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अंडरवियर में महिला के साथ नजर आए पूर्व ब्रिटिश राजदूत:एपस्टीन फाइल्स में सामने आई तस्वीर; PM स्टार्मर की पार्टी से इस्तीफा दिया, कहा- शर्मिंदगी नहीं देना चाहता

पूर्व ब्रिटिश राजदूत पीटर मैंडेलसन की अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े नए फाइल्स में एक तस्वीर सामने आई है। इसमें मैंडेलसन एक महिला के साथ सिर्फ अंडरवियर और शर्ट में नजर आए हैं, महिला बाथरोब में है। तस्वीर सामने आने के बाद मैंडेलसन ने पीएम कीर स्टार्मर की लेबर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। मंडेलसन ने कहा कि वे पार्टी को और शर्मिंदगी नहीं देना चाहते, इसलिए पार्टी की सदस्यता छोड़ रहे हैं। नए दस्तावेजों में बैंक रिकॉर्ड दिखाए गए हैं, जिनमें 2003 और 2004 में एपस्टीन ने मैंडेलसन से जुड़े खातों में कुल 75,000 अमेरिकी डॉलर के तीन अलग-अलग भुगतान किए थे, हर भुगतान 25,000 डॉलर का था। पिछले साल सितंबर में एपस्टीन से उनके पुराने संपर्क सामने आने के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था। स्टार्मर ने मैंडेलसन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें पिछले साल ही राजदूत पद से हटा दिया गया था और अब वे इस पर कुछ नहीं कहना चाहते। अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 जनवरी को जेफ्री एपस्टीन जांच से जुड़े करीब 30 लाख पन्नों के दस्तावेज, 2,000 वीडियो और 1.8 लाख तस्वीरें सार्वजनिक की हैं। एपस्टीन के कहने पर मंडेलसन ने वित्त विभाग पर दबाव डाला था जारी हुए दस्तावेजों में एक ईमेल सामने आया है, जिसमें 2009 में मंडेलसन ने एपस्टीन को बताया था कि वे ब्रिटिश सरकार पर बैंकर्स के बोनस पर टैक्स को लेकर लॉबिंग कर रहे हैं। दिसंबर 2009 के एक ईमेल में एपस्टीन ने मंडेलसन से पूछा था क्या बैंकरों के बोनस पर टैक्स सिर्फ कैश हिस्से पर लगाया जा सकता है। इसके जवाब में मंडेलसन ने लिखा कि वे इस पर जोर दे रहे हैं कि ऐसा ही हो, लेकिन ट्रेजरी इसका विरोध कर रही है। यह उस समय की बात है जब मंडेलसन बिजनेस सेक्रेटरी थे और वित्त मंत्री अलिस्टेयर डार्लिंग ने वित्तीय संकट के बाद बैंकों के बड़े बोनस पर 'सुपर टैक्स' लगाया था। वैश्विक वित्तीय संकट के बाद डार्लिंग ने 9 दिसंबर 2009 को बैंकों से मिलने वाले बड़े बोनस (बोनस जो £25,000 से ज्यादा हों) पर 50% सुपर टैक्स लगाने की घोषणा की थी। यह टैक्स बैंकों को ही देना पड़ता था। यह ईमेल दिखाता है कि 2009 में एपस्टीन ने मंडेलसन से अनुरोध किया कि वे सरकार से बैंकर बोनस टैक्स को कमजोर करने की कोशिश करें और मंडेलसन ने कहा कि वे वित्त विभाग पर दबाव डाल रहे हैं। विपक्ष ने मंडेलसन पर जांच की मांग की मंडेलसन के इस्तीफे के बाद लेबर पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी सभी शिकायतों को गंभीरता से लेती है और नियमों के अनुसार जांच होगा। वहीं, विपक्षी पार्टी ने मंडेलसन की अमेरिका में राजदूत नियुक्ति पर स्वतंत्र जांच की मांग की है। कंजर्वेटिव प्रवक्ता ने कहा कि मंडेलसन पूरी तरह से बदनाम हो चुके हैं, लेकिन कीर स्टार्मर ने उन्हें पार्टी से निकालने की हिम्मत नहीं दिखाई और उन्हें खुद इस्तीफा देने दिया। उन्होंने कहा कि स्टार्मर और उनके चीफ ऑफ स्टाफ ने एपस्टीन से संबंध होने के बावजूद मंडेलसन को राजदूत बनाया और सबूत बढ़ने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। अब प्रधानमंत्री की खराब निर्णय क्षमता को देखते हुए स्वतंत्र जांच जरूरी है। मंडेलसन के पति का नाम भी एपस्टीन फाइल्स में सामने आया मंडेलसन (समलैंगिक) के ब्राजीलियाई पति रेनाल्डो अविला दा सिल्वा का नाम (दोनों ने 2023 में शादी की) भी इन फाइलों में आया है। 