Responsive Scrollable Menu

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली-मुंबई में क्यों सड़कों पर उतरे लोग, 3 दिन के प्रदर्शन में अब तक क्या-क्या हुआ?

देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई में 2 अक्टूबर से 4 अक्टूबर 2026 तक चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब की है.

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया, जबकि मुंबई में विरोध ने रविवार को बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया. यहां शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकाला.

लेकिन आखिर तीन दिनों में दिल्ली और मुंबई में क्या-क्या हुआ और SIR को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ? आइए पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार समझते हैं.

2 अक्टूबर: गांधी जयंती पर दिल्ली में प्रदर्शन की शुरुआत

2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन दिल्ली में विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने जंतर-मंतर की तरफ मार्च करने की कोशिश की.

प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब दिया जाए.

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की और निषेधाज्ञा लागू की. अलग-अलग जगहों से जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया. रिपोर्टों के मुताबिक, पहले दिन 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई. हिरासत में लिए गए लोगों में आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी समेत कई राजनीतिक नेता और कार्यकर्ता शामिल थे.

सुरक्षा व्यवस्था के तहत मध्य दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई और कुछ मेट्रो स्टेशन भी अस्थायी रूप से बंद किए गए.

3 अक्टूबर: प्रदर्शन जारी, FIR भी दर्ज

अगले दिन यानी 3 अक्टूबर को भी प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहा. प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर के आसपास जुटने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया.

इस दौरान प्रदर्शन से जुड़े लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं. सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी.

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तीन FIR दर्ज कीं. इनमें निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं.

इस बीच प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए, जबकि पुलिस का पक्ष सार्वजनिक व्यवस्था और लागू प्रतिबंधों को बनाए रखने पर केंद्रित रहा.

4 अक्टूबर: दिल्ली में ‘सिटिजन्स मार्च’

4 अक्टूबर को दिल्ली में विरोध और व्यापक हुआ. सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों के एक समूह ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की.

रविवार को भी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात रहे. प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग वही रही CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण.

वहीं, आंदोलन से जुड़े संगठनों और विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया है कि विरोध आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है. INDIA ब्लॉक से जुड़े दलों ने 7 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर संयुक्त प्रदर्शन करने की घोषणा भी की है.

मुंबई में 2 अक्टूबर को क्या हुआ?

दिल्ली के साथ-साथ मुंबई में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ. 2 अक्टूबर को युवा संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ प्रदर्शन किया.

इस संगठन के नेता अभिजीत दीपके ने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए. प्रदर्शन में कलाकारों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की भागीदारी भी बताई गई.

AP की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंदोलन केवल SIR के मुद्दे से नहीं जुड़ा है. CJP पहले बेरोजगारी और परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर भी प्रदर्शन कर चुका है.

मुंबई में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी और कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई की गई.

3 अक्टूबर: मुंबई में भी जारी रहा विरोध

3 अक्टूबर को मुंबई में प्रदर्शन जारी रहा, हालांकि रविवार के मुकाबले यह अपेक्षाकृत छोटा रहा.

इस दौरान SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों तथा सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे.

लेकिन 4 अक्टूबर को मुंबई में आंदोलन ने एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया.

4 अक्टूबर: उद्धव और राज ठाकरे एक मंच पर

4 अक्टूबर को मुंबई में ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकाला गया. इसकी सबसे बड़ी राजनीतिक खासियत यह रही कि शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और MNS प्रमुख राज ठाकरे लंबे समय बाद एक ही मंच पर नजर आए.

मार्च में कांग्रेस और शरद पवार गुट वाली NCP (SP) के नेताओं की भी भागीदारी रही. आयोजकों ने लोगों से पार्टी के झंडों की जगह तिरंगा लेकर आने की अपील की थी.

मोर्चे में मुख्य मांग CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को लेकर थी.

राज ठाकरे ने SIR की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द करने की मांग की. उन्होंने चुनाव में बैलेट पेपर की वापसी की मांग भी उठाई. दूसरी ओर उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए. ये सभी आरोप और मांगें राजनीतिक दलों के दावे हैं; चुनाव आयोग ने अनियमितता के आरोपों को खारिज किया है.

आखिर SIR को लेकर इतना विवाद क्यों?

इस पूरे विवाद की जड़ Special Intensive Revision यानी SIR है. चुनाव आयोग का तर्क है कि मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करना जरूरी है, ताकि मृत मतदाताओं, स्थान बदल चुके लोगों, डुप्लीकेट नामों या अन्य अयोग्य प्रविष्टियों को हटाया जा सके.

विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रक्रिया में दस्तावेजों और सत्यापन की शर्तों के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाता भी प्रभावित हो सकते हैं. उनका दावा है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है.

रॉयटर्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों से लाखों पात्र मतदाता प्रभावित हो सकते हैं और इसका राजनीतिक असर सत्तारूढ़ बीजेपी के पक्ष में जा सकता है. चुनाव आयोग और बीजेपी ने इन आरोपों से इनकार किया है.

विवाद में ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल

SIR विवाद के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग से जुड़े कुछ फैसलों में CEC की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल हैं.

इन याचिकाओं में SIR से जुड़े फैसलों, आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों जैसे मुद्दे उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होनी है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि अदालत में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं हैं.

5 और 7 अक्टूबर भी अहम 

तीन दिनों के विरोध के बाद मामला अब सड़क से अदालत और चुनाव आयोग के स्तर तक पहुंच गया है. एक तरफ विपक्षी दल CEC के इस्तीफे और SIR को लेकर विरोध तेज करने की तैयारी में हैं. दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपने फैसले को मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जोड़ रहा है.

7 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक का प्रस्तावित प्रदर्शन और 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस विवाद की अगली महत्वपूर्ण कड़ियां हैं.

इसलिए फिलहाल सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देंगे या नहीं. असली सवाल यह भी है कि SIR को लेकर उठे कानूनी और राजनीतिक सवालों पर चुनाव आयोग तथा अदालत का रुख क्या रहता है और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है.

यह भी पढ़ें - 

Continue reading on the app

वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर: एन. चंद्रशेखरन

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर स्थिति में बनी हुई है। उन्होंने इसके पीछे मजबूत घरेलू मांग, सेवा निर्यात और अनुकूल नीतिगत माहौल को प्रमुख कारण बताया।

इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट सिम्पोजियम 2026 में बोलते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में लगातार उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है और मजबूत विकास के रास्ते पर बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि कई संकेतक बताते हैं कि देश स्थिर और मजबूत स्थिति में है।

चंद्रशेखरन ने ऑटोमोबाइल बिक्री, क्रेडिट ग्रोथ, बिजली और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में मजबूत मांग को अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया।

उन्होंने कहा कि जीडीपी के 1 प्रतिशत से लगातार नीचे बना चालू खाता घाटा, जीडीपी के करीब 11 प्रतिशत के बराबर सेवा निर्यात, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की बेहतर स्थिति भी सकारात्मक आर्थिक परिदृश्य को समर्थन देने वाले प्रमुख संकेतक हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को हासिल करने के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे, मजबूत संस्थानों और बौद्धिक संपदा के समर्थन से समावेशी और टिकाऊ विकास की आवश्यकता होगी।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत एवं सटीक विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार और मानव पूंजी में निवेश महत्वपूर्ण होंगे।

चंद्रशेखरन ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र में बदलाव की भी आवश्यकता जताई। उन्होंने गुणवत्ता, नवाचार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर अधिक ध्यान देने की बात कही।

उन्होंने कहा कि भारत जर्मनी जैसे देशों से सीख सकता है, जिन्होंने इंजीनियरिंग, मानकों, सटीकता तथा मजबूत आपूर्तिकर्ता और छोटे एवं मध्यम उद्यमों के इकोसिस्टम के जरिए अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को मजबूत किया है।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि भारत में भी हमें इस तरह के बदलाव की जरूरत है।”

चंद्रशेखरन ने भारत की व्यापक विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं में टिकाऊ विनिर्माण को भी शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उनके अनुसार, इस तरह का बदलाव न केवल बड़ी कंपनियों के बीच बल्कि मध्यम स्तर के कारोबारी इकोसिस्टम में भी मजबूत नेतृत्व विकसित करने में मदद कर सकता है। साथ ही, इससे ऐसे विशेषज्ञ तैयार होंगे जो वैश्विक विनिर्माण मानकों और प्रथाओं में योगदान देने में सक्षम होंगे।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

India vs New Zealand: कुलदीप यादव होंगे टीम इंडिया से बाहर, नहीं जाएंगे न्यूजीलैंड?

न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया को 2 मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है. रिपोर्ट्स हैं कि कुलदीप यादव को टीम में मौका नहीं मिलेगा. Mon, 05 Oct 2026 16:21:39 +0530

  Videos
See all

Iran America War Live Updates: ईरान-अमेरिका में भीषण जंग| US Navy | Trump| Hormuz Crisis LIVE | N18G #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-05T11:10:20+00:00

Sanjay Nishad Controversy: अपने विवादित बयान पर Sanjay Nishad ने दी सफाई । UP Election 2027 #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-05T11:10:08+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers