कमांडो का पति लोन की बात बताने पर भड़का:मां बोली- सोनीपत में भाई को कॉल की तो फोन छीना, फिर डंबल सिर पर मारा
सोनीपत की रहने वाली दिल्ली पुलिस की कमांडो काजल की हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। काजल की मां मीना ने बताया कि 22 जनवरी को घटना वाली रात काजल और अंकुर के बीच जब झगड़ा हुआ तो काजल ने गुस्से में लोन लेने वाली बात अपनी भाई को बता दी। काजल ने निखिल को बताया कि अपनी शादी में उसने 10 लाख रुपए का लोन लिया था। 5 लाख रुपए अंकुर और 5 लाख रुपए परिवार को शादी के लिए दिए थे। मीना ने आगे बताया कि अंकुर के कहने पर ही उसने 5 लाख रुपए वाली बात अपने परिवार से छिपाई। झगड़े के बाद जब काजल ने निखिल को यह बात बताई तो अंकुर नाराज हो गया। इसी के बाद उसने फोन छीनकर काजल के सिर पर डंबल मार दिया, जिसमें उसकी मौत हो गई। पहले जानिए 22 जनवरी की रात क्या हुआ…. अब जानिए मां ने हत्या के क्या कारण बताए…. कार नहीं दी तो बदसूरत लगने लगी मीना ने बताया कि 2022 में जब काजल की दिल्ली पुलिस में नौकरी लगी, तो अंकुर का परिवार एक रुपए में शादी करने की बात कर रहा था। तिलक की रस्म के दौरान जब सवा लाख रुपए और कार नहीं दी गई, तो उसके परिवार के लोगों को वही काजल बदसूरत लगने लगी। अंकुर के परिवार को दहेज का लालच था। उन्हें लगता था कि दोनों भाई-बहन दिल्ली पुलिस में हैं, तो अच्छा दहेज मिलेगा। उन्होंने अपनी हैसियत से ज्यादा दहेज दिया, फिर भी काजल को प्रताड़ित किया गया। जबकि, पहले अंकुर का परिवार खुद बार-बार उनके घर रिश्ते के लिए आ रहा था। काजल को अवैध संबंधों का पता था मीना ने बताया कि अंकुर रुड़की में कंप्यूटर लैब भी चलाता है। उसके वहां जाने के चलते मैं दो बार काजल के पास दिल्ली फ्लैट में रुककर आई हूं। अंकुर काफी चंचल है और किसी को भी अपने जाल में आसानी से फंसा लेता है। पहले भी वह इसी प्रकार से रहता था। बाद में पता चला कि वह लड़कियों के साथ रहता है। कॉल डिटेल से पता लगेगा कि वह किस-किस के संपर्क में था। काजल को उसके अवैध संबंधों की जानकारी थी, इसी के चलते उसकी हत्या की। 4 महीनों से अंकुर का व्यवहार बदला मां ने बताया कि 1 मार्च 2025 को काजल के भाई निखिल की शादी थी। तब अंकुर आया था और डांस भी किया था। पिछले 4 महीने से वह काजल को न लेने आया और न ही छोड़ने आया। पहले उसका व्यवहार ठीक था। कुछ महीनों पहले अंकुर ने फ्लैट पर काजल से मारपीट की थी। रात को ही निखिल काजल को लेने के लिए गया था तो इस दौरान अंकुर ने अपने बेटे देवांश की कसम खाकर हाथ-पैर जोड़कर कहा था कि आज के बाद ऐसा नहीं करेगा। डबल मर्डर का केस हो सकता है मीना का कहना है कि 19 जनवरी को काजल अपने मायके बड़ी गांव आई थी। वह गन्नौर के एक निजी अस्पताल में अलट्रासाउंड कराने गई थी। इसके बाद काजल दिल्ली चली गई थी। काजल का भाई निखिल अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट लेने अस्पताल गया था, वहां