कम जमीन में बड़ा मुनाफा, फूलों की खेती से होगी बंपर कमाई; झारखंड में सरकार दे रही भारी अनुदान
Jharkhand Flower Farming: धान और गेहूं जैसी फसलों पर निर्भर रहने वाले किसानों के सामने हर साल मौसम और बाजार के उतार-चढ़ाव की बड़ी चुनौती रहती है. खेत में जी-तोड़ मेहनत और भारी भरकम लागत लगाने के बाद भी कई बार फसल का सही दाम नहीं मिल पाता. इस समस्या को दूर करने के लिए किसान अब नकदी फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं. फूलों की खेती एक ऐसा विकल्प बनकर उभरी है, जो किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ एक तय और लगातार आमदनी दे सकती है. झारखंड सरकार का उद्यान विभाग भी इस दिशा में किसानों को मजबूत करने के लिए आगे आया है. राष्ट्रीय बागवानी मिशन के जरिए किसानों को नई तकनीकों और आर्थिक मदद से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के फूलों की व्यावसायिक खेती शुरू कर सकें.
लागत कम करने के लिए सरकारी मदद
पारंपरिक फसलों में खाद, बीज, कीटनाशक और सिंचाई के बढ़ते खर्च ने खेती को काफी खर्चीला बना दिया है. ऐसे में अगर पैदावार बेचने पर सही भाव न मिले, तो किसान कर्ज के बोझ तले दब जाता है. इसी परेशानी का हल निकालने के लिए फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. उद्यान विभाग की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत योग्य किसानों को सौ फीसदी तक की आर्थिक सहायता यानी अनुदान दिया जा रहा है. इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान को अपनी जेब से बहुत ज्यादा पूंजी नहीं लगानी पड़ती. शुरुआत में लगने वाली लागत का एक बड़ा हिस्सा सरकार द्वारा उठाए जाने से किसानों का जोखिम बहुत कम हो जाता है. जिन किसानों के पास अपनी खुद की कृषि भूमि है, वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने खेतों में खुशहाली ला सकते हैं.
बाजार में हमेशा बनी रहती है फूलों की भारी मांग
त्योहारों का मौसम हो, शादी-ब्याह का अवसर हो या फिर रोजमर्रा की पूजा-अर्चना, फूलों की जरूरत हर घर और बाजार में हमेशा बनी रहती है. किसान अपने इलाके की मांग के हिसाब से अलग-अलग तरह के फूलों का चुनाव कर सकते हैं. गेंदा एक ऐसा फूल है जिसकी मांग सालों भर सबसे ज्यादा रहती है. धार्मिक कार्यक्रमों, मंदिर परिसरों और सजावट के काम में गेंदे के फूलों की भारी खपत होती है. इसके अलावा किसान गुलाब, रजनीगंधा और जरबेरा जैसे अधिक कीमत वाले फूलों की खेती भी आसानी से कर सकते हैं. अगर किसान अपने पास के स्थानीय बाजार की जरूरतों को समझकर खेत में सही फूल लगाएं, तो उन्हें अपनी पैदावार बेचने के लिए दूर की मंडियों में नहीं जाना पड़ेगा और सीधे स्थानीय स्तर पर ही बढ़िया नकद दाम मिल जाएगा.
योजना का लाभ लेने के लिए आसान आवेदन प्रक्रिया
इस सरकारी योजना से जुड़ने की प्रक्रिया को काफी सरल बनाया गया है ताकि गांव-देहात के किसानों को किसी तरह की उलझन न झेलनी पड़े. योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास पहचान पत्र, आधार कार्ड, सक्रिय मोबाइल नंबर और अपनी जमीन के पूरे कागजात होने चाहिए. इन कागजातों में जमीन का कुल रकबा, खाता संख्या और खसरा से जुड़ी सही जानकारी शामिल होनी चाहिए. किसान अपने आवेदन पत्र को तैयार करके उस पर अपने इलाके के जनप्रतिनिधि, प्रखंड कृषि पदाधिकारी या बीटीएम के दस्तखत करा सकते हैं. इसके बाद इस पूरे आवेदन को संबंधित जिले के उद्यान विभाग कार्यालय में जमा कराना होता है. विभाग के अधिकारी जमीन और दस्तावेजों की जांच-पड़ताल करते हैं और प्रक्रिया पूरी होते ही किसान को योजना का लाभ दे दिया जाता है.