2009 में, जब एपस्टीन जेल से रिहा होकर निकले थे, तब दा सिल्वा ने एपस्टीन को ईमेल करके ऑस्टियोपैथी कोर्स की फीस के लिए पैसे मांगे। उस समय मंडेलसन बिजनेस सेक्रेटरी थे और दा सिल्वा के साथ रिश्ते में थे। दा सिल्वा ने £3,225 की फीस और अन्य खर्चों के लिए बैंक डिटेल्स भेजे। एपस्टीन ने तुरंत पैसे भेजने का वादा किया। मंडेलसन ने एपस्टीन को ईमेल करके कहा कि गिफ्ट टैक्स से बचने के लिए इसे लोन दिखाया जाए। कुछ दिन बाद दा सिल्वा ने धन्यवाद दिया कि पैसे उनके खाते में आ गए। 2010 में भी एपस्टीन ने दा सिल्वा को 13,000 डॉलर और हर महीने 2,000 डॉलर भेजने को कहा। मंडेलसन ने पीड़ित महिलाओं और लड़कियों से माफी मांगी मंडेलसन और एपस्टीन की दोस्ती 2002 से शुरू होकर 2011 तक चली। इस दौरान मंडेलसन टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में कैबिनेट मंत्री रहे। पिछले साल सितंबर में उन्हें एपस्टीन के लिए लिखे गए एक 'बर्थडे बुक' मैसेज के कारण राजदूत पद से हटा दिया गया था, जिसमें उन्होंने एपस्टीन को 'माई बेस्ट पाल' कहा और जेल से जल्दी रिहाई के लिए लड़ने की सलाह दी। फ्लाइट रिकॉर्ड से पता चलता है कि मंडेलसन एपस्टीन के प्राइवेट जेट 'लोलिता एक्सप्रेस' में यात्रा कर चुके हैं और न्यूयॉर्क, पाम बीच और कैरेबियन द्वीप पर उनके घर में रुक चुके हैं। कुछ पुरानी तस्वीरों में उन्हें बाथरोब और स्विमिंग ट्रंक्स में भी देखा गया है। मंडेलसन ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि एपस्टीन की सजा के बाद भी उन पर भरोसा करना गलत था और दोस्ती जारी रखना भी गलत था। उन्होंने पीड़ित महिलाओं और लड़कियों से बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने कहा कि वे एपस्टीन के अपराधों में कभी शामिल या दोषी नहीं थे और असली सच्चाई उनकी मौत के बाद पता चली। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है।

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तालिबान ने गर्भनिरोधक गोलियों पर रोक लगाई:चेतावनी देकर दवाएं नष्ट कर रहे; महिलाओं को प्रेगनेंसी और मिसकैरेज में इलाज नहीं मिल पा रहा

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। तालिबानी डॉक्टरों को धमकी देते हैं कि दवा दी तो क्लीनिक बंद करा देंगे। देशभर में क्लीनिक भी बंद हो रहे हैं। महिलाओं को गर्भधारण या मिसकैरेज का इलाज नहीं मिल पा रहा। बदगीस प्रांत की एक निजी क्लीनिक में चेतावनी देते हुए सभी दवाएं नष्ट कर दी गईं। जवजजान प्रांत में 30 साल से क्लीनिक चला रही एक डॉक्टर कहती हैं, तालिबान के सत्ता आने के बाद गर्भनिरोधक गोली तेजी से खत्म हो रही हैं। यहां 70 में से 30 महिलाओं को इसकी जरूरत होती थी, अब हम कह देते हैं कि हमारे पास कुछ भी नहीं है। कंधार प्रांत सहित कई जगहों पर सीधे पुरुष डॉक्टरों से इलाज लेने पर सख्ती है। ये तीन कहानियां, जो उम्रभर का दर्द बढ़ा रहीं उम्र 36 साल, 9 बच्चे: 36 साल की परवाना अब अपने बच्चों को पहचान ही नहीं पाती। कंधार के गांव में अपनी मां के घर पर बैठी, वह चुपचाप हिलती रहती हैं। नौ बार गर्भवती और छह बार मिसकैरेज हो चुका है। पति और ससुराल वालों के दबाव में परवाना मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुकी हैं। उनकी मां शरीफा कहती हैं, उन्हें डर और लगातार प्रेगनेंसी ने तोड़ दिया है। उम्र 42 साल, 12 बच्चे: कंधार की 42 साल की शकीबा। 