उसे कहा गया कि दिल्ली पुलिस को ही उपलब्ध कराई जाएगी। परिवार ने अपनी शिकायत में डबल मर्डर लिखकर दिया था। हो सकता है कि रिपोर्ट मिलने के बाद अंकुर के खिलाफ पुलिस डबल मर्डर का केस दर्ज करे। ----------------------------------- ये खबर भी पढ़ें :- कमांडो काजल की अंकुर से बस में हुई मुलाकात:सोनीपत में लव-मैरिज के लिए परिवार की सरकारी नौकरी की शर्त; पहले अटेम्प्ट में पेपर क्लियर हरियाणा में सोनीपत की रहने वाली दिल्ली पुलिस की कमांडो काजल की हत्या में नया खुलासा हुआ है। काजल की मां मीना के अनुसार, काजल जिस स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ती थी, उसी स्कूल में उसके पति अंकुर की छोटी बहन निधि पढ़ाती थी। पढ़ें पूरी खबर…
फिजिकल हेल्थ- सिगरेट छोड़ दीजिए, मेमोरी अच्छी हो जाएगी:45 साल के बाद छोड़ना भी फायदेमंद, स्मोकिंग से होतीं 10 बड़ी बीमारियां
क्या आपकी उम्र 40 पार है और आप अभी भी सिगरेट पीते हैं? आपको पता है कि सिगरेट नुकसान करती है, लेकिन फिर भी लगता है कि छोड़ने के लिए अब बहुत देर हो चुकी। जितना नुकसान होना था, हो चुका है। अगर ऐसा है तो आपके लिए खुशखबरी है। हाल ही में हेल्थ जर्नल 'लैंसेट हेल्दी लॉन्गेविटी' में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, 40 के बाद भी अगर आपने सिगरेट पीना छोड़ दिया तो आपकी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता उन लोगों के मुकाबले बेहतर होगी, जो 40 के बाद भी सिगरेट पिए जा रहे हैं। इसलिए अभी भी देर नहीं हुई है। इस स्टडी में 40 साल या उससे अधिक उम्र के 9,436 लोगों के डेटा का अध्ययन किया गया। इसमें वे लोग शामिल थे, जिन्होंने स्मोकिंग छोड़ दी थी और वे भी, जो अभी भी स्मोक कर रहे थे। दोनों तरह के लोगों की मेमोरी और बोलने की क्षमता जैसे कई टेस्ट किए गए। स्टडी में पता चला कि स्मोकिंग छोड़ने से सिर्फ लंग्स और हार्ट हेल्थ नहीं सुधरती है, बल्कि ब्रेन हेल्थ में भी सुधार होता है। डिमेंशिया का जोखिम भी कम हो जाता है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज जानेंगे कि स्मोकिंग छोड़ने के बाद ब्रेन हेल्थ कैसे सुधरती है। साथ ही जानेंगे कि- स्मोकिंग से ब्रेन को क्या नुकसान होता है? स्मोकिंग के कारण ब्रेन तक खून सप्लाई करने वाली ब्लड वेसल्स को नुकसान होता है। इससे फ्री रेडिकल्स बढ़ते हैं और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है। इसके कारण ब्रेन सेल्स डैमेज होती हैं। इससे धीरे-धीरे कॉग्निटिव डिक्लाइन (ब्रेन के काम करने की क्षमता में कमी) होता रहता है, जो डिमेंशिया की वजह बनता है। स्मोकिंग से किन बीमारियों का जोखिम बढ़ता है? सिगरेट का धुआं फेफड़ों से होकर हार्ट तक पहुंचता है, फिर खून के जरिए पूरे शरीर में फैलता है। इसमें निकोटिन, कार्बन मोनोऑक्साइड और हजारों कार्सिनोजेन्स होते हैं, जो कैंसर का कारण बनते हैं। स्मोकिंग से हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, डायबिटीज