले अमेरिकी विदेश विभाग और संबंधित अमेरिकी दूतावास की आधिकारिक जानकारी देखना जरूरी है, क्योंकि सभी यात्रियों पर एक जैसे नियम लागू होना जरूरी नहीं है.

भारत के यात्रियों को क्या राहत?

भारत से अमेरिका जाने वाले यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या उन पर यह भारी-भरकम बॉन्ड लागू होगा. दिए गए विवरण के मुताबिक, भारत इस विशेष वीजा बॉन्ड व्यवस्था में शामिल देशों की सूची में नहीं है. इसका मतलब है कि सामान्य परिस्थितियों में भारतीय बी1/बी2 वीजा आवेदकों को इस नियम के तहत 10 हजार से 20 हजार डॉलर की अतिरिक्त बॉन्ड राशि जमा करने की जरूरत नहीं होगी. यह भारतीय पर्यटकों, कारोबारियों और अमेरिका जाने वाले अन्य अस्थायी यात्रियों के लिए बड़ी राहत है.

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि भारतीय नागरिकों के लिए अमेरिकी वीजा प्रक्रिया आसान या स्वतः मंजूर हो गई है. उन्हें सामान्य वीजा प्रक्रिया, इंटरव्यू और अमेरिकी आव्रजन नियमों का पालन करना होगा.

किन देशों के नागरिकों पर असर?

वीजा बॉन्ड व्यवस्था में कई देशों को शामिल किया गया है. इनमें कुछ ऐसे देश भी हैं जहां से अमेरिका जाने वाले यात्रियों के बीच वीजा ओवरस्टे को लेकर अमेरिकी प्रशासन ने ज्यादा जोखिम माना है.

आपके दिए विवरण में नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, नाइजीरिया, क्यूबा, वेनेजुएला, जिम्बाब्वे, कंबोडिया और इथियोपिया जैसे देशों का उल्लेख किया गया है. हालांकि किसी यात्री को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि सिर्फ देश की नागरिकता के आधार पर हर व्यक्ति पर एक जैसी रकम लागू होगी. अंतिम पात्रता और बॉन्ड की राशि संबंधित अमेरिकी नियमों और कांसुलर अधिकारी के निर्णय पर निर्भर कर सकती है.

भारतीय यात्रियों के लिए क्या समझना जरूरी है?

इस पूरे बदलाव का सबसे अहम पहलू यह है कि भारत फिलहाल इस विशेष बॉन्ड व्यवस्था से बाहर है. इसलिए अमेरिका घूमने, कारोबार या अन्य अस्थायी उद्देश्य से जाने वाले भारतीय नागरिकों को केवल इस नियम के कारण लाखों रुपये की अतिरिक्त सुरक्षा राशि जमा करने की जरूरत नहीं है.

लेकिन भारतीय यात्रियों को यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि अमेरिकी वीजा मिलना और अमेरिका में प्रवेश मिलना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. वीजा मिलने के बाद भी अमेरिका पहुंचने पर सीमा अधिकारी यात्रा के उद्देश्य और दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं.

इसके अलावा वीजा की अनुमति वाली अवधि और अमेरिका में रहने की अधिकृत अवधि को भी समझना जरूरी है. वीजा ओवरस्टे करना भविष्य में अमेरिकी वीजा और आव्रजन रिकॉर्ड पर गंभीर असर डाल सकता है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में गतिरोध, व्यापार संतुलन फिलहाल भारत के पक्ष में: वित्त मंत्री सीतारमण

 

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इंदौर में गांजा सप्लाई चेन का खुलासा, तस्कर की गिरफ्तारी के बाद बड़वानी से दो आरोपी पकड़े

इंदौर में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मारीमाता चौराहे से एक तस्कर को 4 किलो 65 ग्राम गांजे के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी से जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने नशे के पूरे नेटवर्क और गांजा सप्लाई करने वाले मुख्य लोगों के राज उगल दिए। इसके बाद पुलिस की टीम तुरंत हरकत में आई।

पकड़े गए आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने बड़वानी में दबिश देकर गांजा सप्लाई करने वाले दो और बड़े आरोपियों को धर दबोचा। इस तरह पुलिस ने शहर में नशे का जाल फैलाने वाली सप्लाई चेन की एक अहम कड़ी को तोड़ दिया है। क्राइम ब्रांच की इस अचानक हुई कार्रवाई से इलाके के नशा तस्करों और अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

पूछताछ के बाद बड़वानी से पकड़े गए दो मुख्य सप्लायर

मामले की जानकारी देते हुए क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले तस्कर सागर गौड़ को पकड़ा गया था। जब उसके पास से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ, तो पुलिस ने उससे गांजे की खेप के बारे में पूछताछ की। आरोपी सागर की बताई बातों के आधार पर बड़वानी निवासी मोहन शर्मा और महेश सोलंकी का नाम सामने आया, जिन्हें पुलिस ने तुरंत गिरफ्तार कर लिया।

एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने पकड़े गए तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/29 के तहत केस दर्ज कर लिया है। अब क्राइम ब्रांच की टीम आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने में जुटी हुई है। पुलिस का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि बड़वानी के ये सप्लायर गांजा कहां से लाते थे और इंदौर के अलावा किन-किन इलाकों में इसकी सप्लाई की जा रही थी।

पूरे नेटवर्क को खत्म करने की तैयारी में पुलिस

इंदौर पुलिस का कहना है कि नशे के इस काले कारोबार की पूरी जड़ तक पहुंचा जाएगा और सप्लाई चेन से जुड़े किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। बड़वानी के अलावा दूसरे जिलों में फैले इनके साथियों की भी तलाश की जा रही है। आने वाले दिनों में इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश होने और कुछ और आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद है।

शकील अंसारी की रिपोर्ट

 

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