12 बच्चों की मां हैं। वे बताती हैं कि अब उन्हें उठना भी मुश्किल होता है। हड्डियों में दर्द रहता है। पति किसी भी गर्भनिरोधक को लेने से साफ मना कर देते हैं। 29 साल की उम्र में ही हालत बदतर : 29 साल की जरघोना भूकंप के बाद तंबू में रहने लगी थीं। लगातार तीन दिन टॉयलेट नहीं जा सकीं। उन्हें आंत की समस्या हुई। डॉक्टरों ने चेताया कि अब गर्भवती हुई, तो जान जा सकती है। लेकिन एक साल बाद फिर गर्भ ठहर गया। बच्चे को जन्म दिया। जान तो बच गईं, लेकिन अब रक्तस्राव से जूझ रही हैं। चिकित्सा सुविधा न के बराबर, फंडिंग भी बड़ी समस्या संयुक्त राष्ट्र और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन(WHO) के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय फंडिंग पिछले साल कम होने से 440 से ज्यादा अस्पताल और क्लिनिक बंद हो गए। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं कई घंटे चलकर क्लिनिक तक पहुंचती हैं। महिलाएं अकेले ही घर पर जन्म देती हैं। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली 80% महिलाएं कुपोषित हैं। उनमें एनीमिया, विटामिन की कमी और लो ब्लड प्रेशर है। ये बड़ी पाबंदियां: 2024 में खुले में बोलने पर रोक लगाई थी अफगानिस्तान में तालिबान ने 27 अगस्त 2024 को महिलाओं को सख्त हिदायत देते हुए उनके घर से बाहर बोलने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही उन्हें सार्वजनिक जगहों पर हमेशा अपने शरीर और चेहरे को मोटे कपड़े से ढकने का आदेश दिया गया था। अंग्रेजी अखबार द गार्जियन के मुताबिक तालिबान ने इन कानूनों के पीछे की वजह देते हुए कहा है कि महिलाओं की आवाज से भी पुरुषों का मन भटक सकता है। इससे बचने के लिए महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर बोलने से पहरेज करना चाहिए। 'पुरुष भी खुद को ढकें' तालिबान के सुप्रीम लीडर मुल्ला हिबातुल्लाह अखुंदजादा ने नए कानूनों को मंजूरी दी थी। इन कानूनों को हलाल और हराम की दो कैटेगरी में बांटा गया है। तालिबान के इस फैसले की संयुक्त राष्ट्र संघ ने कड़ी निंदा की थी। साथ ही कई मानवाधिकार संगठनों ने भी इसे लेकर आपत्ति भी जताई थी। पूरी खबर पढ़ें… 15 अगस्त 2021 को तालिबान को दोबारा सत्ता मिली थी 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान की सत्ता दूसरी बार तालिबान के हाथ आई। उसी दिन से महिलाओं पर प्रतिबंध बढ़ गए थे। सबसे पहले अलग-अलग सरकारी संस्थानों में काम कर रही महिलाओं से उनकी नौकरियां छीनी गई। फिर उनकी पढ़ाई पर पाबंदियां लगाई गई। अफगानिस्तान में महिलाएं सिर्फ छठी कक्षा तक ही पढ़ाई कर सकती हैं। न सिर्फ महिलाओं पर प्रतिबंध बल्कि तालिबान ने सत्ता में आने के बाद कई ऐसे कानून लागू किए हैं जो मानवाधिकारों के खिलाफ हैं। इनमें सबसे अहम सार्वजनिक जगहों पर सजा देना है। क्या है अफगानिस्तान का शरिया कानून तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद कहा था कि देश में शरिया कानून लागू होगा। दरअसल, शरिया इस्लाम को मानने वाले लोगों के लिए एक लीगल सिस्टम की तरह है। कई इस्लामी देशों में इसका इस्तेमाल होता है। हालांकि, पाकिस्तान समेत ज्यादातर इस्लामी देशों में यह पूरी तरह लागू नहीं है। इसमें रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर कई तरह के बड़े मसलों पर कानून हैं। शरिया में पारिवारिक, वित्त और व्यवसाय से जुड़े कानून शामिल हैं। शराब पीना, नशीली दवाओं का इस्तेमाल करना या तस्करी, शरिया कानून के तहत बड़े अपराधों में से एक है। यही वजह है कि इन अपराधों में कड़ी सजा के नियम हैं।

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