कम जमीन में भी युवाओं के लिए बढ़िया रोजगार
फूलों की खेती की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी किसान के पास बहुत बड़े रकबे की जमीन होना जरूरी नहीं है. अगर किसी किसान के पास कम जमीन भी है, तो वह उसके एक छोटे हिस्से में फूलों की बागवानी शुरू कर सकता है. बाकी बचे खेत में उसकी पुरानी पारंपरिक फसलें भी चलती रहेंगी. इस तरह जमीन का सही इस्तेमाल होगा और हर महीने नकद पैसे का इंतजाम भी बनता रहेगा. ग्रामीण इलाकों के बेरोजगार युवाओं के लिए भी यह एक बेहतरीन स्वरोजगार का जरिया है. आधुनिक तकनीकों को अपनाकर और सरकारी मदद की बदौलत युवा अपने गांव में रहकर ही एक सफल कृषि उद्यमी बन सकते हैं और दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं.
खेती शुरू करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
किसी भी नई फसल को लगाने से पहले उसकी जमीनी हकीकत को जान लेना बहुत जरूरी होता है. फूलों की खेती करने की योजना बना रहे किसानों को सबसे पहले अपने नजदीकी बाजारों का दौरा करना चाहिए. उन्हें यह समझना होगा कि उनके आसपास के बाजार में किस फूल की बिक्री सबसे तेज है और थोक भाव क्या चल रहे हैं. इसके साथ ही अपने खेत की मिट्टी, पानी की सुविधा और मौसम की अनुकूलता को देखना भी जरूरी है. योजना से जुड़ी मौजूदा शर्तों, नियमों और अनुदान की ताजा जानकारी पाने के लिए सीधे अपने जिले के उद्यान विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करना सबसे अच्छा कदम रहेगा. सही जानकारी और सरकारी सहयोग से शुरू की गई फूलों की खेती किसानों के जीवन में निश्चित रूप से समृद्धि ला सकती है.
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गोविंदा और कोमल रानी के अफेयर के सवाल पर बेटी टीना का रिएक्शन हुआ वायरल, कही दो टूक बात
Tina Ahuja Reacts Govinda-Komal Rani Affair: गोविंदा (Govinda) और कोमल रानी स्वर्णकार (Komal Rani Swarnkar) के कथित अफेयर को लेकर काफी लंबे समय से विवाद देखने के लिए मिल रहा है. सुनीता आहूजा (Sunita Ahuja) कई बार गोविंदा और कोमल रानी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधती हुई नजर आती हैं. उन्होंने गोविंदा के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की वजह से तलाक की अर्जी दी थी हालांकि उन्होंने बाद में यह अर्जी वापस ले ली थी. लेकिन इसके बाद बावजूद दोनों की शादीशुदा लाइफ तनाव है. इस मामले ने तूल उस समय पकड़ा जब कोमल और गोविंदा एक साथ लालबागचा राजा पंडाल में गणपति दर्शन करने पहुंचे थे. जिस पर सुनीता ने रिएक्ट किया था. वहीं, जब मामला ज्यादा बढ़ गया तो कोमल ने भी इस मामले में अपनी सफाई दी थी. गोविंदा और सुनीता को लेकर आए दिन रिएक्शन सामने आ जाता है. अब हाल ही गोविंदा की बेटी टीना से गोविंदा और कोमल रानी के अफेयर को लेकर सवाल किया गया.जिस पर उन्होंने दो टूक जवाब दिया.