और कैंसर का खतरा कई गुना हो जाता है। ग्राफिक में देखिए स्मोकिंग से कौन सी बीमारियां होती हैं- डॉ. रोहित शर्मा के मुताबिक, इन बीमारियों से बचाव का एकमात्र तरीका स्मोकिंग छोड़ना ही है। शरीर खुद को हील करने की क्षमता रखता है, लेकिन जो लोग लंबे समय से स्मोकिंग कर रहे हैं, उन्हें ज्यादा वक्त लगता है। धैर्य रखें, रिजल्ट्स धीरे-धीरे दिखेंगे। सिगरेट छोड़ने के लिए कभी देर नहीं होती लैंसेट की इस स्टडी से पता चलता है कि कोई व्यक्ति किसी भी उम्र में स्मोकिंग छोड़े, उसकी ब्रेन हेल्थ में रिकवरी जरूर होती है। जबकि लोग सोचते हैं कि अगर स्मोकिंग करते हुए ज्यादा उम्र बीत गई है तो छोड़ने का कोई मतलब नहीं है। अगर स्मोकर्स को ये पता चले कि किसी भी उम्र में सिगरेट छोड़ने से याददाश्त और सोचने की क्षमता बेहतर हो सकती है, तो ये उनके लिए बड़ी प्रेरणा बन सकती है। इसके बाद शरीर में क्या बदलाव आते हैं? स्मोकिंग छोड़ने के तुरंत बाद शरीर हीलिंग शुरू कर देता है। इसके 2 से 3 हफ्तों बाद ही शरीर में सकारात्मक सुधार दिखने लगते हैं। इसके 1 से 9 महीनों के बीच शरीर धीरे-धीरे खुद को रिपेयर करता है। ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है, फेफड़े साफ होने लगते हैं, सांस नहीं फूलती है और शख्स अधिक ऊर्जावान महसूस करने लगता है। स्मोकिंग कैसे छोड़ें इसके लिए सबसे पहले कोई मोटिवेशन ढूंढें। आप इसे ऐसे सोच सकते हैं कि परिवार में किसी को पैसिव स्मोकर नहीं बनाना चाहते हैं। पैसिव स्मोकर यानी वह व्यक्ति, जो खुद स्मोकिंग नहीं करता, लेकिन स्मोकर के आसपास रहने के कारण उसके छोड़े गए धुएं को सांस के जरिए अंदर लेता है। खुद की अच्छी सेहत या लंबे जीवन के लिए प्रण ले सकते हैं। सिगरेट छोड़ने के लिए अगर आपको अपना मोटिवेशन नहीं पता है तो नीचे दिए ग्राफिक से चुन सकते हैं- स्मोकिंग छोड़ने के असरदार तरीके स्मोकिंग छोड़ने के कॉमन तरीकों से हटकर हम कुछ ऐसा बता रहे हैं, जो आपकी इस जर्नी को ज्यादा इंटरेस्टिंग बनाएंगे। ग्राफिक में देखिए- चलिए समझते हैं कि ये किताबें सिगरेट छोड़ेने में कैसे मदद करती हैं- 1. द इजी वे टू स्टॉप स्मोकिंग एलेन कार की यह किताब सिगरेट के मेंटल एडिक्शन को खत्म करती है। डर, तनाव कम करने के साथ “सिगरेट के बिना नहीं रह सकते” वाली सोच को खत्म करती है। इससे स्मोकिंग छोड़ना आसान हो जाता है। आपको ज्यादा स्ट्रगल नहीं करना पड़ता है। 2. स्मोक फ्री इन 30 डेज डेनियल एफ. साइडमेन की यह किताब 30 दिन का स्टेप-बाय-स्टेप प्लान देती है। रोज छोटे लक्ष्य तय करने में मदद करती है। इससे निकोटिन क्रेविंग और मूड स्विंग का रिस्क कम होता है और धीरे-धीरे आदत छूटती है। 3. हाऊ टू स्टॉप स्मोकिंग: 30 सॉल्यूशन टू सूट यू मैथ्यू एल्ड्रिक ने इस किताब में बताया है कि हर स्मोकर एक जैसा नहीं होता। इसलिए यह किताब 30 अलग-अलग तरीकों से सिगरेट छोड़ने के ऑप्शन देती है, ताकि व्यक्ति अपनी पर्सनैलिटी, लाइफस्टाइल और ट्रिगर्स के हिसाब से सही तरीका चुन सके। 4. स्टॉप स्मोकिंग विद CBT मैक्स पेंबर्टन की यह किताब CBT यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी पर आधारित है। यह सिखाती है कि स्ट्रेस, गुस्सा या बोरियत में सिगरेट की इच्छा क्यों होती है और उन थॉट पैटर्न्स को कैसे बदला जाए। 5. स्टॉप स्मोकिंग स्टे कूल रिचर्ड क्रेज की यह किताब सिगरेट छोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाती है। रियल-लाइफ अनुभवों के जरिए बताती है कि शुरुआती दिनों की बेचैनी सामान्य है और सही माइंडसेट से इसे बिना दबाव के संभाला जा सकता है। पॉडकास्ट भी करेंगे मदद पॉडकास्ट के लिए आपको अतिरिक्त समय देने की भी जरूरत नहीं है। इन पॉडकास्ट को आप वॉक करते समय, ऑफिस जाते समय या किचन में खाना पकाने के दौरान सुनें। इन्हें लगातार सुनने से क्रेविंग, ट्रिगर्स और मेंटल ब्लॉक्स को पहचानकर ठीक करना आसान होता है। ग्राफिक में देखिए- ये पॉडकास्ट स्मोकिंग छोड़ने में कैसे मददगार हैं, समझिए फ्रीडम फ्रॉम स्मोकिंग: द एलेन कार जर्नी इस पॉडकास्ट में एलेन कार का मेथड और उनकी असली क्विट जर्नी साझा की गई है। असली कहानियों से मोटिवेशन मिलता है, जिससे आदत की जड़ समझने और छोड़ने में मदद मिलती है। एलेन कार एक ब्रिटिश लेखक थे। उन्होंने 'इजी वे टू स्टॉप स्मोकिंग' नाम की मशहूर किताब लिखी, जिसकी मदद से दुनियाभर में लाखों लोगों ने बिना स्ट्रगल किए स्मोकिंग छोड़ी। स्टॉप स्मोकिंग हिप्नोसिस जेसन न्यूलैंड की यह सीरीज हिप्नोसिस और रिलैक्सेशन मेथड से माइंड को रीप्रोग्राम करती है, क्रेविंग को कम करती है और तनाव से निपटने में मदद करती है। जेसन न्यूलैंड एक ब्रिटिश हिप्नोथेरपिस्ट हैं, जो खास तौर पर स्टॉप स्मोकिंग हिप्नोसिस के लिए जाने जाते हैं। क्विट स्मोकिंग टुडे पॉडकास्ट वैज्ञानिक टिप्स, कॉग्निटिव कोचिंग और हिप्नोसिस मेथड के साथ यह पॉडकास्ट कदम-दर-कदम गाइड करता है कि कैसे तकलीफ के बिना स्मोकिंग छोड़ना संभव है। क्विट स्मोकिंग नाऊ पॉडकास्ट विद डॉ. डेनियल सेडमेन डॉ. साइडमेन के एक्सपर्ट सेशन छोटे, असरदार हैं। ये अलग-अलग टॉपिक पर फोकस करते हैं, ताकि आप अपनी पुरानी सोच और आदत को बदल सकें। यू कैन क्विट स्मोकिंग इंस्पायरिंग इंटरव्यू और रियल लाइफ कहानियों के जरिये यह पॉडकास्ट आपके मनोबल को मजबूत बनाता है। साथ ही यह विश्वास दिलाता है कि सिगरेट छोड़ना संभव है। ……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- रोज एक ही समय पर सोएं–जागें: अनियमित नींद से बढ़ता है 172 बीमारियों का रिस्क, नींद पर अब तक की सबसे बड़ी स्टडी साइंस जर्नल 'हेल्थ डेटा साइंस' में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, रोज अलग-अलग समय पर सोना शरीर के लिए उतना ही नुकसानदायक है, जितना कम नींद लेना। आगे पढ़िए…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 





