कोमल रानी के अफेयर के सवाल पर बेटी टीना का रिएक्शन हुआ वायरल
दरअसल, गोविंदा की बेटी टीना हाल ही में एक इवेंट में नजर आईं थीं. जहां मीडिया ने उनसे गोविंदा और कोमल रानी के कथित अफेयर को लेकर सवाल किया. लेकिन उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए इस पर रिएक्ट करने से साफ मना कर दिया. बता दें कि हाल ही में कोमल रानी ने उनकी मां सुनीता आहूजा पर कई गंभीर आरोप लगाए थे.उनसे मीडिया ने पूछा,'कोमल रानी इंस्टाग्राम पर आपकी मम्मी सुनीता आहूजा पर कई आरोप लगा रही हैं.' उन्होंने मामले से दूरी बनाते हुए बिना जवाब दिए वहां से निकल गईं. उन्होंने सवाल सुनते ही तुरंत इसे टाल दिया और कहा, 'प्लीज हम यहां सिर्फ इवेंट के बारे में बात करते हैं... धन्यवाद.'
पापा गोविंदा के अफेयर से परेशान हुईं टीना आहूजा
दरअसल, जब मीडिया ने उनसे गोविंदा के अफेयर को लेकर सवाल किया तो टीना के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट तो थी, लेकिन फैमली से जुड़े सवाल पर उनका भी गुस्सा भी दिखा. टीना को देखकर साफ पता चल रहा है कि वह इस परिवारिक कलेश से परेशान हो गई हैं. इस दौरान टीना ने ना ही अपनी मम्मी का पक्ष लिया और ना ही कोमल के खिलाफ कुछ बोला. इससे पता चलता है कि वो इस मुद्दे पर कुछ बात नहीं करना चाहती हैं और इससे दूर रहना पसंद करती हैं.
सुनीता-गोविंदा के बीच क्या है विवाद
दरअसल, सुनीता आहूजा काफी लंबे समय से गोविंदा पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का आरोप लगाती आ रही हैं. इस दौरान उन्होंने गोविंदा को लेकर खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने गोविंदा से तलाक लेने के लिए कोर्ट में अर्जी भी डाल थी लेकिन बाद में उन्होंने यह अर्जी वापस ले ली थी. उस दौरान समझा जा रहा था कि दोनों के बीच अब सबकुछ ठीक होने वाला है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. गणेश चतुर्थी के मौके पर भी दोनों साथ नहीं नजर आए थे और कई फैमिली इवेंट पर दोनों ने एक दूसरे दूरी बनाई रखी. इस मामले ने तूल उस दौरान पकड़ा. जब गोविंदा-कोमल रानी के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे थे. उनका यह वीडियो काफी वायरल हुआ. इस पर भी सुनीता ने रिएक्ट किया था. उन्होने गोविंदा पर तंज कसते हुए कहा था कि जानवर भी इंसान से अच्छे होते हैं. इस वीडियो के बाद सुनीता ने एक और वीडियो जारी किया. जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर बिना नाम लिए कोमल पर भी निशाना साधा था. उन्होंने कोमल को अपनी लाइफ की राक्षस बताया था और लोगों से इस मामले में सपोर्ट भी मांगा था.
कोमल रानी ने सुनीता पर किया था पलटवार
कोमल रानी ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर हैंडल पर स्टोरी पोस्ट की थी. जिसमें उन्होंने सुनीता का नाम लिए बिना उन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था, 'जो औरत अपने ही पति को सालों से जान से मारने की कोशिश कर रही हो, ऐसी औरतों की बददुआएं किसी को नहीं लगतीं...मुझे समझ नहीं आता कि एक महिला किस तरह के दर्द से गुज़र रही है, जहां वह उसे ठीक करने की कोशिश करने के बजाय सबके सामने उसका प्रदर्शन करने में मज़ा लेती दिख रही है.' इसके अलावा उन्होंने हाल ही कई पोस्ट किए. जिसमें उन्होंने सुनीता, दिव्या खोसला और कश्मीरा शाह पर को करारा जवाब था. इस नोट में कोमल रानी ने गोविंदा संग फिल्म, अफेयर, लालबागचा राजा के दर्शन समेत तमाम आरोपों का जवाब दिया था. जिसकी काफी चर्चा हुई थी.
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